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1965 की जंग में पाकिस्तान के छक्के छुड़ाने वाले अर्जन सिंह को देश का सलाम

कैच ब्यूरो | Updated on: 17 September 2017, 9:29 IST

भारतीय वायुसेना के मार्शल अर्जन सिंह का शनिवार को निधन हो गया. आशंका थी कि उन्हें दिल का दौरा पड़ा है, जिसके बाद उन्हें अस्पताल में भर्ती कराया गया था। वह 98 वर्ष के थे.

अर्जन सिंह को दिल का दौरा पड़ने की आशंका के बाद सेना अस्पताल में गंभीर हालत में भर्ती कराया गया, जहां उन्हें वेंटिलेटर पर रखा गया था. शनिवार शाम 7.47 बजे उनका निधन हो गया.

वायुसेना के मार्शल अर्जन सिंह भारतीय सैन्य इतिहास का वो चमकता सितारा हैं जिनकी बहादुरी के किस्से सुनकर सेना में भर्ती होने वाले नए रंगरूट और सभी प्रेरणा लेते हैं. अर्जन सिंह भारतीय वायु सेना के एक मात्र ऐसे सैन्य अधिकारी हैं जिन्हें फाइव स्टार रैंक हासिल है. जून 2008 में फील्ड मार्शल सैम मानेकशॉ की मृत्यु के बाद वे पांच सितारा रैंक वाले अकेले भारतीय सैन्य अधिकारी बचे हैं. भारतीय सेना में अब तक सिर्फ तीन लोगों को ही ये फाइव स्टार रैंक दी गई है, जिनमें एम करियप्पा, सैम मानेकशां और अर्जन सिंह शामिल हैं. अर्जन सिंह को 1965 के भारत-पाक युद्ध का हीरो कहा जाता है.

अर्जन सिंह का जन्म ब्रिटिश भारत में पंजाब के लयलापुर में हुआ था. अब ये पाकिस्तान का हिस्सा है और इसे फैसलाबाद के नाम से जाना जाता है. दादा और पिता दोनों ही सेना में थे तो सेना में शामिल होकर देश की सेवा करने का जज्बा बचपन से ही था. उन्होंने 1938 में आरएएफ कॉलेज क्रैनवेल में दाखिला लिया और दिसंबर 1939 में एक पायलट अधिकारी के रूप में नियुक्त हुए. द्वितीय विश्व युद्ध के दौरान अर्जन सिंह ने बर्मा में बतौर पायलट और कमांडर अदम्य साहस और वीरता का प्रदर्शन किया.अर्जन सिंह के प्रयासों की बदौलत ही ब्रिटिश भारतीय सेना ने इंफाल पर कब्जा किया.

1944 में सिंह ने भारतीय वायुसेना की नंबर 1 स्क्वाड्रन का अराकन अभियान के दौरान नेतृत्व किया. इसी साल उन्हें प्रतिष्ठित फ्लाइंग क्रॉस (डीएफसी) से सम्मानित किया गया और 1945 में भारतीय वायुसेना की प्रथम प्रदर्शन उड़ान की कमान सौंपी गई. लेकिन 1945 में एक बार केरल के घर के ऊपर से बहुत नीची उड़ान भरने के चलते कोर्ट मार्शल का भी सामना करना पड़ा. उस समय उन्होंने ये कहते हुए अपना बचाव किया था कि उन्होंने ऐसा एक प्रशिक्षु पायलट का मनोबल बढ़ाने के लिए किया था.

1950 में भारत के गणराज्य बनने के बाद अर्जन सिंह को ऑपरेशनल ग्रुप का कमांडर बनाया गया. 1 अगस्त 1964 को वे वायुसेना अध्यक्ष का पदभार सौंपा गया, जहां वे 1969 तक रहे. इसी बीच 1965 में पाकिस्तान के खिलाफ हुई जंग में अर्जन सिंह ने अद्भुत नेतृत्व क्षमता और अदम्य साहस का परिचय दिया. ऑपरेशन ग्रैंड स्लैम के तहत जब पाकिस्तान अखनूर शहर को अपना निशाना बनाया. यहां सिंह के नेतृत्व में भारतीय वायुसेना ने पाकिस्तान के भीतर घुसकर कई एयरफील्ड्स तबाह कर डाले.

उनके योगदान के लिए 1965 में उन्हें सर्वोच्च नागरिक सम्मान पद्मभूषण से नवाजा गया. इसी साल उन्हें वायुसेना अध्यक्ष से पदोन्नत कर एयर चीफ मार्शल बनाया गया था. बाद में 50 साल की उम्र में उन्होंने 1969 में रिटायरमेंट ले लिया. 1971 में अर्जन सिंह को स्विटजरलैंड में भारत का राजदूत नियुक्त किया गया. इसके अलावा उन्होंने वेटिकन और केन्या में भी देश के लिए अपनी सेवाएं दीं. 26 जनवरी 2002 को उन्हें वायुसेना का मार्शल नियुक्त किया गया था. 14 अप्रैल 2016 को मार्शल के 97 वें जन्मदिन पर तत्कालीन चीफ ऑफ एअर स्टाफ एयर चीफ मार्शल अरूप राहा ने पश्चिम बंगाल के पानागढ़ में भारतीय वायु सेना का नाम अर्जन सिंह के नाम पर रखा था.

First published: 17 September 2017, 9:29 IST
 
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