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असम: अवैध बांग्लादेशी घुसपैठ को तुरुप का इक्का बनाने में लगी भाजपा

सादिक़ नक़वी | Updated on: 12 March 2016, 21:15 IST
QUICK PILL
  • केंद्रीय मंत्री और असम में बीजेपी का प्रमुख चेहरा रहे सर्वानंद सोनवाल विधानसभा चुनाव से पहले अवैध घुसपैठ का मामला उठा रहे हैं. उन्होंने कहा कि बीजेपी और अमस गण परिषद का गठबंधन बांग्लादेशी  घुसपैठियों को मदद पहुंचाने वाले राजनीतिक ताकतों का मुकाबला करेगा. 
  • 2014 के लोकसभा चुनाव में बीजेपी असम के 14 लोकसभा सीटों में से 7 सीटों पर जीत दर्ज करने में सफल रही थी.

असम में 126 विधानसभा सीटों पर होने वाला चुनाव अगले महीने दो चरणों में पूरा होगा. 2014 के लोकसभा चुनाव में बीेजेपी असम के 14 लोकसभा सीटों में से 7 सीटों पर जीत दर्ज करने में सफल रही थी. 

पार्टी ने हाल ही में क्षेत्रीय दल असम गण परिषद के साथ गठबंधन बनाया है. पार्टी की कोशिश क्षेत्रीय दल के साथ गठबंधन कर अपनी स्थिति को और अधिक मजबूत करने की है. पार्टी गठंधन के तहत 126 सीटों में से 40 सीटें परिषद को देगी.

पार्टी अब चुनावी व्यावहारिकता पर उतर आई है हालांकि अभी तक वह विधानसभा चनुाव में दो तिहाई बहुमत का दावा करती आ रही थी.

केंद्रीय मंत्री और असम में बीजेपी का प्रमुख चेहरा रहे सर्वानंद सोनवाल विधानसभा चुनाव से पहले अवैध घुसपैठ का मामला उठा रहे हैं. हाल ही दिए गए एक इंटरव्यू में उन्होंने कहा था कि बीजेपी और अमस गण परिषद का गठबंधन बांग्लादेशी  घुसपैठियों को मदद पहुंचाने वाले राजनीतिक ताकतों का मुकाबला करेगा. 

सोनवाल ने कहा, 'हमारा लक्ष्य एआईयूडीएफ और कांग्रेस का गठबंधन है. यह दोनों दल खतरनाक ताकत के तौर पर उभरे हैं जो ब्रह्मपुर और बराक घाटी में लोगों की पहचान मिटाने पर तुले हुए हैं.' सोनवाल ने जो कुछ भी कहा कि वह मोदी और बीजेपी के अन्य नेताओं की तरह ही है.

इसी इंटरव्यू में सोनवाल ने कहा कि बीजेपी असमी समाज के हितों को सुरक्षित रखना चाहती है जिसमें मारवाड़ी, पंजाबी और नेपाली समेत अन्य समुदाय शामिल हैं. उन्होंने कहा कि किस तरह से बीजेपी ने स्वदेशी मुसलमानों के हितों की रक्षा की जब उन्हें बांग्लादेश से आने वाले मुस्लिमों की वजह से पहचान के संकट का सामना करना पड़ रहा था.

बीजेपी की रणनीति

बीजेपी के एक वरिष्ठ ने ता ने कहा, 'यह रणनीति सभी समूहों में भय की स्थिति पैदा करने की है ताकि वह बदरुद्दीन अजमल की तरफ से पेश किए जाने खतरे को समझ सके. माना जा रहा है कि अजमल आने वाले चुनाव में किंगमेकर हो सकते हैं.'

बीजेपी राज्य ईकाई के पूर्व प्रेसिडेंट सिद्धार्थ भट्टाचार्य हालांकि इस मामले को अलग तरीके से देखते हैं. उन्होंने कहा कि जब 1980 में बीजेपी ने असम में अपनी जड़ जमाने की कोशिश की तब उन्होंने हिंदी वक्ताओं के साथ शुरुआत की क्योंकि अधिकांश असमी वक्ता असमिया आंदोलन से जुड़े थे. उन्होंने कहा, 'अन्य समूहों ने राज्य में हमारे समर्थन को हथिया लिया.' 

भट्टाचार्य बताते हैं कि पार्टी अन्य स्थानीय समूह मसलन तिवा और रबाओंके बीच अपनी पैठ बनाने को लेकर बेहद गंभीर है. उन्होंने कहा, 'सच्चाई यह है कि पार्टी सोनोवाल को आगे बढ़ा रही है क्योंकि वह अल्पसंख्यक नस्लीय समूह से ताल्लुक रखते हैं.'

कांग्रेस ने हालांकि बीजेपी के दावे को खारिज कर दिया है. असम से कांग्रेस के युवा सांसद गौरव गगोई ने कैच से कहा, 'यहां तक की प्रधानमंत्री भी बहुलतावाद को लेकर बात करते हैं लेकिन उके काडर समाज को बांटने की कोशिश करते हैं.' उन्होंने कहा कि असम के लोगों को बीजेपी के बारे में पता है.

गगोई ने कहा,'हमने कभी भी स्थिति को हाथ से बाहर नहीं निकलने दिया लेकिन इस दिशा में कई बार कोशिश की गई. बहुलतावादी और बहुसांस्कृतिक समाज बीजेपी के विभाजनकारी राजनीति को खारिज कर दोगा.'

समूहोें में बंटे असम जैसे समाज में स्थानीय लोग और बाहरी समुदाय के बीच हमेशा तनाव की स्थिति बनी रहती है. ऐसे में गठबंधन के लिए मुश्किल की स्थिति ज्यादा है.

शुरुआती रिपोर्ट में कैच ने बताया था कि असम साहित्य सभा और बोडो समूह जैसे ऑल बोडो स्टूडेंट्स यूनियन जैसे स्थानीय समूह केंद्र सरकार की नीतियों से खुश नहीं हैं. एक बड़ा विवाद हिंदू प्रवासियों को भारत की नागरिकता देने का प्रस्ताव है. बीजेपी की सहयोगी पार्टी असम गण परिषद भी इस फैसले के खिलाफ है.

हालांकि भट्टाचार्य को ब्रह्मपुत्र घाटी में स्थानीय समूहों के प्रदर्शन में षडयंत्र नजर आता है. उन्होंने कहा, 'बराक घाटी में प्रदर्शन क्यों नहीं हुआ जबकि वहां बड़ी संख्या में हिंदू प्रवासी रहते हैं? जबकि ब्रह्मपुत्र घाटी की आबादी बहुत छोटी है.'

First published: 12 March 2016, 21:15 IST
 
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