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दिल्ली के बाद बिहार में चुनावी रथ दौड़ाना चाहते हैं केजरीवाल ! प्रशांत किशोर का लेंगे सहारा

कैच ब्यूरो | Updated on: 17 February 2020, 16:29 IST

दिल्ली विधानसभा चुनाव में बंपर जीत हासिल करने के बाद अरविंद केजरीवाल बिहार विधानसभा चुनाव में अपनी किस्मत आजमा सकते हैं. दिल्ली चुनाव में जीत के बाद केजरीवाल का उत्साह चरम पर है. दिल्ली के रामलीला मैदान पर शपथ लेने के बाद अपने संबोधन में वह दिल्ली के साथ देश की भी चिंता करते दिखाई दिए.

प्रचंड जीत के बाद जाहिर है वह आम आदमी पार्टी को दूसरे राज्यों में फैलाने की कोशिश करना चाहते हैं. इसके लिए उनके पास सबसे पहला विकल्प बिहार है. बिहार में इस साल के अंत तक विधानसभा चुनाव होने हैं. बिहार हिंदी भाषी प्रदेश है, सबसे खास बात है कि बिहार की बड़ी आबादी दिल्ली में रहती है. 

इसी आबादी को ध्यान में रखते हुए उन्होंने रामलीला मैदान से बिहार में अपना संदेश फैलाने की कोशिश की. केजरीवाल बिजली, पानी, शिक्षा, स्वास्थ्य जैसी अपनी कल्याणकारी योजनाओं की बात बार-बार कर रहे हैं. बार-बार केजरीवाल लोगों से कह रहे हैं कि दिल्ली ने उनके काम एवं विकास की राजनीति को वोट दिया है.

 

जाहिर है उनसे यह सब कहने और बताने के पीछे की मंशा दूसरे राज्यों के लोगों को यह समझाना है कि यदि आम आदमी पार्टी उनके यहां चुनाव लड़ती है तो वो लोग उसे वोट करें. इससे सत्ता में आने पर आम आदमी पार्टी दिल्ली की ही तरह सुविधाएं उन राज्य के लोगों को भी मुहैया करा सकती है. 

अब चूंकि बिहार में सबसे पहले विधानसभा चुनाव है और प्रशांत किशोर को जदयू से निकाला जा चुका है तो इस काम में पीके उनकी मदद कर सकते हैं. हो सकता है कि पीके आने वाले दिनों में केजरीवाल को बिहार लेकर जाएं. यह भी हो सकता है कि पीके और केजरीवाल मिलकर बिहार में एक नया राजनीतिक समीकरण खड़ा करें.

पीके बिहार की राजनीति से साल 2015 से जुड़े हैं. पांच सालों में उन्होंने राज्य की राजनीति को अच्छी तरह से जांचा और परखा है. उनकी पहल पर ही जदयू में बड़ी संख्या में दूसरी पार्टी के लोग शामिल हुए थे. यहां तक कि सत्ताधारी जदयू में उनकी हैसियत नंबर दो की थी. पीके अगर बिहार में आम आदमी पार्टी के लिए कोई मोर्चा खड़ा करने की कोशिश करते हैं तो उनके साथ जदयू के भी कई नेता जुड़ सकते हैं.

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First published: 17 February 2020, 16:10 IST
 
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