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अमेरिका को शांति का पाठ पढ़ाएगी भारत की ये मुस्लिम लड़की

कैच ब्यूरो | Updated on: 9 June 2018, 13:40 IST

भारत में भले ही मुस्लिम महिलाएं शिक्षा के मामले में पिछड़ जाती हों, लेकिन जो उच्च शिक्षा हासिल करती हैं वो दुनिया में भारत का नाम रोशन करती हैं. ऐसा ही एक नाम इन दिनों सुर्खियों में है. वो है सलमा हुसैन. सलमा पूर्वोत्तर के राज्य असम के एक छोटे से पिछड़े गांव से आती हैं.

22 साल की सलमा हुसैन दुनिया भर की उन 8 महिलाओं में शामिल हैं जो अमेरिका की राजधानी वाशिंगटन डीसी में आयोजित होने वाले शांति निर्माण से जुड़े एक कार्यक्रम में भाग लेंगी. सलमा 5 से 18 अगस्त तक एंडी लीडरशिप इंस्टीट्यूट के प्रशिक्षण कार्यक्रम का हिस्सा होंगी. सलमा हुसैन असम के कामरूप जिले के सोनतली गांव की रहने वाली हैं.

सलमा को ये सफलता रातों रात नहीं मिली. आठ साल की उम्र में पिता को खोने के बाद सलमा की पूरी जिम्मेदारी उनकी मां के कंधों पर आ गई. सलमा की मां सोनतली के आंचलिक हायर सेकेंडरी स्कूल में कार्यरत हैं. उनका गांव सोनतली एक पिछड़ा गांव है जहां अक्सर ब्रह्मपुत्र नदी की वजह से तबाही जैसा मंजर पैदा हो जाता है.

सलमा ने कुछ महीने पहले एलएलबी के अंतिम सेमेस्टर के एग्जाम्स की तैयारी कर रही थी तभी उन्होंने यंग वूमेन पीस बिल्डर्स के लिए आवेदन किया था. ये प्रतियोगिता काफी कठिन थी. सलमा बताती हैं कि ये परीक्षा आईएएस की परीक्षा जैसी थी.

इसमें सामान्य से लेकर विवरणात्मक सवालों के जवाब देने थे तो साथ में यह भी बताना था कि क्यों उसे इसके लिए चुना जाना चाहिए. बता दें कि सलमा को कई पुरस्कार मिल चुके हैं. नेशनल फांउडेशन ऑफ इंडिया ने साल 2017-18 का युवा शांति पुरस्कार उसे नवाजा था.

बता दें कि ये संस्था सामाजिक कार्यकर्ता एंडी पैराहोविच के सम्मान में स्थापित की गई थी. ये संस्था उन महिलाओं को वित्तीय सहायता प्रदान करती है जो राजनीति, संचार और मानवतावादी क्षेत्र में काम करना चाहते हैं. पैराहोविच की 2007 में इराक में हत्या कर दी गई थी. वह वहां नेशनल डेमोक्रेटिक इंस्टीट्यूट के लिए काम करतीं थी, जो एक एनजीओ है और विकासशील देशों में लोकतांत्रिक संस्थानों की प्रभावशीलता में वृद्धि के लिए काम करता है.

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First published: 9 June 2018, 13:40 IST
 
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