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एनजीटी की सख्ती के आगे झुके श्रीश्री रविशंकर

कैच ब्यूरो | Updated on: 6 June 2016, 12:14 IST
(फाइल फोटो)

राष्ट्रीय हरित अधिकरण यानी एनजीटी के सख्त रुख के बाद आर्ट ऑफ लिविंग ने दिल्ली में यमुना किनारे आयोजन के लिए लगाए गए जुर्माने की बकाया 4.75 करोड़ की रकम अदा कर दी है.

मार्च में विश्व सांस्कृतिक महोत्सव के आयोजन को लेकर पर्यावरण नुकसान के सिलसिले में एनजीटी ने आध्यात्मिक गुरु श्रीश्री रविशंकर की संस्था आर्ट ऑफ लिविंग पर पांच करोड़ का जुर्माना ठोका था.

इसमें से 25 लाख रुपये पहले अदा कर दिए गए थे, लेकिन बाकी की रकम आर्ट ऑफ लिविंग ने नहीं जमा की थी. श्रीश्री की संस्था ने बैंक गारंटी के जरिए बकाया जुर्माना अदा करने का प्रस्ताव रखा था, जिसे एनजीटी ने खारिज कर दिया था.

आर्ट ऑफ लिविंग ने तीन जून को बैंक ड्राफ्ट के जरिए दिल्ली विकास प्राधिकरण (डीडीए) के खाते में जुर्माने के बकाया चार करोड़ 75 लाख रुपये जमा कराए हैं.

यमुना किनारे कार्यक्रम पर जुर्माना

मार्च में यमुना के किनारे श्रीश्री रविशंकर की संस्था आर्ट ऑफ लिविंग ने भव्य सांस्कृतिक कार्यक्रम आयोजित किया था. एनजीटी ने विवादों के बावजूद यमुना नदी के बाढ़ क्षेत्र में आर्ट ऑफ लिविंग के इस तीन दिवसीय सांस्कृतिक कार्यक्रम को हरी झंडी दे दी थी. 

मामले की सुनवाई के दौरान एनजीटी ने आर्ट ऑफ लिविंग की बैंक गारंटी से जुर्माना चुकाने की दलील खारिज करते हुए कहा था कि प्रोग्राम करने की इजाजत इसी शर्त पर दी गई थी कि आप रकम समय पर चुकाएंगे.

पढ़ें: श्रीश्री रविशंकर को एनजीटी से झटका, बैंक गारंटी से जुर्माना भरना नामंजूर

एनजीटी ने कहा कि रकम चुकाने के बजाय आप अपने वादे से मुकर गए और फिर ये रकम न चुकानी पड़े उसके लिए आपने ढेरों याचिकाएं दाखिल कर दीं.

एनजीटी के फैसले से कुछ हफ्ते पहले विशेषज्ञों के एक पैनल ने कहा था कि आर्ट ऑफ लिविंग पर पर्यावरण को हुए नुकसान के लिए करीब 120 करोड़ रुपये का हर्जाना लगाया जाना चाहिए.

एनजीटी ने आध्यात्मिक गुरु श्रीश्री रविशंकर के खिलाफ नोटिस भी जारी किया था. जिसमें सवाल पूछा गया कि क्यों न उनके खिलाफ अदालत के अवमानना की कार्यवाही शुरू की जाए.

दरअसल एक इंटरव्यू के दौरान श्रीश्री रविशंकर ने कहा था कि उनके खिलाफ जो जुर्माना लगाया गया था, वो राजनीतिक मंशा से प्रेरित था.

First published: 6 June 2016, 12:14 IST
 
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