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डसॉल्ट-रिलायन्स ज्वाइंट वेंचर से स्किल इंडिया अभियान को मिली तेजी

सुहास मुंशी | Updated on: 8 October 2016, 7:23 IST
(गेटी इमेजेज़)
QUICK PILL
  • रिलायन्स ग्रुप के चेयरमैन अनिल अम्बानी ने कहा है कि हम एविएशन क्षेत्र में डसॉल्ट एविएशन जैसे वर्ल्ड लीडर के साथ पार्टनर बनकर काफी रोमांचित हैं.
  • यह भारतीय एयरोस्पेस सेक्टर और रिलायन्स की सहायक कम्पनी रिलायन्स इन्फ्रॉस्टक्चर के लिए कायापलट करने वाला क्षण है.

फ्रांस की राफेल फाइटर जेट बनाने वाली कम्पनी डसॉल्ट एविएशन और रिलायन्स समूह ने एक एयरोस्पेस परियोजना पर समझौता किया है और वे इसमें निवेश करेंगे. इस व्यापार समझौते से जुड़े एक अधिकारी ने कैच को बताया कि इससे प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की पसंदीदा योजना 'स्किल इंडिया' को बढ़ावा मिलेगा. इन दोनों फर्मों ने एक ज्वाइंट वेंचर स्थापित करने की घोषणा की है.

राफेल डील करीब 59 हजार करोड़ रुपए की है. पिछले 20 सालों में लड़ाकू विमानों की खरीद का यह पहला सौदा तो है ही, साथ ही रक्षा सम्बंधी सबसे बड़ा विनिवेश भी है. फ्रांसिसी राफेल की निर्माता कम्पनी डसॉल्ट एविएशन कुल अनुबंध का आधा पैसा भारत में विनिवेश करने पर सहमत हो गई है. इसका सबसे बड़ा हिस्सा लगभग 20,000 करोड़ रुपए अनिल अम्बानी की कम्पनी रिलायन्स डिफेन्स में ऑफसेट्स के जरिए जाएगा.

ऑफसेट एग्रीमेन्ट मूलतः वह शर्त है जो प्रौद्योगिकी की विक्रेता कम्पनी (इस मामले में डसॉल्ट) को निश्चित प्रतिशत (इस मामले में 50 फीसदी) निवेश करनी होगी. (यानी कुल सौदे 59,000 करोड़ रुपए का आधा). और वह पक्षकार देश (भारत) के पास आ जाएगी. जहां तक प्रतिशत और मूल राशि का सवाल है तो भारत के इतिहास में इतना बड़ा ऑफसेट कॉन्ट्रैक्ट कभी नहीं हुआ है.

यह धन कहां खर्च किया जाएगा?

अभी तक रिलायन्स डिफेन्स और डसॉल्ट एविएशन के बीच हुए संयुक्त उपक्रम का ब्यौरा नहीं मिल सका है, विशेषकर भारत में कितना निवेश किया जाएगा. अभी इस पर काम चल रहा है. सौदे से जुड़े एक निकटस्थ सूत्र ने कैच को कुछ जानकारी दी है कि यह धन कहां और कैसे खर्च किया जाएगा.

एयरोस्पेस सबसे बड़ी परियोजना

समझौते से जुड़े एक सूत्र की मानें तो ढेर सारे प्रस्ताव आए हैं. अभी कुछ भी तय नहीं किया गया है लेकिन हम कुछ चीजें तय करने जा रहे हैं जो सामने आ जाएंगी. अभी जो डिटेल्स उपलब्ध हैं, वह केवल यही है कि संयुक्त उपक्रम की सबसे बड़ी परियोजनाओं में से एक एयरोस्पेस परियोजना है. इसके अलावा अन्य सभी डिटेल्स कड़े पहरे में रखी जा रहीं हैं. किसी को कुछ पता नहीं.

सौदे से जुडे आंतरिक सूत्रों का अनुमान है कि एयरोस्पेस सेक्टर में यह समझौता ग्लोबल राफेल जेट प्रोडक्शन की चैन को समर्थन देने का एक हिस्सा हो सकता है. हालांकि, अभी इसकी पुष्टि नहीं की जा सकी है. एक अन्य आकलन यह भी है कि संयुक्त उपक्रम नागपुर में अपनी प्रोडक्शन इकाई स्थापित करेगा और इसमें 300 से ज्यादा वेंडर्स शामिल होंगे जो इसके उपकरण और कल-पुर्जों की आपूर्ति करेंगे.

रिलायन्स सीधे नहीं लेगा धन

उद्योग से जुड़े एक आंतरिक सूत्र ने बताया कि रिलायन्स इस धन को सीधे नहीं लेगा. वेन्डर्स और डसॉल्ट धन हासिल करेंगे और रिलायन्स सिर्फ ऑर्डर को क्रियान्वित करने के लिए उत्तरदायी होगा. एक अधिकारी ने यह भी बताया कि उनके निवेश का हिस्सा प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के स्किल इंडिया अभियान में भी सीधे जाएगा.

23 सितम्बर को राफेल डील पर हस्ताक्षर हो गए हैं. दस्तखत हो जाने के बाद अनिल अम्बानी की अगुवाई वाला रिलायन्स ग्रुप एक 'महत्वपूर्ण खिलाड़ी' बन गया है. यह ग्रुप डसॉल्ट एविएशन के साथ 22,000 करोड़ रुपए के अनुबंध में शामिल हो गया है.

इस अधिकारी ने यह भी कहा कि ऑफसेट प्रोजेक्ट्स, जो अगले सात साल की अवधि के लिए होंगे, में टेक्नालॉजी शेयरिंग सेक्टर्स (इलैक्ट्रानिक्स और मेकेनिक्स समेत) भी शामिल हैं. रक्षा अनुसंधान और विकास संगठन (डीआरडीओ) के साथ बैठकर सभी मुद्दों पर रूपरेखा बनाई जा रही है.

इस संयुक्त उपक्रम पर टिप्पणी करते हुए रिलायन्स ग्रुप के चेयरमैन अनिल अम्बानी ने कहा है कि हम एविएशन क्षेत्र में डसॉल्ट एविएशन जैसे वर्ल्ड लीडर के साथ पार्टनर बनकर काफी रोमांचित हैं. यह भारतीय एयरोस्पेस सेक्टर और रिलायन्स की सहायक कम्पनी रिलायन्स इन्फ्रॉस्टक्चर के लिए कायापलट करने वाला क्षण है.

First published: 8 October 2016, 7:23 IST
 
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