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Army Day 2019: जानिए कौन थे केएम करियप्पा और क्या है आर्मी डे मनाने की वजह

कैच ब्यूरो | Updated on: 15 January 2019, 12:10 IST

आज भारतीय थल सेना आर्मी डे मना रही है. 71 साल पहले आज ही के दिन फील्ड मार्शल केएम करियप्पा ने जनरल फ्रांसिस बुचर से भारतीय सेना की कमान ली थी. बता दें कि फ्रांसिस बुचर भारत के अंतिम ब्रिटिश कमांडर इन चीफ थे. फील्ड मार्शल केएम करियप्पा भारतीय आर्मी के पहले कमांडर इन चीफ बने थे. करियप्पा के भारतीय थल सेना के शीर्ष कमांडर का पदभाह ग्रहण करने के उपलक्ष्य में हर साल 15 जनवरी को आर्मी डे मनाया जाता है. इस दिन पूरा देश थल सेना के अदम्य साहस, उनकी वीरता, उसकी कुर्बानी को याद करता है.

बता दें कि भारतीय आर्मी का गठन 1776 में ईस्ट इंडिया कंपनी ने कोलकाता में की थी. आज भारतीय आर्मी के 53 कैंटोनमेंट और 9 आर्मी बेस हैं. इस साल खास बात है कि आर्मी परेड का नेतृत्व एक महिला अफसर करेंगी. लेफ्टिनेंट भावना कस्तूरी आर्मी सर्विस को लीड करेंगी. आर्मी चीफ बिपिन रावत सलामी लेंगे.

भारतीय सेना अमेरिका और चीन के बाद दुनिया की तीसरी सबसे बड़ी आर्मी है. 2013 में उत्तराखंड के बाढ़ पीड़ितों को बचाने के लिए चलाया जाने वाला 'ऑपरेशन राहत' दुनिया का सबसे बड़ा सिविलियन रेस्क्यू ऑपरेशन था. जिसे भारतीय सेना ने पूरे साहस के साथ निभाया था.

इस दिन सैन्य परेड, सैन्य प्रदर्शनियां और अन्य आधिकारिक कार्यक्रम होते हैं जो नई दिल्ली के अलावा सेना के सभी मुख्यालयों पर होते हैं. इस दिन उन सभी बहादुर सेनानियों को सलामी भी दी जाती है, जिन्होंने कभी ना कभी अपने देश और लोगों की सलामती के लिये अपना सर्वोच्च न्योछावर कर दिया.

कौन थे केएम करियप्पा

फील्ड मार्शल केएम करियप्पा का जन्म 1899 में कर्नाटक के कुर्ग में हुआ था. उन्होंने महज 20 साल की उम्र में ब्रिटिश इंडियन आर्मी ज्वाइन की थी. करिअप्पा ने साल 1947 के भारत-पाक युद्ध में पश्चिमी सीमा पर सेना का नेतृत्व किया. भारत-पाक आजादी के वक्त उन्हें दोनों देशों की सेनाओं के बंटवारे की जिम्मेदारी सौंपी गई थी.

साल 1953 में करिअप्पा सेना से रिटायर हो गए. बता दें कि भारतीय सेना में फील्ड मार्शल का पद सर्वोच्च होता है. ये पद सम्मान स्वरूप दिया जाता है. भारतीय इतिहास में अभी तक यह रैंक सिर्फ दो अधिकारियों को दी जा चुकी है. देश के पहले फील्ड मार्शल सैम मानेकशॉ हैं. उन्हें जनवरी 1973 में राष्ट्रपति ने फील्ड मार्शल पद से सम्मानित किया था. एम करिअप्पा देश के दूसरे फील्ड मार्शल थे. उन्हें 1986 में फील्ड मार्शल बनाया गया था.

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First published: 15 January 2019, 12:10 IST
 
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