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असमः बीजेपी को सत्ता तो मिल गई लेकिन संतुलन आसान नहीं होगा

सादिक़ नक़वी | Updated on: 25 May 2016, 23:08 IST
(कैच)

मंगलवार को 24 मई को सरबानंद सोनोवाल ने असम के मुख्यमंत्री पद की शपथ ली. 53 वर्षीय सोनोवाल राज्य के 14वें सीएम बने हैं. बीजेपी ने पहली बार पूर्वोत्तर के किसी प्रदेश में सरकार बनाई है.

सोनोवाल के संग हेमंत बिस्व सर्मा ने भी कैबिनेट मंत्री के रूप में शपथ ली. सर्मा पहले कांग्रेस में तरुण गोगोई के बाद नंबर दो के नेता माने जाते थे. विधान सभा चुनाव से पहले वो कांग्रेस छोड़कर बीजेपी में आए थे. आशंका जताई जा रही है कि राज्य में सर्मा का व्यक्तित्व और लोकप्रियता सोनोवाल के लिए भविष्य में भारी पड़ सकता है.

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खबरों के अनुसार सर्मा चुनाव जिताने में अपनी भूमिका के मद्देनजर सत्ता में बड़ी भागीदारी चाहते हैं. कुछ सूत्रों के अनुसार सर्मा राज्य के उप-मुख्यमंत्री पद की लालसा रखते हैं. राज्य में बीजेपी के नेता भी मानते हैं कि पार्टी को चुनाव जिताने में सोनोवाल की साफ छवि से ज्यादा योगदान सर्मा की लोकप्रियता और चुनावी रणनीति का रहा है.

कुछ स्थानीय नेता कहते हैं, चुनाव प्रचार के दौरान केवल सर्मा के पास हरदम हेलीकॉप्टर मौजूद रहता था. सोनोवाल को भी जरूरत पड़ने पर ही हेलीकॉप्टर मिलता था. राज्य के कई स्वतंत्र उम्मीदवार भी सर्मा के प्रति वफादार हैं.

सही वक्त का इंतजार

सूत्रों के अनुसार बीजेपी को चुनाव जितवाने में अहम रहे हेमंत बिस्व सर्मा उप-मुख्यमंत्री का पद चाहते थे

बीजेपी के एक सूत्र कहते हैं कि ऐसी कोई परंपरा नहीं रही है इसलिए सर्मा को उप-मुख्यमंत्री बनाया जाना जरूरी नहीं है. वहीं आरएसएस के एक स्थानीय कार्यकर्ता के अनुसार उप-मुख्यमंत्री का पद केवल गठबंधन दलों के लिए तैयार किया जाता है. असम में बीजेपी बीपीएफ और एजीपी के साथ मिलकर चुनाव लड़ा था.

सर्मा को उप-मुख्यमंत्री बनाए जाने से राज्य में सत्ता के दो केंद्र बन जाने का भी खतरा है. बीजेपी इसे बचना चाहेगी.

कुछ लोग संभावना जता रहे हैं कि सर्मा को राज्य में अच्छा मंत्रालय देने के साथ ही उन्हें बीजेपी के पूर्वोत्तर इकाई का संयोजक बनाया जा सकता है.

आरएसएस कार्यकर्ता ने बताया, "सर्मा और राम माधव के बीच गोवाहाटी के एक आलीशान होटल में सोमवार देर रात तक चर्चा होती रही. उनके पास ज्यादा विकल्प नहीं थे."

आरएसएस कार्यकर्ता कहते हैं, "अगर बीजेपी को अकेले 65 सीटें मिली होतीं तो उनके पास लेनदेन का ज्यादा मौका होता." (बीजेपी की राज्य में 60 सीटें मिली हैं.)

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राज्य बीजेपी के एक अन्य नेता कहते हैं कि सर्मा को पता है कि कब कौन सा पत्ता चलना है. नेता कहते हैं, "सर्मा सही वक्त का इंतजार करेंगे."

सर्मा जब बीजेपी में शामिल हुए थे तो उनके सामने एक विकल्प केंद्र सरकार में शामिल होने का भी था. सर्मा के करीबी एक सूत्र ने कैच को बताया कि सर्मा ने अभी सभी विकल्प खुले रखे हैं.

सोनोवाल का सफर

सर्बानंद सोनोवाल को राज्य में सरकार चलाने का कोई अनुभव नहीं है. जबकि सर्मा गोगोई सरकार में अहम मंत्रालयों की जिम्मेदारी संभाल चुके हैं. राज्य में सर्मा को अब तक असम का सबसे सफल स्वास्थ्य और शिक्षा मंत्री माना जाता है.

सर्मा की मीडिया में भी काफी रुचि रहती है. वो राज्य के प्रमुख अखबारों और चैनलों में अच्छा दखल रहते हैं.

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सोनोवाल पिछले लोक सभा चुनाव में असम के प्रभारी थे. पार्टी को राज्य की 14 लोक सभा सीटों में से सात पर जीत मिली थी. वो खुद भी डिब्रुगढ़ से सांसद चुने गए थे. जिसके बाद वो मोदी मंत्रिमंडल में युवा एवं खेल मंत्री बनाए गए.

लोक सभा में मिली जीत ने बीजेपी के लिए राज्य में विधान सभा जीत की आधारशिला रखी थी. उन्होंने तीन बार मुख्यमंत्री रह चुके तरुण गोगोई के खिलाफ सत्ता विरोधी लहर का जमकर इस्तेमाल किया. 'अवैध प्रवासियों' के बरक्स असमिया अस्मिता के सवाल को भी वो लंबे समय से उठाते रहे हैं. सर्मा ने भी इन मुद्दों को अपने चुनाव प्रचार के केंद्र में रखा.

असंतुष्ट नेता

राज्य बीजेपी प्रमुख सिद्धार्थ भट्टाचार्य ने सर्मा को बीजेपी में लाने में अहम भूमिका निभायी थी लेकिन वो शपथ ग्रहण समारोह में नहीं आए. सूत्रों के अनुसार वो कैबिनेट में शामिल नहीं किए जाने को लेकर नाराज हैं.

भट्टाचार्य पूर्वी गोवाहाटी विधान सभा से चुनाव जीते हैं. वो राज्य में दूसरे सबसे बड़े अंतर से जीते हैं. उनके करीबी सूत्रों ने बताया कि वो जल्द ही दिल्ली जाकर पार्टी आलाकमान को अपनी शिकायत सामने रखेंगे.

सूत्र ने कैच को बताया, "भट्टाचार्य की जिस तरह अनदेखी की जा रही है उससे पता चलता है कि पीएम को सोनोवाल पर कितना भरोसा है. वहीं सोनोवाल भट्टाचार्य को खतरे की तरह देखते हैं."

शक्ति प्रदर्शन

सोनोवाल मंत्रिमंडल में गैर-बीजेपी पृष्ठभूमि के कई मंत्री, खुद सोनोवाल 2011 में एजीपी से बीजेपी में आए थे

बीजेपी ने पहली बार सरकार के गठन को शक्ति प्रदर्शन के मौके की तरह प्रयोग किया. शपथ ग्रहण समारोह में पीएम नरेंद्र मोदी, बीजेपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह समेत सभी एनडीए प्रशासित राज्यों के सीएम मौजूद थे.

असम को पूर्वोत्तर का द्वार कहा जाता है. इसलिए बीजेपी असम में अपनी जीत को पूर्वोत्तर के बाकी राज्यों में प्रवेश की शुरुआत की तरह देख रही है. परंपरागत रूप से पूर्वोत्तर भारत में कांग्रेस का दबदबा रहा है.

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सोनोवाल मंत्रिमंडल के मंत्रियों में ज्यादा संख्या उनकी है जो गैर-बीजेपी पृष्ठभूमि से पार्टी में आए हैं. खुद सोनोवाल असम गण परिषद से बीजेपी में आए हैं.

मंत्रिमंडल में शामिल चंद्र मोहन पाटोवारी पहले एजीपी में थे. वो 2014 में पार्टी में शामिल हुए. नाबा कुमार डोले 2015 में एजीपी छोड़कर बीजेपी में आए थे. पल्लब लोचन दास भी उन विधायकों में शामिल थे जो सर्मा के साथ कांग्रेस छोड़कर बीजेपी में आए थे.

First published: 25 May 2016, 23:08 IST
 
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