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असदुद्दीन ओवैसी: 'तीन तलाक़ का मुद्दा मोदी मुस्लिम औरतों के लिए नहीं यूपी चुनावों के लिए उछाल रहे हैं'

अतुल चौरसिया | Updated on: 11 February 2017, 5:46 IST
QUICK PILL
  • पिछले साल बिहार विधानसभा चुनाव में करारी शिक़स्त के बाद मजलिस के सदर असदुद्दीन ओवैसी अब उत्तर प्रदेश में ज़ोर-आज़माइश की तैयारी कर रहे हैं. 
  • वह पश्चिमी यूपी से पूर्वांचल तक उन इलाक़ों में अपनी रैलियां कर रहे हैं जहां मुसलमानों की अच्छी-ख़ासी भीड़ जुटाई जा सके. 
  • कैच हिंदी  ने उनसे आगामी चुनाव, मौजूदा भारतीय राजनीति और मुसलमानों के अहम मुद्दों पर उनकी राय जानने की कोशिश की है. 

मजलिस के मुखिया असदुद्दीन ओवैसी भारतीय राजनीति में अपने तार्किक लहज़े और हाज़िर जवाबी के लिए ख़ासे लोकप्रिय हैं. अगर उग्र और भड़काऊ छवि के नाते देश में एक बड़ी आबादी उनसे नफ़रत करती है तो दूसरी तरफ़ उनसे बेइंतेहा प्यार करने वालों का भी हुजूम दिखता है. कोई उन्हें एक शहर का नेता बताकर खारिज कर देता है तो कई मानते हैं कि संसद के मौजूदा सदस्यों में वह खूब पढ़े लिखे और क़ाबिल नेता हैं और जिन्हें संसदीय परंपराओं का बेहतर ज्ञान है.

ओवैसी के हाथ में आज एक ऐसी पार्टी की कमान है जिसका दायरा फिलहाल सीमित है, अतीत बहुत नकारात्मक है. उनकी पार्टी ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुसलमीन देश की आजादी से पहले पाकिस्तान में विलय की समर्थक रही है, इसने तत्कालीन नेहरू सरकार के खिलाफ सशस्त्र विद्रोह भी किया था.

पार्टी का यह अतीत भी औवेसी की पोलराइजिंग (विभाजनकारी) छवि निर्मित करता है. बिहार के चुनावी नतीजों से निराश होने के बावजूद वे उत्तर प्रदेश के चुनावों से बड़ी उम्मीदें लगाकर बैठे हैं, नोटबंदी के मु्दे पर वे सरकार को घेर रहे हैं, साथ ही तीन तलाक़, मुसलिम पर्सनल लॉ बोर्ड और यूनीफॉर्म सिविल कोड जैसे मुद्दे भी फिज़ाओं में तैर रहे हैं. इन्हीं मुद्दों पर उनकी राजनीति की कसौटी तय होनी है. कैच हिंदी ने उनसे इन मुद्दों पर विस्तार से बातचीत की. यहां पेश हैं उसके महत्वपूर्ण अंश:

सवाल-जवाब

First published: 25 November 2016, 8:36 IST
 
अतुल चौरसिया @beechbazar

एडिटर, कैच हिंदी, इससे पूर्व प्रतिष्ठित पत्रिका तहलका हिंदी के संपादक के तौर पर काम किया

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