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प्रिय मोदी जी, देशभक्ति पैदा करने के लिए तिरंगा यात्रा ही विकल्प है?

मोनोबिना गुप्ता | Updated on: 22 July 2016, 8:23 IST

बीजेपी 15 अगस्त के पहले 'राष्ट्रवादिता और देशभक्ति' की भावना जगाने वाले कुछ कार्यक्रमों का आयोजन कर सकती है. इंडियन एक्सप्रेस में 20 जुलाई को प्रकाशित एक खबर के अनुसार भारतीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सुझाव दिया है कि पार्टी को 'राष्ट्रवादिता और देशभक्ति को बढ़ावा देने के लिए पूरे देश में तिरंगा यात्रा निकालनी चाहिए.'

स्वतंत्रता दिवस को शुरू होने वाली यात्रा एक हफ्ते चलेगी. बीजेपी के एक सांसद ने एक्सप्रेस को बताया कि संसदीय दल की बैठक में पीएम मोदी ने कहा, "सांसदों और विधायकों को बाइक पर कम से कम आठ फिट लम्बा तिरंगा लेकर निकलना चाहिए ताकि जनता में राष्ट्रवादिता और देशभक्ति की भावना का प्रसार हो, खासकर नौजवानों में."

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पीएम मोदी जब पहली बार 'लोकतंत्र के मंदिर' में आए थे तो उन्होंने उसकी सीढ़ियों को प्रणाम किया था. देश के प्रति प्यार को जाहिर करने का कोई भी मौका वो नहीं छोड़ते. लेकिन शायद विदेश दौरों के समय पीएम मोदी को देशवासियों की याद नहीं आती.

कुछ आलोचकों का तो यहां तक कहना है कि पीएम मोदी अपने विदेश दौरों के समय घरेलू हालात से बेजार पूरी तरह अंतरराष्ट्रीय नेताओं और अंतरराष्ट्रीय मीडिया में तल्लीन रहते हैं. 

जब 8 जुलाई को कश्मीरी उग्रवादी बुरहान वानी सुरक्षाबलों से मुठभेड़ में मारा गया तो पीएम मोदी अफ्रीका के दौरे पर थे. उसके कुछ दिनों बाद वो देश लौटे. अपनी विदेश यात्रा और घर वापसी के बाद 16 जुलाई तक पीएम मोदी ने दर्जनों ट्वीट किए लेकिन उनमें से एक भी ट्वीट कश्मीर के ताजा हालात पर नहीं था. 

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इस दौरान पीएम मोदी बीजेपी नेताओं को जन्मदिन की शुभकामनाएं दीं. विदेशी दौरों की तस्वीरें शेयर कीं और अपनी उपलब्धियों को ट्विटर पर साझा किया लेकिन देश में उपजे गंभीर संकट पर उनका ध्यान नहीं गया.

कश्मीर में हो रहे विरोध प्रदर्शनों में एक पुलिस अधिकारी समेत चालीस से अधिक लोग मारे गए, सौ से ज्यादा लोग पैलेट गन से घायल हो गए लेकिन तब तक पीएम मोदी के कान पर जू नहीं रेंगी थी.

घरेलू मुद्दों पर चुप्पी

पीएम मोदी पर प्रमुख राष्ट्रीय मुद्दों पर चुप लगा जाने का आरोप पहले भी लगता रहा है, खासकर कथित 'राष्ट्रवादियों' द्वारा किए गए  अभद्र बरताव या टिप्पणियों के मामलों पर. 

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घरेलू मामलों के उलट अंतरराष्ट्रीय मामलों पर पीएम मोदी चट-पट ट्वीट करते नजर आते हैं. जब फ्रांस के नीस में 14 जुलाई को हमला हुआ तो पीएम ने कुछ ही देर बाद ट्वीट करके हमले की निंदा की और मृतकों को श्रद्धांजलि दी. भारतीय पीएम ने इसके बाद एक और ट्टवीट करके घायलों के शीघ्र स्वास्थ्य लाभ और मृतकों के परिवार वालों के प्रति अपनी संवेदना व्यक्ति की.

कश्मीर में जारी विरोध प्रदर्शनों के दौरान नौजवानों के मारे जाने, सड़कों पर उतरकर उनके आक्रोश व्यक्त करने की पीएम मोदी ने भले ही पूरी तरह नजरअंदाज कर दिया लेकिन 11 जुलाई को उन्होंने केन्याई नौजवानों को संबोधित करते हुए कई ट्वीट किए.

कश्मीर में जारी प्रदर्शनों के दौरान ही पीएम मोदी ने कुडनकुलम के दूसरे परमाणु रिएक्टर के शुरू होने पर भारतीय और रूसी परमाणु ऊर्जा वैज्ञानिकों को बधाई दी. लेकिन देश के अंदर होने वाली कई संवेदनशील घटनाओं पर वो चुप रहे.

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पीएम मोदी सोशल मीडिया को हमेशा ही अपने विचारों के प्रचार-प्रसार का जरूरी माध्यम बताते रहे हैं लेकिन जब कुछ घरेलू मामलों में उनसे हस्तक्षेप करने के लिए कहा जाता है तो वो 'मौन' प्रतीत होने लगते हैं. इसलिए सांस्कृतिक और धार्मिक सहिष्णुता पर दिए गए उनके भाषण खोखले लगने लगते हैं.

हम चाहें पिछले साल हुई मोहम्मद अखलाक की हत्या की बात करें या दलितों के संग हुई विभिन्न हिंसाओं की या सांप्रदायिक विद्वेष बढ़ाने वाली बयानबाजियों की, पीएम मोदी कभी भी अपनी राय रखने में वांछित फुर्ती नहीं दिखाते. 

बीजेपी पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह के 'मौन' पर हमेशा निशाना साधती रही है जबकि सिंह की छवि सदा से ही बहुत कम बोलने वाले नेता की रही थी. लेकिन भारतीय पीएम तो बोलने के लिए जाने जाते हैं, ऐसे में उनका 'मौन' देश को ज्यादा खलता है.

First published: 22 July 2016, 8:23 IST
 
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