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क्या भारत के टुकड़े करना अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के दायरे में है?

कैच ब्यूरो | Updated on: 25 February 2016, 17:54 IST

गुरुवार को राज्यसभा में राष्ट्रवाद पर चर्चा के दौरान वित्त मंत्री अरुण जेटली ने सवाल उठाया कि क्या हम ऐसे लोगों को समर्थन दे रहे हैं, जिनकी सोच ही इस देश के टुकड़े करने की है? क्या भारत के टुकड़े करना अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के दायरे में है?

जेटली ने जेएनयू मसले पर कांग्रेस पर जमकर हमला बोला. उन्होंने कहा कि वैचारिक बहस यूनिवर्सिटीज़ का हिस्सा हैं, लेकिन क्या उसके नाम पर हम देश विरोधी नारे लगाने की इजाजत दे सकते हैं?

जेटली ने कांग्रेस पर सवाल उठाते हुए कहा, 'जेएनयू जाने से पहले आपको सोचना चाहिए था, आप तो काफी समय तक सत्ता में रहे हैं. हम तो नए-नए आए हैं. आपके दो नेताओं को आतंकवादियों ने मारा है, आपको इस मामले में हमसे ज्यादा संवेदशील होना चाहिए.'

जेटली ने वामपंथी पार्टियों पर करारा हमला बोलते हुए कहा, 'कुछ लोग जेएनयू में नकाब पहनकर आते हैं. एक अल्ट्रालेफ्ट माओवादी और दूसरे अलगाववादी यहां सैकड़ों की संख्या में जुटते हैं. जो पर्चे बांटे गए हैं, उन्हें कोई नकार नहीं सकता. ये पक्के सबूत हैं.'

जेटली ने कहा कि कोई विचारधारा देश को तोड़ने की बात करे तो ये स्वीकार्य नहीं. यह बात बहुत स्पष्ट है कि इस देश में शैक्षिक स्वतंत्रता पर कोई पाबंदी नहीं है.

उन्होंने कहा कि कोई राष्ट्रविरोधी विचारधारा को कैसे स्वीकर कर सकता है. जादवपुर यूनिवर्सिटी में भी देश विरोधी नारे लगे. ये कैसी अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता है?

First published: 25 February 2016, 17:54 IST
 
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