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एलओसी पार भारतीय सेना के सर्जिकल स्ट्राइक का वो सच जो आप नहीं जानते!

कैच ब्यूरो | Updated on: 1 October 2016, 12:46 IST
(सांकेतिक तस्वीर)
QUICK PILL
  • भारतीय सेना के सर्जिकल स्ट्राइक की दुनिया भर में चर्चा है. 28 सितंबर को प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान  डीजीएमओ लेफ्टिनेंट जनरल रणबीर सिंह ने इस बारे में खुलासा किया.
  • रक्षा सूत्रों के मुताबिक इस कमांडो ऑपरेशन के दौरान भारत ने सात आतंकी शिविरों को तबाह कर दिया, जबकि तकरीबन 50 आतंकियों के मारे जाने की बात कही जा रही है.
  • उरी में 18 सितंबर को हुए आतंकी हमले में सेना के 19 जवान शहीद हुए हैं. भारतीय सेना की सर्जिकल स्ट्राइक को उरी हमले का बदला माना जा रहा है.

नियंत्रण रेखा के पार सेना के सर्जिकल स्ट्राइक को लेकर भारतीय मीडिया संस्थानों में कई दावे किए जा रहे हैं. हालांकि प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान डीजीएमओ रणबीर सिंह ने इस बारे में सीमित जानकारी दी थी. पहले मीडिया में खबर आई कि 38 आतंकियों को सर्जिकल हमले के दौरान मार गिराया गया.

इसके बाद शुक्रवार को कुछ टेलीविजन चैनलों ने सैटेलाइट तस्वीरों के जरिए 50 आतंकवादियों के मारे जाने की बात कही. यह भी कहा गया कि पाकिस्तानी सेना को भी इस हमले में भारी नुकसान हुआ. हालांकि पाकिस्तानी सेना ने आधिकारिक रूप से अपने दो सैनिकों के एलओसी पर फायरिंग में मारे जाने की बात मानी है.

उरी हमले के दस दिन बाद हुए भारतीय सेना के इस सर्जिकल ऑपरेशन का सच क्या है, इसको लेकर लोगों में काफी उत्सुकता है. अंग्रेजी अखबार इंडियन एक्सप्रेस ने इस सर्जिकल स्ट्राइक के बारे में रक्षा सूत्रों के हवाले से कुछ तथ्य प्रकाशित किए हैं. एक नजर इस रिपोर्ट पर: 

70-80 पैरा कमांडो मिशन में शामिल

बुधवार रात पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर में भारतीय सेना की सर्जिकल स्ट्राइक में 70 से 80 कमांडो मिशन में शामिल थे. सेना के सूत्रों ने बताया कि किसी भी आपात स्थिति से निपटने के लिए वायु सेना के हमलावर हेलीकॉप्टर्स जम्मू-कश्मीर के चार बेस पर पूरी तरह से तैयार थे.

सेना सूत्रों के मुताबिक वहां पैरा स्पेशल फोर्सेज की दो अलग-अलग बटालियन को आतंकी ठिकानों को ध्वस्त करने के लिए लगाया गया था. 4 पैरा स्पेशल फोर्सेज के कमांडो एलओसी पार करके कुपवाड़ा के नौगाम सेक्टर के तुतमारी गली में आधी रात को पहुंचे थे. ठीक उसी समय 9 पारा स्पेशल फोर्सेज के कमांडो पुंछ सेक्टर के बलोनी और नांगी टिकरी पहुंचे थे.

पूरे ऑपरेशन की निगरानी रक्षा मंत्री पर्रिकर, एनएसए अजीत डोभाल और सेनाध्यक्ष दलबीर सुहाग ने की. (सांकेतिक तस्वीर)

एमआई-35 हेलीकॉप्टर रहे मुस्तैद

सूत्रों के मुताबिक करीब 1 से 3 किलोमीटर तक पैदल चलने के बाद सुबह करीब 2 बजे ये पैरा कमांडो अपने-अपने चिन्हित निशाने के पास पहुंचे और आतंकी ठिकानों को नष्ट करना शुरू कर दिया.

पैरा ट्रूपर्स ने इस दौरान अपने कंधे पर रखकर 84 एमएम कार्ल गुस्ताव रॉकेट लॉन्चर और ऑटोमेटिक ग्रेनेड लॉन्चर से हमला किया. वायुसेना के सूत्रों के मुताबिक, एमआई-35 हमलावर हेलीकॉप्टर को पूरी तैयारी के साथ अलर्ट रहने को कहा गया था.

अंग्रेजी अखबार के मुताबिक सर्जिकल स्ट्राइक से पहले सेना ने नियंत्रण रेखा के करीब 250 किलोमीटर के दायरे को सर्विलांस पर एक हफ्ते पहले से ले रखा था. बुधवार की रात सेना ने 9 बजे से ही नियंत्रण रेखा यानी एलओसी को सील करना शुरू कर दिया था, जिससे पाकिस्तानी सेना का ध्यान भटकाया जा सके.

भारतीय सेना की सर्जिकल स्ट्राइक को पुंछ और उरी आतंकी हमले का बदला माना जा रहा है. (सांकेतिक तस्वीर)

सैन्य ऑपरेशन का कोई नाम नहीं

एक दिन पहले ही हेलीकॉप्टर से सेना ने पूरे इलाके की निगरानी कर ली थी. सर्जिकल स्ट्राइक के दौरान आतंकी ठिकानों को नष्ट करने के बाद लौटते वक्त एक सैनिक को माइन ब्लास्ट के दौरान हल्की चोट आई.

सैन्य सूत्रों ने बताया कि यह चोट दुश्मन के किसी प्रतिरक्षात्मक कार्रवाई में नहीं हुई और सभी कमांडो सुबह 4.30 बजे तक सर्जिकल स्ट्राइक को अंजम देकर भारतीय सीमा में लौट आए थे.

सेना सूत्रों के मुताबिक इस सैन्य ऑपरेशन को कोई नाम नहीं दिया गया था. गुरुवार की सुबह 8 बजे के करीब यह ऑपरेशन सफलतापूर्वक खत्म कर दिया गया.

गौरतलब है कि भारतीय सेना ने बुधवार की रात पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर के भिंबेर, केल, लिपा और हॉटस्प्रिंग सेक्टर में आतंकियों के सात ठिकानों को ध्वस्त करने का दावा किया था. हालंकि पाकिस्तान ऐसे किसी सर्जिकल हमले को खारिज कर चुका है.

First published: 1 October 2016, 12:46 IST
 
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