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घटनाक्रम: अरुणाचल प्रदेश में कब-कब क्या हुआ?

चारू कार्तिकेय | Updated on: 13 July 2016, 16:30 IST
(एएनआई)

बुधवार को पूर्वोत्तर भारत में बीजेपी के लिए ये मौका खुशी मनाने का था. पार्टी अध्यक्ष अमित शाह ने इस दिन औपचारिक तौर पर नार्थईस्ट डेमोक्रेटिक एलायंस (एनईडीए) को उद्घाटन किया. लेकिन सुप्रीम कोर्ट की वजह से बीजेपी के लिए ये दिन झेंप की वजह बन गया.

असम में भारी बहुमत से सरकार बनाने से पहले पूर्वोत्तर भारत में बीजेपी ने अपना अभियान अरुणाचल प्रदेश से शुरू किया था. अरुणाचल में सत्ताधारी कांग्रेस की आपसी फूट के कारण राष्ट्‌पति को अनमने ढंग से राज्य में राष्ट्रपति शासन लगाने की अनुमति देनी पड़ी.

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कांग्रेस ने इस फैसले को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी. देश की सर्वोच्च अदालत की पांच सदस्यों की पीठ ने एकमत से राज्य में लगाए गए राष्ट्रपति शासन को असंवैधानिक करार दिया. साथ ही राज्य में फिर से कांग्रेस की सरकार बहाल करने का आदेश भी दिया.

सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद बीजेपी ये कहकर इज्जत बचाने की कोशिश कर रही है कि अरुणाचल में जो हुआ वो कांग्रेस की अंदरूनी कलह का परिणाम था.

एनईडीए के निर्माण के पीछे बीजेपी के 'कांग्रेस मुक्त भारत' नारे की अहम भूमिका मानी जा रही है. अब यह विडंबना ही है कि जिस दिन ये गठबंधन बन रहा है उसी दिन राज्य में कांग्रेस सरकार की वापसी तय हुई.

आइए अरुणाचल प्रदेश के अब तक के घटनाक्रम पर सिलसिलेवार ढंग से नजर डालें:

नौ दिसंबर, 2015

अरुणाचल प्रदेश में शीतकालीन सत्र 14 जनवरी से 18 जनवरी 2016 तक होने वाला था. लेकिन राज्यपाल जेपी राजखोवा ने अचानक ही सत्र का समय 16 दिसंबर से 18 दिसंबर 2015 कर दिया. राजखोवा ने विधानसभा अध्यक्ष नबाम रेबिया पर महाभियोग चलाने की विपक्ष की नोटिस को भी प्राथमिकता के साथ लेने का आदेश दे दिया. 

16 दिसंबर, 2015

"बागी" विधायकों ने एक कम्युनिटी हॉल में विधानसभा की बैठक बुलाई. कांग्रेस के बागी नेता कलिको पुल अपने 21 समर्थक विधायकों के साथ और बीजेपी के 11 और दो निर्दलीय विधायक भी साथ इस बैठक में शामिल हुए.

इस बैठक की अध्यक्षता अरुणाचल प्रदेश के विधानसभा उपाध्यक्ष (जो बागियों में शामिल थे) ने की. इसी बैठक में विधानसभा अध्यक्ष को महाभियोग लगाकर पद से हटा दिया गया. बैठक में मुख्यमंत्री नेबाम तुकी के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पारित किया गया और पुल को सदन का नया नेता चुना गया.

राज्यपाल के इस फैसले को चुनौती देने के लिए रेबिया गोवाहाटी हाईकोर्ट में चले गए.

13 जनवरी , 2016

सुप्रीम कोर्ट ने राज्यपाल को विधानसभा आहुत करने से रोक दिया. कोर्ट ने 18 जनवरी तक राज्य विधानसभा की बैठक न बुलाए जाने का आदेश दिया. कोर्ट ने ये आदेश रेबिया के याचिका पर दिया था. रेबिया ने सुप्रीम कोर्ट से अपील की थी कि हाईकोर्ट में चल रहा उनका मामला सुप्रीम कोर्ट में स्थांतरित किया जाए.

15 जनवरी, 2016

सुप्रीम कोर्ट की पांच सदस्यों वाली पीठ ने मुख्यमंत्री और मंत्रिमंडल से सलाह-मशविरा किए बगैर राज्यपाल द्वारा विधानसभा का सत्र तय समय से पहले बुलाए जाने की वैधानिकता पर सुनवाई शुरू की.

25 जनवरी, 2016

केंद्रीय मंत्रिमंडल की अनुशंसा पर अरुणाचल प्रदेश में राष्ट्रपति शासन लगा. कांग्रेस ने इसका खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में एक और अपील दायर की. दो दिन बाद 27 जनवरी को सुप्रीम कोर्ट केंद्र सरकार और अरुणाचल प्रदेश के राज्यपाल को नोटिस जारी की.

17, फरवरी 2016

केंद्रीय मंत्रिमंडल ने राज्य में लगे राष्ट्रपति शासन को हटाने की अनुशंसा की लेकिन सुप्रीम कोर्ट ने यथास्थिति बनाए रखने के लिए कहा. अगले दिन सुप्रीम कोर्ट ने स्थगन आदेश वापस ले लिया. नतीजतन, 19 फरवरी को राज्य में नई सरकार बनने की राह प्रशस्त हो गई.

19, फरवरी 2016

राष्ट्रपति शासन हटने के कुछ ही देर बाद कांग्रेस के बागी नेता कोलिको पुल ने राज्य के नए मुख्यमंत्री के तौर पर शपथ ली. तुकी ने राष्ट्रपति शासन हटाने और नई सरकार के गठन पर सवाल उठाया. उन्होंने मांग की कि राज्य में पिछली सरकार बहाल की जानी चाहिए और सीएम के तौर पर उनकी वापसी होनी चाहिए.

13 जुलाई, 2016

सुप्रीम कोर्ट ने राज्य में कांग्रेस सरकार को बहाल कर दिया. सुप्रीम कोर्ट ने अपने फैसले में कहा कि राज्यपाल का विधानसभा सत्र नियत समय से पहले बुलाना 'संविधान का उल्लंघन' था. सर्वोच्च अदालत ने ये भी कहा कि राज्यपाल के नौ दिसंबर 2015 के फैसले के बाद हुई विधानसभा की सभी बैठकों में लिए गए फैसले असंवैधानिक हैं और उन्हें निष्प्रभावी माना जाय. कोर्ट ने अरुणाचल में 15 दिसंबर, 2015 की स्थिति बहाल करने का भी फैसला दिया.

First published: 13 July 2016, 16:30 IST
 
चारू कार्तिकेय @CharuKeya

Assistant Editor at Catch, Charu enjoys covering politics and uncovering politicians. Of nine years in journalism, he spent six happily covering Parliament and parliamentarians at Lok Sabha TV and the other three as news anchor at Doordarshan News. A Royal Enfield enthusiast, he dreams of having enough time to roar away towards Ladakh, but for the moment the only miles he's covering are the 20-km stretch between home and work.

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