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लोकसभा चुनावों के साथ हो सकते हैं इन तीन राज्यों के विधानसभा चुनाव

कैच ब्यूरो | Updated on: 21 January 2019, 9:10 IST

केंद्र की मोदी सरकार ने सामान्य वर्ग के युवाओं को सरकारी नौकरियों में दस फीसदी आरक्षण का रास्ता साफ कर दिया. अब एक फरवरी से केंद्र सरकार की नौकरियों में सामान्य वर्ग के गरीबों का इसका लाभ मिलना भी शुरु हो जाएगा. इसके बाद बीजेपी एक और बड़ा कदम उठाने जा रही है. जिसके मुताबिक इस साल होने वाले लोकसभा चुनावों के साथ तीन राज्यों में विधानसभा चुनाव भी हो सकते हैं.

बता दें कि हरियाणा, महाराष्ट्र और झारखंड में भी इसी साल विधानसभा चुनाव होने हैं. ऐसे में केंद्र की बीजेपी सरकार चाहती है कि लोकसभा चुनावों के साथ ही इन तीनो राज्यों के विधानसभा चुनाव भी संपन्न करा दिए जाएं. जिसका लाभ निश्चितरूप से बीजेपी को मिलेगा.बता दें कि इन तीनों राज्यों की विधानसभा का कार्यकाल अक्तूबर और नवंबर के बीच पूरा हो रहा है.

बीजेपी के सूत्रों के मुताबिक झारखंड में झामुमो, राजद, कांग्रेस और झाविपा वाले विपक्षी महागठबंधन की तस्वीर करीब-करीब साफ हो चुकी हैं. इसके चलते पार्टी नेतृत्व वहां समय से पहले विधानसभा भंग कराकर लोकसभा के साथ ही दोनों चुनाव कराना चाहता है. राज्य इकाई ने भी अंतिम फैसला केंद्रीय नेतृत्व पर छोड़ दिया है, जिसने दोनों चुनाव एक साथ कराने की तैयारी रखने के दिशा-निर्देश दिए गए हैं.

बता दें कि हरियाणा विधानसभा का कार्यकाल इसी साल अक्टूबर में खत्म हो रहा है. यहां बीजेपी की सरकार है और मुख्यमंत्री मनोहर लाल खट्टर हैं. हरियाणा में हाल के दिनों में विपक्षी दल कांग्रेस में जबरदस्त गुटबाजी चल रही है. तो वहीं इंडियन नेशनल लोकदल (इनेलो) भी दो फाड़ हो चुका है. जिसने सभी सियासी समीकरण बदल गए हैं.

इसी वजह से केंद्रीय नेतृत्व की निगाहें हरियाणा पर हैं कि अगर ऐसे में यहां विधानसभा चुनाव होते हैं तो बीजेपी को लाभ होगा. वहीं पार्टी सूत्रों का कहना है कि 31 जनवरी को जींद विधानसभा सीट पर उपचुनाव के नतीजे आते ही हरियाणा में दोनों चुनाव एक साथ कराने पर अंतिम फैसला किया जाएगा.

वहीं महाराष्ट्र में स्थिति थोड़ी अलग है. यहां एनडीए की घटक शिवसेना लगातार अलग चुनाव लड़ने की घोषणा कर रही है. केंद्रीय नेतृत्व यहां लोकसभा और विधानसभा चुनाव एक साथ कराना चाहता है, लेकिन मोदी सरकार में सूबे से आने वाले एक वरिष्ठ मंत्री और राज्य इकाई के कुछ अन्य नेता इससे सहमत नहीं हैं. क्योंकि लोकसभा चुनाव की अधिसूचना मार्च में जारी होगी. इसलिए पार्टी नेतृत्व अगले महीने इस मुद्दे पर फिर से विचार-विमर्श का दौर शुरू करेगा.

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First published: 21 January 2019, 9:10 IST
 
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