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दिल्ली से पंजाब में परचम लहराने की कोशिश में केजरीवाल

कैच ब्यूरो | Updated on: 10 February 2017, 1:49 IST
(कैच हिंदी)

अगले साल पंजाब में होने वाले विधानसभा चुनाव में आम आदमी पार्टी की ओर से अकाली दल, बीजेपी और कांग्रेस को कड़ी चुनौती देने की संभावना जताई जा रही है. आप की दावेदारी से पंजाब का राजनीतिक मुकाबला त्रिकोणीय हो गया है.

दिल्ली के मुख्यमंत्री और आप के संयोजक अरविंद केजरीवाल लगातार पंजाब के सियासी समीकरणों को ध्यान में रखते हुए अपनी योजनाएं बना रहे हैं. इसी कड़ी में शुक्रवार को दिल्ली के प्रमुख समाचार पत्रों में दिल्ली सरकार की ओर भर पेज का एक विज्ञापन जारी किया है.

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विज्ञापन में कहा गया है कि पंजाबी भाषा को बढ़ावा देने के लिए दिल्ली सरकार ने अहम फैसले लिए हैं. दिल्ली सरकार का दावा है कि अब हर सरकारी स्कूल में कम से कम एक पंजाबी शिक्षक जरूर होगा. इसके अलावा पंजाबी शिक्षकों का वेतन बढ़ाया गया है.

यह विज्ञापन दिल्ली सरकार के आर्ट, कल्चर और लैंग्वेजेज विभाग की ओर से जारी किया गया है. इस विभाग के मंत्री कपिल मिश्रा हैं. आपको बता दें कि दिल्ली में सिखों एक बड़ी आबादी रहती है.

गौरतलब है कि आम चुनाव 2014 में लोकसभा की चार सीटें जीतकर आप ने अन्य दलों की राह मुश्किल कर दी है. विधानसभा चुनाव के मद्देनजर आप मजबूत और गंभीर दावेदार बनकर उभरी है.

क्या आम आदमी पार्टी पंजाब में अतिआत्मविश्वास का शिकार हो रही है?

पंजाब के संगरुर से भगवंत सिंह मान, फतेहगढ़ साहिब से हरिंदर सिंह खालसा, फरीदकोट से साधु सिंह तो पटियाला से डॉ. धर्मवीर गांधी को जीत मिली. पटियाला लोकसभा क्षेत्र कांग्रेस का गढ़ रहा है.

मुख्यमंत्री केजरीवाल जनवरी माह में हुए मुक्तसर रैली में जबर्दस्त भीड़ जुटाकर सत्तारूढ़ शिरोमणि अकाली दल और विपक्षी पार्टी कांग्रेस के माथे पर चिंता की लकीरें खींच चुके हैं.

पिछले महीने चंडीगढ़ के दौरे पर केजरीवाल ने दावा किया था कि उनकी पार्टी इन चुनावों में 107 सीट जीतेगी. आप राज्य की सभी 117 सीटों पर लड़ सकती है. हालांकि पार्टी अभी तक मुख्यमंत्री के नाम पर फैसला नहीं कर पाई है.

First published: 10 June 2016, 2:16 IST
 
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