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वसुंधरा सरकार: जवाबदेही मांगते कार्यकर्ताओं पर लाठी भांजते विधायक

दीपक शर्मा | Updated on: 19 January 2016, 23:39 IST
QUICK PILL
  • राजस्थान की मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे के गृह क्षेत्र में सरकार से जवाबदेही की मांग कर रहे सामाजिक कार्यकर्ताओं को भाजपा विधायक और असामाजिक तत्वों ने लाठी-डंडों से पीटा.
  • सूचना एवं रोज़गार मंच नामक संगठन के कार्यकर्ता समाजसेवी अरूणा रॉय और निखिल डे की अगुवाई में झालावाड़ में विरोध प्रदर्शन कर रहे थे.

जवाबदेही सियासत का सबसे प्रचलित जुमला बन गया है. हर पार्टी और नेता जनता के प्रति उत्तरदायी होने का दम भरता है. राजस्थान की मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे भी उन्हीं में से हैं.

उनकी सरकार ऐसे कई कदम उठाने का दावा करती है, जो जनता को हाकिमों से हक के सवाल पूछने की ताकत देते हैं. लेकिन मुख्यमंत्री के अपने गृह जिले में जो हुआ उससे आंखें खुली रह जाएंगी. जवाबदेही मांग रहे लोगों को लाठी और डंडे की मार मिली.

शनिवार को झालावाड़ ज़िले के अकलेरा कस्बे में राज्य-स्तरीय जवाबदेही यात्रा निकाल रही सामाजिक कार्यकर्ता अरुणा रॉय के समर्थकों पर जमकर लाठियां भांजी गईं. पूरा वाकया शायद सुर्खियां ना बनता अगर इस हमले के वीडियो में स्थानीय विधायक कंवरलाल मीणा हमलावरों की अगुवाई करते नज़र नहीं आते.

झालावाड़ वसुंधरा राजे का गृह ज़िला है. उनके बेटे दुष्यंत सिंह यहां से सांसद हैं. लिहाज़ा हमले की आंच सीधे सीएम के दामन तक पहुंच रही है. मसला इसलिए भी उछल रहा है क्योंकि जवाबदेही यात्रा का आयोजन प्रतिष्ठित समाजसेवी अरूणा रॉय और निखिल डे की अगुवाई में बना संगठन सूचना एवं रोज़गार मंच कर रहा है.

ऐसे हुआ हमला

सूचना एवं रोज़गार मंच के कार्यकर्ता शनिवार शाम करीब 4:30 बजे अकलेरा कस्बे के तीन बत्ती चौराहे पर पहुंचे थे. कार्यकर्ताओं का समूह नुक्कड़ नाटक और गीतों के ज़रिए अपना संदेश लोगों तक पहुंचा रहा था. उसी वक्त तीन लोगों ने लाठी-डंडे के साथ उनपर धावा बोल दिया. कार्यकर्ताओं के कैमरे छीनने की कोशिश की गई, कुछ लोगों के साथ धक्का-मुक्की हुई.

किसी तरह कार्यकर्ताओं ने तीनों हमलावरों से पीछा छुड़ाया.अभी यात्रा बमुश्किल सौ मीटर ही आगे बढ़ी थी कि एक बार फिर मोर्चे पर हमला बोल दिया गया. इस बार पत्थरों और लाठियों से लैस करीब चालीस लोग समाजसेवी कार्यकर्ताओं पर टूट पड़े.

पूरी वारदात के वीडियो में मनोहर थाना के बीजेपी विधायक कंवरलाल मीणा, संतरी रंग की कमीज़ पहने हमलावरों की अगुवाई करते देखे जा सकते हैं. वीडियो में लाठी थामे मीणा कारों में तोड़-फोड़ करते और शंकर सिंह नाम के एक सामाजिक कार्यकर्ता पर हमला करते दिख रहे हैं. मौके पर मौजूद सामाजिक कार्यकर्ता कमल टांक के मुताबिक “हमलावरों ने वाहनों के शीशे तोड़े. महिला कार्यकर्ताओं तक को नहीं बख्शा गया.

मौके पर मौजूद पुलिसकर्मी तमाशबीन बने रहे. कार्रवाई के लिए कहे जाने पर पुलिसवालों ने ये कहकर पल्ला झाड़ लिया कि "वो हमलावरों को जानते हैं और बाद में एक्शन लेंगे.” हालांकि मीणा दावा कर रहे हैं कि वो मौक पर बीच-बचाव के लिए पहुंचे थे. लेकिन वीडियो उनकी कुछ और ही कहानी बयान कर रहा है.

अपनी सफाई पेश करते हुए मीणा का कहना था, “ मुझे फोन आया था कि भीड़ कुछ लोगों के साथ मारपीट कर रही है. घर पास होने की वजह से मैं तुरंत गया. मैं वहां बीच बचाव के लिए गया था. मैंने एक-दो लोगों से लाठी छुड़ाकर एक तरफ फेंका. जब तक मैं बीच-बचाव करता तब तक पुलिस पहुंच गई.” यात्रा में शामिल सामाजिक कार्यकर्ताओं का दावा है कि पूरे वाकये में कुछ महिलाओं समेत कुल 12 लोग घायल हुए हैं.

प्रशासन की प्रतिक्रिया

जैसे ही घटना की सूचना मिली स्थानीय कलक्टर विष्णु चरण मलिक और एसपी राजेंद्र सिंह प्रशासनिक अमले के साथ मौके पर पहुंचे. घायल कार्यकर्ता शंकर सिंह रावत की शिकायत पर पुलिस ने केस दर्ज किया है.

रविवार को 20-22 साल की उम्र के चार आरोपियों को भी गिरफ्तार किया गया. आरोपी सूरज (22), राम विलास (20), लाल चंद (20) और बीरम (22) अकलेरा के ही रहने वाले हैं. सूत्रों के मुताबिक दर्जनों अन्य लोगों को भी पूछताछ के लिए हिरासत में लिया गया है. लेकिन पुलिस सत्ताधारी लोगों पर हाथ डालने को तैयार नहीं है.

वीडियो में हकीकत ज़ाहिर होने के बाद भी पुलिस एफआईआर में विधायक कंवरलाल मीणा का नाम नहीं है.

अंग्रेज़ी अख़बार 'इंडियन एक्सप्रेस' की पड़ताल के मुताबिक प्राथमिकी में एक 'एमएलए' का चार बार ज़िक्र है लेकिन नाम कहीं नहीं. ऐसा तब है जब शंकर सिंह की शिकायत में दो बार मीणा का नाम लिया गया है.

पीड़ित कार्यकर्ताओं का आरोप है कि पुलिस शिकायत के साथ छेड़छाड़ कर रही है. उनकी मानें तो शिकायत के दस्तावेज़ में जहां भी 'एमएलए' दर्ज है, उसके पीछे जानबूझकर 'पूर्व' जोड़ा गया है. पुलिस अधिकारियों का कहना है कि वारदात में विधायक की संलिप्तता अभी 'जांच का विषय' है. इस बीच, ज़िला कलक्टर विष्णु चरण मलिक ने जल्द कार्रवाई का भरोसा दिलाया है. उन्होंने मामले की जांच के लिए दो सदस्यों की कमेटी का ऐलान किया है. मलिक ने एनजीओ कार्यकर्ताओं को आश्वासन दिया है कि घटना के वीडियो को जांच का हिस्सा बनाया जाएगा.

संतुष्ट नहीं समाजसेवी कार्यकर्ता

प्रशासन के लचर रवैये ने सामाजिक कार्यकर्ताओं के गुस्से की आग में घी का काम किया है. उनकी मांग है कि पुलिस एफआईआर में विधायक मीणा का भी नाम दर्ज हो.

सोमवार को इस मामले पर आयोजित प्रेस कांफ्रेंस के दौरान अरूणा रॉय के तेवर तल्ख़ नज़र आए.उनका कहना था, “ हम जवाबदेही कानून के लिए अभियान चला रहे हैं. लाठी के जोर पर यात्रा का विरोध कर इस कानून को बनने से कोई नहीं रोक सकता. जिन लोगों ने यात्रा पर हमला किया उनकी तुरंत गिरफ्तारी व सख्त कार्रवाई होनी चाहिए, फिर चाहे वह जनप्रतिनिधि ही क्यों न हों.

कार्रवाई में देरी राज्य सरकार की कमज़ोरी कहलाएगी.”उन्होंने राज्य प्रशासन को चेताया कि अगर वक्त रहते कार्रवाई नहीं हुई तो उनके पास राष्ट्रपति भवन और अदालत के विकल्प भी खुले हैं.

रविवार को अरूणा रॉय के सहयोगी निखिल डे और कविता श्रीवास्तव ने अपने समर्थकों के साथ झालावाड़ के कलक्टर और एसपी से मुलाकात की. डे के मुताबिक उन्होंने घटना का वीडियो प्रशासन के साथ साझा किया है. वे चाहते हैं कि विधायक के खिलाफ कड़ी कार्रवाई हो. उनका आरोप है कि मनोहर थाना की पुलिस राजनीतिक दबाव में काम कर रही है लिहाज़ा मामले को किसी दूसरे थाने की पुलिस के सुपुर्द किया जाए.

मसले पर सियासत

अभी तक मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे और दुष्यंत सिंह ने पूरे प्रकरण पर चुप्पी साध रखी है. सूत्रों की मानें तो मुख्यमंत्री ने आला अफसरों ने इस पूरे विवाद पर फीडबैक लिया है. रविवार को इसी मसले पर मुख्यमंत्री आवास में हाई-प्रोफाइल बैठक भी बुलाई गई. अपनी साख को लेकर मुख्यमंत्री की चिंता इसी बात से झलकती है कि मीणा को पार्टी ने सफाई पेश करने के लिए कहा है.

पार्टी के प्रदेशाध्यक्ष अशोक परनामी ने उन्हें नोटिस भेजकर जवाब मांगा है. मीणा को सात दिनों के भीतर नोटिस का जवाब देना होगा. पूरे विवाद में सियासी मौका तलाश रही कांग्रेस महज़ इस जवाबतलबी ने संतुष्ट नहीं है.

पार्टी के प्रदेशाध्यक्ष सचिन पायलट ने मीणा के खिलाफ केस दर्ज करने के अलावा उनके इस्तीफ़े की भी मांग की है. समाचार एजेंसी एएनआई को दिए बयान में पायलट का कहना था, “ ये घटना मुख्यमंत्री के गृह ज़िले में हुई है. ज़ाहिर है ये उनकी रज़ामंदी के बग़ैर मुमकिन नहीं था. एक चुने हुए प्रतिनिधि की कारगुज़ारी ने इस सरकार की पोल खोल दी है. सरकार को जवाबदेही कानून को लेकर कार्यकर्ताओं की मांग सुननी चाहिए थी. दुर्भाग्य से राज्य में इससे उलट हो रहा है.”

क्या है जवाबदेही यात्रा?

जवाबदेही यात्रा दरअसल देश के कुछ जाने-माने आरटीआई कार्यकर्ताओं की पहल है. इसके लिए मज़दूर किसान शक्ति संगठन (एमकेएसएस) नाम के एनजीओ कार्यकर्ताओं को मिलाकर सूचना एवं रोज़गार मंच बनाया गया है. अरूणा रॉय और निखिल डे एमकेएसएस के संस्थापक हैं.

यात्रा का आगाज़ एक दिसंबर को हुआ था. ये नौ मार्च तक राजस्थान के 14 ज़िलों में लोगों के बीच जवाबदेही के हक का संदेश पहुंचाएगी. यात्रा के तहत कठपुतली शो, नुक्कड़ नाटक और गीतों के ज़रिए लोगों को जागरूक बनाने की कोशिश की जा रही है.

यात्रा से जुड़े कार्यकर्ताओं का दावा है कि उनके पास अब तक लोगों ने करीब छह हज़ार शिकायतें दर्ज करवाई हैं. इनमें से ज्यादातर राशन कार्ड, खाद्य सुरक्षा, पेंशन जैसी सुविधाओं से जुड़ी हैं.वैसे राजस्थान अरूणा रॉय के लिए कोई नई कर्मभूमि नहीं है. उन्होंने पिछले साल डांगावास में दलित हत्या में इंसाफ को लेकर जन-आंदोलन छेड़ा था.

रॉय स्थानीय चुनावों में उम्मीदवारों के लिए न्यूनतम शैक्षणिक योग्यता तय करने के राज्य सरकार के फैसले को भी अदालत में चुनौती दे चुकी हैं. हालांकि अदालत में उनकी याचिका खारिज हो गई थी.

First published: 19 January 2016, 23:39 IST
 
दीपक शर्मा @catch_deepak

Is a Delhi-based journalist whose heart still resides in his native mountains of Himachal. After almost a decade-long career in television news, he's made the switch to digital. When not working, he likes to venture into the world of theatre, music and literature. Obscure places are where he meets his element.

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