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जम्मू-कश्मीरः क्या आतंकवादी 'स्मार्ट' बन रहे हैं?

सुहास मुंशी | Updated on: 2 July 2016, 7:44 IST

जून का महीना कश्मीर के लिए काफी हिंसक रहा. 'साउथ एशिया टेररिज्म वेबसाइट पोर्टल' के अनुसार पिछले महीने राज्य में 20 आंतकी और 15 सुरक्षाबल विभिन्न हमलों में मारे जा चुके हैं. मरने वालों में पंपोर में हुए हमले में मारे गए सीआरपीएफ के आठ जवान भी शामिल हैं.

यहां पिछले छह महीने में आतंकवाद से जुड़ी विभिन्न वारदातों में 73 आतंकी, 30 सुरक्षाबल और पांच आम नागरिक मारे जा चुके हैं. पिछले साल की तुलना में राज्य में आतंकवाद तेजी से बढ़ा है. 

2015 में विभिन्न आतंकी वारदातों में 113 आतंकी, 41 सुरक्षाबल और 20 आम नागरिक मारे गए थे. वहीं 2014 में 110 आतंकी, 51 सुरक्षाबल और 32 आम नागरिक मारे गए थे.

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2013, 2012 और 2011 के आंकड़े भी कमोबेश समान हैं. पिछले पांच सालों में सबसे कम हिंसा 2012 में हुई थी, जब 84 आतंकी, 17 सुरक्षा बल और 16 आम नागरिक मारे गए थे.

हालांकि आतंकी हिंसा में मारे गए लोगों का सरकारी आंकड़ा 100-150 के बीच रहता है. मरने वालों में बाहरी और स्थानीय दोनों तरह के आतंकी शामिल होते हैं. जिनमें ज्यादातर विदेशी होते हैं. लेकिन एक दशक में पहली बार स्थानीय आतंकियों की संख्या विदेशी आतंकियों से ज्यादा हो गई है.

घाटी में सक्रिय कुल 142 आतंकियों में 88 स्थानीय निवासी हैं, बाकी पाकिस्तान या पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर के निवासी हैं.

इस साल सरकार द्वारा जारी आतंकियों के संभावित आंकड़े कमोबेश पिछले साल जैसे ही हैं. सरकार के अनुसार पिछले साल घाटी में कुल 145 आतंकी सक्रिय थे, जिनमें 91 स्थानीय और 54 विदेशी थे. जबकि सरकारी आंकड़ों के अनुसार 2015 में कुल 176 आतंकी मारे गए थे.

बाहरी घुसपैठ

आतंकियों की संख्या जस की तस बने रहने का मतलब है कि नए आतंकियों की भर्ती रुक नहीं रही है और विदेशी आतंकी अभी भी कश्मीर में घुसपैठ करने में सफल हो रहे हैं.

कश्मीर में होने वाली हिंसा राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय सुर्खियों में जगह पाती है. राज्य के अंदर और सीमापार होने वाली हिंसा और गोलीबारी से राज्य में अक्सर भय का माहौल रहता है.

जम्मू-कश्मीर की मुख्यमंत्री महबूबा मुफ्ती ने विधानसभा में जानकारी दी कि राज्य के 22 जिलों में से 15 में आतंक से जुड़ी वारदातें हुई हैं. जिन जिलों में ऐसी वारदातें नहीं हुईं उनमें लद्दाख के लेह और कारगिल तथा जम्मू के राजौरी, रियासी, किश्तवाड़ जिले शामिल हैं.

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श्रीनगर में 2015 में हिंसा की 15 घटनाएं हुईं. इस साल ये आंकड़ा बढ़ सकता है. 24 मई को शहर में दो जगहों पर हुए हमलों में तीन पुलिस वाले मारे गए थे.

साल 2015 में कश्मीर के कुपवाड़ा, बारामुला और बांदीपुरा में कुल 57 आंतकी घटनाएं हुईं. इनमें कुल 92 लोग मारे गए. मरने वालों में 60 आतंकी और 21 सुरक्षाबल शामिल थे.

साल 2015 में दक्षिणी कश्मीर के अनंतनाग, पुलवामा, कुलगाम और शोपियां में 61 आतंकी घटनाएं हुईं, जिनमें 34 आतंकियों और 12 सुरक्षाबलों समेत 54 लोग मारे गए.

सीमा पर गोलीबारी

15 जनवरी, 2015 से 15 जनवरी 2016 के बीच जम्मू में अंतरराष्ट्रीय सीमा पर गोलीबारी की 93 घटनाएं हुई. इस दौरान गोलीबारी में कुल छह आम लोगों की मौत हुई. वहीं तीन सुरक्षाबलों समेत 43 लोग घायल हुए.

कश्मीर की एलओसी पर 15 ऐसी घटनाएं हईं. जिनमें पांच सुरक्षा बल मारे गए.

राज्य के कई इलाकों में सेना, अर्ध सैनिक बल और पुलिस ने अपना जाल बिछा रखा है फिर पुलिस के अनुसार इस साल मारे गए 73 आतंकियों में 50 हाल ही में घाटी में आए घुसपैठिए थे. पुलिस के अनुसार पंपोर हमले में शामिल आंतकी भी नए रंगरूट थे. पुलिस के अनुसार ये सभी आतंकी फिदायीन थे.

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पुलिस के अनुसार आतंकियों ने अपने हमले की शैली में बदलाव किया है. एक पुलिस अफसर के अनुसार, "आंतकियों के रणनीति में बड़ा बदलाव दिख रहा है."

अफसर के अनुसार, "थोड़े से सनकी आतंकी, जिन्हें पहचानना भी मुश्किल होता है, ऐसी जगहों पर हमले करते हैं, जिससे उन्हें मीडिया की अधिक से अधिक तवज्जो मिले."

इससे उनकी ताकत असलियत से काफी अधिक प्रतीत होती है. एक अन्य पुलिस अफसर इसे 'स्मार्ट मिलिटेंसी' नाम देते हैं, जिसका मकसद कश्मीर में अलगाववादी की आग को जलाए रखना होता है.

First published: 2 July 2016, 7:44 IST
 
सुहास मुंशी @suhasmunshi

He hasn't been to journalism school, as evident by his refusal to end articles with 'ENDS' or 'EOM'. Principal correspondent at Catch, Suhas studied engineering and wrote code for a living before moving to writing mystery-shrouded-pall-of-gloom crime stories. On being accepted as an intern at Livemint in 2010, he etched PRESS onto his scooter. Some more bylines followed in Hindustan Times, Times of India and Mail Today.

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