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आदर्श सोसाइटी घोटालाः पहले अशोक चव्हाण की कुर्सी गई, अब...

अश्विन अघोर | Updated on: 5 February 2016, 22:16 IST
QUICK PILL
  • मुंबई के आदर्श सोसाइटी घोटाले में पूर्व मुख्यमंत्री अशोक चव्हाण के खिलाफ सीबीआई जांच को राज्यपाल ने दी हरी झंडी. कांग्रेस ने बीजेपी पर लगाया राजनीतिक साजिश का आरोप.
  • आदर्श सोसाइटी घोटाल में गठित पाटिल कमीशन ने चव्हाण के रिश्तेदारों को चार फ्लैट मिलने की बात अपनी रिपोर्ट में कही थी. कमीशन की रिपोर्ट में तीन अन्य पूर्व मुख्यमंत्रियों समेत कई दूसरे बड़े नाम शामिल हैं.

कांग्रेस सासंद और महाराष्ट्र के पूर्व मुख्यमंत्री अशोक चव्हाण मुसीबत में घिर गए हैं. क्योंकि महाराष्ट्र के राज्यपाल सी विद्यासागर राव ने आदर्श सोसाइटी घोटाले में सीबीआई को उनके खिलाफ जांच की अनुमति दे दी है.

अगर चव्हाण को सजा हो जाती है तो उनकी संसद सदस्यता छिन जाएगी. उम्मीद के अनुरूप ही कांग्रेस ने इसे 'विपक्ष को खत्म' करने की राजनीतिक साजिश बताया है.

चव्हाण से कुछ दिन पहले ही एनसीपी नेता और महाराष्ट्र के पूर्व उप मुख्यमंत्री पर भी वित्तीय हेराफेरा के मामले में कार्रवाई हुई थी.

कांग्रेस चव्हाण के साथ पूरी मजबूती से खड़ी है. लेकिन बीजेपी का कहना है कि सीबीआई कानून प्रक्रिया के तहत काम कर रही है.

सीबीआई ने महाराष्ट्र के इससे पहले के राज्यपाल के शंकरनारायणन से भी चव्हाण के खिलाफ मामला दर्ज करने की इजाजत मांगी थी. तब ये अर्जी ठुकरा दी गई थी. जब सीबीआई ने दोबारा राव से अपील की तो उनकी मांग मान ली गई.

आदर्श घोटाले की जांच के लिए बने पाटिल कमीशन ने अपनी रिपोर्ट में राज्य के चार पूर्व मुख्यमंत्रियों का जिक्र किया था

सीबीआई के कदम का बचाव करते हुए महाराष्ट्र के राजस्व मंत्री एकनाथ खड़से ने कहा, "ये घोटाला कांग्रेस-एनसीपी शासन के दौरान हुआ था. सीबीआई को इस मामले में पुख्ता सबूत मिले हैं. तब वो राज्यपाल के पास गई. जांच के दौरान पाए गए तथ्यों के आधार पर कानूनी कार्रवाई की जा रही है."

कांग्रेसी नेता भाई जगताप कहते हैं कि उनके नेता ने कुछ गलत नहीं किया है. ये सब राजनीतिक बदले की साजिश के तहत किया जा रहा है.

जगताप कहते हैं, "मुझे समझ नहीं आता कि जिस अर्जी को पुराने राज्यपाल खारिज कर चुके हैं उसे केंद्र और राज्य में सरकार बदलने के बाद नए राज्यपाल स्वीकार कैसे कर सकते हैं."

बीजेपी सांसद किरीट सोमैया ने राज्यपाल के फैसले का स्वागत किया है. सोमैया ने ही सीबीआई की याचिका निरस्त होने के बाद राज्यपाल के समक्ष पुनर्विचार याचिका दायर की थी.

सोमैया कहते हैं, "सेवानिवृत्त न्यायाधीश जेए पाटिल कमीशन की जांच में अशोक चव्हाण के खिलाफ ठोस सबूत मिले हैं. चव्हाण ने 'एक हाथ लो एक हाथ दो' के तहत दूसरों को लाभ पहुंचाया."

पाटिल कमीशन के अनुसार चव्हाण के करीबी रिश्तेदारों को आदर्श सोसाइटी को संस्तुति देने के बदले में चार फ्लैट मिले

सोमैया कहते हैं कि पिछले राज्यपाल का फैसला न तो हाई कोर्ट में टिक सका न ही सुप्रीम कोर्ट में.

पाटिल कमीशन के अनुसार चव्हाण के करीबी रिश्तेदारों को आदर्श सोसाइटी को संस्तुति देने के बदले में चार फ्लैट मिले हैं.

चव्हाण ने राज्यपाल के निर्णय पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा, "मेरे खिलाफ कोई सबूत नहीं है. ये बीजेपी की विपक्ष के नेताओं को रास्ते से हटाने की चाल है. बीजेपी कुपोषण, सूखा और महंगाई से लोगों का ध्यान बंटाना चाहती है. मैं इस फैसले को अदालत में चुनौती दूंगा."

क्या है घोटाला?

आदर्श सोसाइटी दक्षिण मुंबई के कोलाबा में स्थित 31 मंजिला इमारत है. ये सोसाइटी कारगिल और दूसरे युद्धों में शहीद हुए सैनिकों की पत्नियों के लिए बनायी गई थी. बाद में कई राजनेताओं, नौकरशाहों और सैन्य अधिकारियों को इसका सदस्य बनाया गया और उन्हें फ्लैट दिए गए.

साल 2010 में जब ये घोटाला सामने आया तो तत्कालीन मुख्यमंत्री अशोक चव्हाण को पद से इस्तीफा देना पड़ा.

भारत के कंट्रोलर एंड ऑडिटर जनरल (कैग) की 2011 की रिपोर्ट में इस घोटाले के भ्रष्टाचार का सबसे अच्छा नमूना कहा गया था जिसमें ऊंचे पदों पर बैठे लोग कीमती सार्वजनिक जमीनों को निजी फायदे के लिए इस्तेमाल करने के लिए नियमों को तोड़-मरोड़ देते हैं.

साल 2011 में मामले की जांच के लिए पूर्व न्यायाधीश जेए पाटिल और एनएन कम्भर का दो सदस्यीय जांच कमीशन बनाया गया. कमीशन ने दो साल तक जांच करके, 182 चश्मदीदों के गवाहों से पूछताछ करने के बाद अप्रैल, 2013 में अपनी अंतिम रिपोर्ट सौंपी.

पाटिल कमीशन के अनुसार आदर्श सोसाइटी में 22 फ्लैट गैर-कानूनी तौर पर दिए गए. वहीं 22 फ्लैट जाली नामों से खरीदे गए

रिपोर्ट के अनुसार सोसाइटी में 22 फ्लैट गैर-कानूनी तौर पर दिए गए थे. वहीं 22 फ्लैट जाली नामों से खरीदे गए थे. रिपोर्ट में महाराष्ट्र के चार पूर्व मुख्यमंत्रियों अशोक चव्हाण, विलासराव देशमुख, सुशीलकुमार शिंदे और शिवराज पाटिल निलंगेकर, दो पूर्व शहरी मंत्रियों राजेश टोपे और सुनील टटकरे और एमसीजीएम के पूर्व प्रमुख जयराज पाठक समेत 12 नौकरशाहों का जिक्र किया गया था.

सीबीआई, आयकर विभाग और प्रवर्तन निदेशालय मामले की अभी जांच कर रहे हैं.

आदर्श सोसाइटी निर्माण में पर्यावरण सुरक्षा से जुड़े नियमों की अनदेखी समेत कई अन्य केंद्रीय और राज्य कानूनों का खुला उल्लंघन किया गया था.

कई संवेदनशील रक्षा संस्थानों के करीब स्थित होने के बावजूद इमारत के निर्माण के लिए रक्षा मंत्रालय ने अनापत्ति प्रमाणपत्र (एनओसी) नहीं लिया गया था. 

इमारत बनाने के लिए मुंबई मेट्रोपोलिटन रीजन टेवलपमेंट अथॉरिटी के नियम में बदलाव किए गए. कोस्ट रेगुलटरी ज़ोन (सीआरज़ेड) में होने के बावजूद एनओसी नहीं लिया गया.

First published: 5 February 2016, 22:16 IST
 
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