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विधानसभा चुनाव 2018: क्या त्रिपुरा में BJP गिरा पाएगी लेफ्ट का किला? रुझानों में लेफ्ट आगे

आकांशा अवस्थी | Updated on: 3 March 2018, 8:44 IST

देश के पूर्वोत्तर राज्यों त्रिपुरा, नगालैंड और मेघालय में हुए विधानसभा चुनाव के मतों की गिनती शुरू हो चुकी हो चुकी है. बीजेपी में राजनीतिक माहौल गर्म नजर आ रहा है. जाहिर है की बीजेपी केरल में अपनी हार का बदला त्रिपुरा में जीत कर पूरा करना चाहती है. जिसके लिए बीजेपी के तमाम नेताओं ने अपनी पूरी ताक़त इस राज्य में लगा रखी है.

अगले साल देश में लोकसभा चुनाव होने हैं जिस कारण इन तीन पूर्वोत्तर राज्यों के चुनावी परिणाम काफी अहम है. इसका पूरे देश की राजनीति पर असर पड़ना है. ऐसे में त्रिपुरा पर ख़ास नजर है यहां पर पिछले 25 सालों से वाम दलों का शासन है. लेफ्ट की सरकार केरल के अलावा बस त्रिपुरा में है. अगर त्रिपुरा में वामपंथियों की हार होती है तो ये उनकी राजनीति के लिए बुरी खबर हो सकती है.

त्रिपुरा में कांटे की टक्कर के आसार हैं. त्रिपुरा में बीजेपी की सबसे बड़ी ताकत राज्य में आईपीएफ़टी से उनका चुनावी गठबंधन है. ये पार्टी त्रिपुरा के जनजातीय लोगों का प्रतिनिधित्व करती है. आईपीएफ़टी त्रिपुरा का बंटवारा कर जनजातीय लोगों के लिए अलग राज्य की मांग करती रही है. त्रिपुरा विधानसभा में 20 सीटें अनुसूचित जनजाति के लिए आरक्षित हैं.

उम्मीद की जा रही है कि बीजेपी और आईपीएफ़टी का गठबंधन इन 20 सीटों पर अच्छे नतीज़े दे सकता है. इन 20 सीटों में आईपीएफ़टी नौ सीटों पर और बीजेपी 11 सीटों चुनाव लड़ी है. ये माना जा रहा है कि अगर 20 सीटों में बीजेपी-आईपीएफ़टी गठबंधन 15-16 सीटें जीत ले और 10-12 सीटें दूसरे इलाकों से मिल जाएं तो त्रिपुरा का सियासी समीकरण बदल सकता है.

 

सत्ता विरोधी रुझान
लोग कह रहे हैं कि शहरी क्षेत्रों में तस्वीर अलग है, वहां सीपीएम के ख़िलाफ़ सत्ताविरोधी रुझान देखा जा रहा है क्योंकि विकास के एजेंडे पर सीपीएम कमज़ोर रही है. बुनियादी ढांचे के मामले में त्रिपुरा में काम हुआ है, लेकिन जॉब क्रिएट नहीं हो पाई, चेन्नई और बंबई के बाद त्रिपुरा आईटी गेटवे बन तो गया, लेकिन इसके बावजूद वहां आईटी इंडस्ट्री खड़ी नहीं हो पाई. ये वो मुद्दे हैं जो माणिक सरकार के ख़िलाफ़ सत्ता विरोधी रुझान को मजबूती देते हैं.

त्रिपुरा में कांटे की टक्कर की संभावना इसलिए भी है कि बीजेपी-आईपीएफ़टी गठबंधन ग्रामीण इलाकों की 20 सीटों में 15-16 सीटें और शहरी इलाकों की 15-20 सीटों में आधी भी जीत लेगी तो वाम मोर्चे के लिए बड़ी चुनौती खड़ी हो सकती है.

First published: 3 March 2018, 8:38 IST
 
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