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अरुणाचल की सत्ता पाने को बेताब बीजेपी और कलिको पुल

चारू कार्तिकेय | Updated on: 10 February 2017, 1:48 IST
QUICK PILL
  • अरुणाचल प्रदेश में नबाम तुकी की सरकार को लेकर आए सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद राज्यपाल जेपी राजखोवा ने तुकी को 16 जून को विधानसभा में शक्ति परीक्षण करने को कहा है.
  • हालांकि इस बीच दूसरे असंतुष्ट धड़े ने पूर्व मुख्यमंत्री पुल के नेतृत्व में एक होटल में 41 विधायकों की परेड कराकर शक्ति प्रदर्शन किया है.

लोकतंत्र कभी निहित स्वार्थों के लोगों का अखाड़ा बन जाता है. अरुणाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री नबाम तुकी की ताजपोशी और कोर्ट के आदेश के बाद मुख्यमंत्री पद से हटाए गए कलिको पुल फिलहाल अरुणाचल प्रदेश में जारी सियासी खेल के मोहरे बने हुए हैं.

बीजेपी ने जिस तरह से विधानसभा की बजाए गुवाहाटी के एक होटल में पुल के नेतृत्व में विधायकों के शक्ति परीक्षण की मंजूूरी दी, वह निराशाजनक है. राज्य के राज्यपाल राजखोवा आरएसएस के समर्पित कार्यकर्ता हैं. उन्होंने तुकी को 16 जून को विधानसभा में शक्ति परीक्षण करने के लिए कहा है. लेकिन इस बीच पुल ने अपनी ताकत दिखा डाली. उन्होंने अपने पक्ष में समर्थन दिखाने के लिए 41 विधायकों की परेड करवाई. 

अगर रॉय तुकी के विश्वास मत को देर से कराए जाने की अपील को खारिज करते हैं तो पुल आसानी से राज्य में अपना बहुमत साबित कर सकते हैं. हालांकि उन्होंने यह काम होटल मेें करना मुनासिब समझा, जबकि तीन दिनों बाद ही विधानसभा में शक्ति परीक्षण किया जाना है.

बीजेपी पहले ही सुप्रीम कोर्ट के फैसले को अजीब बता चुकी है. उनका कहना है कि वैसी पार्टी को विपक्ष में बैठने के लिए कहा जा रहा है जिनके पास बहुमत है. यह बताता है कि पार्टी सुप्रीम कोर्ट के आदेश को मानने के लिए तैयार नहीं है. जबकि सुप्रीम कोर्ट का आदेश बताता है कि राज्यपाल राजखोवा का फैसला पूरी तरह से गलत था.

बीजेपी चाहती है कि लोग उन सभी घटनाक्रम को भूल जाएं जिसे कोर्ट ने गलत साबित किया है. वह बस यह बताना चाहती है कि पुल पिछले पांच महीनों में बहुमत की सरकार के मुखिया रहे हैं और सुप्रीम कोर्ट का फैसला उनके लिए चुनौती है.

दरअसल यह बीजेपी की खुद की संवैधानिक दृष्टि है जो सुप्रीम कोर्ट के नजरिये के उलट है. पुल बीजेपी के साथ हैं और वह बीजेपी के नेतृत्व वाली नॉर्थ ईस्ट डिवेलपमेंट अलायंस में शामिल हो चुके हैं.

गठबंधन का मकसद

गठबंधन के संयोजक हेमंत बिस्वा शर्मा की माने तो गठबंधन का मकसद पूर्वोंत्तर के राज्यों से कांग्रेस का सफाया है.

अगर कांग्रेस इसी तरह से चलती रही तो ऐसा होने में देर भी नहीं लगेगी. जैसा कि असम में हुआ. हालांकि अरुणाचल प्रदेश में बीजेपी ने जो किया और मणिपुर एवं मेघालय में सरकार गिराने की कोशिश बताती है कि वह पूर्वोत्तर के राज्यों को सही तरीके से कांग्रेस मुक्त नहीं कर सकती है.

कांग्रेस मुक्त भारत का मकसद उसके तरीकों पर निर्भर है. बीजेपी दो बार इस मामले में मुंह की खा चुकी है. 

First published: 16 July 2016, 8:08 IST
 
चारू कार्तिकेय @charukeya

असिस्टेंट एडिटर, कैच न्यूज़, राजनीतिक पत्रकारिता में एक दशक लंबा अनुभव. इस दौरान छह साल तक लोकसभा टीवी के लिए संसद और सांसदों को कवर किया. दूरदर्शन में तीन साल तक बतौर एंकर काम किया.

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