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'CBI की साख बनी रहे इसलिए मोदी सरकार ने दोनों अफसरों को भेजा छुट्टी पर'

कैच ब्यूरो | Updated on: 24 October 2018, 13:48 IST

देश की सबसे बड़ी जांच एजेंसी सीबीआई में मचे घमासान के बीच मोदी सरकार ने सीबीआई मुखिया आलोक वर्मा और स्पेशल डायरेक्टर राकेश अस्थाना दोनों को छुट्टी पर भेज दिया है. जिसे लेकर समूचा विपक्ष मोदी सरकार पर हमलावर हो गया है. वहीं इस घमासान पर केंद्र सरकार ने अपना बचाव किया है. वित्त मंत्री अरुण जेटली ने कहा कि केन्द्र सरकार का दायित्व सिर्फ सुपरवीजन का है. 

 

अरुण जेटली ने एक प्रेस कांफ्रेंस कर कहा कि सीबीआई में जो भी हुआ वह दुर्भाग्यपूर्ण है. आलोक वर्मा और राकेश अस्थाना को छुट्टी पर भेजे जाने के फैसले की आलोचना के जवाब में जेटली ने कहा कि सीवीसी की सिफारिश के आधार पर ही उन्हें छुट्टी पर भेजा गया है. सीवीसी के पास मामले की जांच करने का अधिकार है और उसके पास सारे कागजात हैं.

 

वित्त मंत्री ने कहा कि CBI इस देश प्रतिष्ठित संस्था है. इसकी साख बनी रहे इसके लिए केन्द्र सरकार तत्पर है. उन्होंने कहा कि दो वरिष्ठ डायरेक्टरों ने एक दूसरे पर आरोप लगाया है. इसकी जांच कौन करेगा यह सरकार के सामने सवाल है. यह केन्द्र सरकार के अधिकार क्षेत्र में नहीं आता और न ही सरकार इसकी जांच करेगी.

जेटली ने कहा, "सीबीआई के अधिकारियों में किसी को दोषी नहीं मान रहे हैं. कानून के मुताबिक जब तक जांच पूरी न हो इसलिए अधिकारियों को बाहर कर दिया गया है. यदि जांच में उनकी भूमिका पर सवाल नहीं उठता तो वह वापस अपने कार्यभार को लेंगे. लेकिन निष्पक्ष जांच के लिए जरूरी था कि जांच की अवधि तक अधिकारियों को सीबीआई से बाहर रखा जाए."

 

जेटली ने कहा कि सरकार की भूमिका पर सवाल उठाना गलत है. सीवीसी सुपरवाइजरी अथॉरिटी है और वह एसआईटी का गठन करेगी. सरकार की इस मामले में कोई भूमिका नहीं है और न ही सरकार इसमें किसी भूमिका को अदा करने की दिशा में देख रही है. मंगलवार को सीवीसी की मीटिंग हुई और बुधवार को सरकार ने यह फैसला लिया. लिहाजा, सरकार की भूमिका पर सवाल उठाने का कोई मतलब नहीं है.

First published: 24 October 2018, 13:48 IST
 
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