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अब जन लोकपाल पर केजरीवाल ने लिया यू-टर्न!

कैच ब्यूरो | Updated on: 1 December 2015, 12:18 IST
QUICK PILL
  • अपने वादे से पलटते हुए केजरीवाल ने जनता के राय के बिना ही नया लोकपाल बिल पेश करने की तैयारी कर ली है. 
  • नए बिल में जानबूझकर दिल्ली सरकार ने वैसे प्रावधान रखे हैं जिससे यह बिल कानूनी अड़चनों की भेंट चढ़ सकता है. 

दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने फरवरी 2014 में जनलोकपाल के मुद्दे पर सबको चौंकाते हुए अपने पद से इस्तीफा दे दिया था. दिसंबर 2013 में पहली बार सीएम बने केजरीवाल ने मात्र 49 दिनों तक सरकार चलाने के बाद सरकार से इस्तीफा दे दिया.

दिल्ली विधानसभा में जनलोकपाल विधेयक के खिलाफ भाजपा और कांग्रेस की गुटबंदी को कारण बताते हुए उन्होंने इस्तीफा दिया था. भाजपा और कांग्रेस के एकजुट हो जाने की वजह से विधेयक पेश नहीं हो पाया.

केजरीवाल ने वादा किया था अगर वह दोबारा सत्ता में आए तो जनता की राय से मजबूत भ्रष्टाचार विरोधी लोकपाल बनाएंंगे

एक साल बाद ही वह दोबारा सत्ता में आ गए. हालांकि सरकार में आने के बाद आठ महीनों तक लोकपाल बिल के वादे पर दिल्ली सरकार चुप रही

मीडिया में आ रही खबरों से अब लोगों को पता चला है कि आम आदमी पार्टी नया जनलोकपाल बिल लाने जा रही है. सरकार ने बिल पर लोगो की राय नहीं ली है, लेकिन ड्रॉफ्ट के कुछ अंश  जरूर सामने आए हैं.

ड्रॉफ्ट के लीक हुए अंश को पढ़ने के बाद जनलोकपाल बिल के लिए आंदोलन करने वाले लोग खासे नाराज हैं.

जिन बिंदुओ पर बिल की आलोचना हो रही है उसकी कॉपी कैच के पास है.

ड्रॉफ्ट के लीक हुए अंश के मुताबिक चार लोग मिलकर लोकपाल का चयन करेंगे जिनमें दिल्ली में मुख्यमंत्री, विधानसभा स्पीकर, विपक्ष के नेता और दिल्ली हाईकोर्ट के जज शामिल हैं.

मसैादे के मुताबिक लोकपाल का कार्यकाल पांच सालों के लिए होगा.

लोकपाल को लेफ्टिनेंट गवर्नर द्वारा कुल सदस्यों के बहुमत और विधानसभा में उपस्थित सदस्यों की 2/3 के बहुमत के पारित प्रस्ताव के बाद हटाया जा सकता है.

लोकपाल को झूठी शिकायत के मामले में एक साल की सजा या 1 लाख रुपए तक का जुर्माना लगाया जाएगा

लोकपाल के दोषी करार दिए जाने पर सरकारी कर्मचारियों को छह महीने से लेकर दस साल तक सश्रम कारावास की सजा हो सकती है. दुर्लभतम मामलों में यह आजीवन कारावास भी हो सकता है.

लोकपाल की जांच कर रहे मुकदमों की सुनवाई स्पेशल कोर्ट में होगी. ट्रायल को छह महीने के अंदर पूरा किया जाएगा.

दिल्ली का हर सरकारी कर्मचारी लोकपाल के अधिकार क्षेत्र में होगा. दिल्ली विकास प्राधिकरण और दिल्ली पुलिस में काम करने वाले अफसर जो केंद्र की ओर से राज्य के लिए काम करते हैं, उनके मामलों की जांच का अधिकार भी लोकपाल के पास होगा.

बिल के अनुसार सरकारी कर्मचारियों को हर साल 31 जनवरी से पहले अपने आैर परिवार की संपत्ति और देनदारियों की जानकारी देना अनिवार्य होगा.

लोकपाल बिल में भ्रष्टाचार उजागर करने वालों को सुरक्षा देने की बात है. बिल में उनकी पहचान गुप्त रखे जाने प्रावधान भी है

ड्रॉफ्ट के लीक होने के बाद केजरीवाल के पुराने सहयोगी प्रशांत भूषण, योगेंद्र यादव और शांति भूषण ने केजरीवाल सरकार के खिलाफ मोर्चा खोल दिया हैसुप्रीम कोर्ट के वकील और आम आदमी पार्टी के पूर्व सदस्य प्रशांत भूषण ने कहा, ' आपने स्वराज की बात कही थी और जनता से राय लेने वाले थे. इन वादों का क्या हुआ.'

उन्होंने कहा, भारतीय इतिहास में किसी भी आंदोलनकारी ने लोगों के साथ इतना बडा़ धोखा नहीं किया है. भूषण ने दावा किया, ' लोकपाल बिल में ऐसे प्रावधान जानबूझकर डाले गए, जिससे केंद्र सरकार कभी इसको पास न करे. केजरीवाल कभी मजबूत लोकपाल संस्था बनाने के पक्ष नहीं रहे.'

यहां वो मुद्दे हैं जिसको लेकर लोकपाल बिल की आलोचना हो रही है.

लोकपाल के चार सदस्यीय चयन समिति में तीन सदस्य राजनीतिक वर्ग से हैं. लोकपाल में राजनीतिक लोगों का विरोध जन लोकपाल आंदोलन हमेशा से करता आया है और उनकी जगह सिविल सोसाइटी के प्रतिनिधियों को रखने की मांग करता रहा है.

नए बिल में लोकपाल को हटाने का अधिकार विधानसभा को दिया गया है, जबकि मूल जनलोकपाल बिल में लोकपाल को हटाने का अधिकार सिर्फ सुप्रीम कोर्ट के पास है.

मूल जनलोकपाल बिल में लोकपाल को सीबीआई जैसी स्वतंत्र जांच एजेंसी बनाने की परिकल्पना की गई थी. नए विधेयक के मसौदे में ऐसा कोई प्रावधान नहीं है

नए विधेयक में लोकपाल के पास झूठी शिकायत करने पर एक साल की सजा का प्रावधान है. कई लोग इसकी आलोचना कर रहे हैं. उनका मानना है कि भ्रष्टाचार उजागर करने वाले लोग लोकपाल के पास शिकायत करने से डरेंगे.

दिल्ली में काम कर रहे केंद्र सरकार के अधिकारियों को भी लोकपाल के दायरे में लाकर आम आदमी पार्टी ने फिर से दिल्ली के गर्वनर और नरेंद्र मोदी सरकार से मुठभेड़ की कोशिश की है. इस वजह से लोकपाल बिल कानूनी विवादों में फंस सकता है.

लोकपाल बिल को पेश करने के लिए केजरीवाल शीतकालीन सत्र बढ़ाने की कोशिश में है. आखिर क्यों केजरीवाल ने बिल को जनता के सामने नहीं रखा? उनके उस वादे का क्या हुआ जिसमें कहा गया था बिल को पेश करने से पहले लोगों की राय ली जाएगी.

जब तक केजरीवाल विधानसभा में बिल पेश नहीं कर देते इन बातों को समझने के लिए इंतजार करना होगा.
First published: 1 December 2015, 12:18 IST
 
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