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'बोफोर्स से भी बड़ा घोटाला है राफेल सौदा' पर निर्मला सीतारमण और जेटली ने दिया बयान

कैच ब्यूरो | Updated on: 9 August 2018, 9:02 IST

पूर्व केंद्रीय मंत्री एवं बीजेपी नेता यशवंत सिन्हा और अरुण शौरी ने मोदी सरकार पर आरोप लगाते हुए कहा कि राफेल सौदा बोफोर्स घोटाले से भी काफी बड़ा घोटाला है.

यशवंत सिन्हा और अरुण शौरी ने सामाजिक कार्यकर्ता और वकील प्रशांत भूषण के साथ एक संवाददाता सम्मेलन को संबोधित करते हुए फ्रांस से 36 राफेल लड़ाकू विमान खरीदने से जुड़े 58,000 करोड़ रुपये के सौदे के संबंध में कई सवाल उठाए. प्रशांत भूषण ने राफेल सौदे को देश का अब तक का 'सबसे बड़ा रक्षा घोटाला' बताते हुए आरोप लगाया कि इससे सरकारी खजाने को कम से कम 35 हजार करोड़ रुपये का नुकसान हुआ है.

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तीनों ने सरकार के उस तर्क को भी खारिज किया कि विमानों की कीमत उनमें विशिष्टताओं तथा विशिष्ट हथियार प्रणालियों की वजह से बढ़ गई. तीनों ने कहा कि सरकार ने तथ्यों को छिपाने का प्रयास किया. इन तीनों ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर अकेले ही सौदे से जुडे मानकों को बदलने का आरोप लगाया. तीनो ने कहा कि सौदे को अंतिम रूप में देने में आवश्यक प्रक्रियाओं का गंभीर उल्लंघन किया गया. आरोप लगाया कि समूचा सौदा 'आपराधिक कदाचार , सार्वजनिक पद के दुरुपयोग और राष्ट्रीय हित तथा राष्ट्रीय सुरक्षा की कीमत पर पक्षों को संपन्न बनाने का अनूठा मामला है.'

बता दें कि कांग्रेस पार्टी राफेल सौदे में भारी अनियमितताओं के आरोप लगाती रही है. उसका कहना है कि सरकार एक राफेल विमान के लिए 1,670 करोड़ रुपये का भुगतान कर रही है, जबकि संप्रग सरकार ने 126 राफेल विमानों की खरीद के लिए एक राफेल की कीमत का सौदा 526 करोड़ रुपये में किया था.

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वहीं तीनों के आरोप के जवाब में केंद्रीय मंत्री निर्मला सीतारमण और अरुण जेटली ने बुधवार को राफेल लड़ाकू विमान सौदे के आरोपों को खारिज किया और कहा कि सरकार इस संबंध में संसद में पहले ही जवाब दे चुकी है. रक्षामंत्री निर्मला सीतारमण ने आरोपों को निराधार बताकर खारिज कर दिया. निर्मला सीतारमण ने ट्वीट किया कि सरकार संसद में पहले ही आरोपों पर जवाब दे चुकी है. निराधार आरोपों के जरिए सरकार की छवि खराब करने का हालिया प्रयास संसद में धराशायी हो गया था.

वहीं जेटली ने कहा कि सरकार के खिलाफ अपुष्ट आरोप कुछ नहीं, बल्कि उन शक्तियों द्वारा झूठ को फिर से झाड़-फूंककर पेश किया जाना है जो अपनी प्रासंगिकता साबित करने में लगातार हताश होती जा रही हैं. सरकार ने पहले ही इस मुद्दे पर विकृत कर पेश की गयीं चीजों एवं दुष्प्रचार का प्रभावी तरीके से जवाब दे दिया था. उन्होंने कहा कि ये आरोप राफेल लड़ाकू विमान की खरीद के लिए 2016 में दो सरकारों के बीच हुए समझौते के बारे में झूठ और मनगढ़ंत तथ्य फैलाकर सरकार को बदनाम करने की बस एक और कोशिश हैं.

First published: 9 August 2018, 8:45 IST
 
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