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भारी बस्ता ढोने वाले स्कूली छात्र सावधान! जानिए स्कूल बैग से जुड़ी जरूरी जानकारी

कैच ब्यूरो | Updated on: 6 September 2016, 13:55 IST
(पत्रिका)

किताबों के भारी बोझ वाला बस्ता स्कूली छात्रों के स्वास्थ्य पर खराब असर डालने के कारण हमेशा चर्चा का विषय बना रहा है. अब हाल ही में हुए एक सर्वेक्षण ने इस तथ्य को और पुख्ता कर दिया है.

एक सर्वे में ये बात सामने आई है कि भारी बस्ते ढोने वाले सात से 13 वर्ष की आयु वर्ग के 68 प्रतिशत स्कूली बच्चों को पीठ दर्द की शिकायत हो सकती है या उनका कूबड़ निकल सकता है.

कूबड़ निकलने का खतरा

एसोचैम की स्वास्थ्य देखभाल समिति के तहत कराए गए एक हालिया सर्वेक्षण में पाया गया कि भारत भर में 13 वर्ष की आयु तक के 68 प्रतिशत स्कूली छात्र पीठ में हल्के दर्द की समस्या से पीड़ित हो सकते हैं और यह हल्का दर्द बाद में गंभीर दर्द और कूबड़ में बदल सकता है.

सर्वेक्षण में पाया गया कि सात से 13 वर्ष की आयु वर्ग के 88 प्रतिशत छात्र अपनी पीठ पर अपने वजन के 45 प्रतिशत से अधिक भार ढोते हैं, जिनमें आर्ट किट, स्केट्स, ताइक्वांडो के उपकरण, तैराकी से संबंधित सामान, क्रिकेट की किट आदि शामिल हैं. जिससे उनकी रीढ़ की हड्डी को गंभीर नुकसान हो सकता है और पीठ संबंधी गंभीर समस्याएं हो सकती हैं.

एसोचैम के सर्वेक्षण का नतीजा

एसोचैम की स्वास्थ्य समिति के अध्यक्ष बी के राव ने कहा, "इन बच्चों को स्लिप डिस्क, स्पॉन्डिलाइटिस, स्पॉन्डिलोलिस्थीसिस, पीठ में लगातार दर्द, रीढ़ की हड्डी के कमजोर होने और कूबड़ निकलने की समस्या का सामना करना पड़ सकता है."

उन्होंने कहा कि अगर बच्चा एक कंधे पर बैग रखता है, तो एक तरफ अतिरिक्त वजन हो जाता है, जिससे स्पाइन (रीढ़) सिकुड़ती है और जब वह बैग नीचे उतारता है तो स्पाइन बढ़ती है. जो अतिरिक्त वजन होता है उससे स्नायुओं में खिंचाव होता है. बस्तों का भारी वजन के चलते बच्चों का स्वास्थ्य एवं शारीरिक विकास पर जोखिम बना रहता है.

यह सर्वे अहमदाबाद, दिल्ली, चेन्नई, कोलकाता, बेंगलुरु, मुंबई, हैदराबाद, पुणे, लखनऊ, जयपुर और देहरादून में किया गया, जिसमें ढाई हजार छात्रों और एक हजार अभिभावकों से बातचीत की गई थी.

वजन का 10 फीसदी होना चाहिए बैग

ज्यादातर अभिभावकों की शिकायतें थी कि आठ पीरियड के लिए बच्चे हर रोज करीब 20 से 22 किताबें स्कूल ले जाते हैं. इसके अलावा स्कैट्स, ताइक्वांडो के उपकरण, स्विमिंग बैग और क्रिकेट किट भी कभी-कभार ले जाते हैं. हालांकि कई स्कूलें ऐसे भी हैं जो स्पोर्ट किट्स के लिए लॉकर उपलब्ध कराते हैं.

यदि कानून पर गौर करें तो बच्चों के स्कूल बैग अधिनियम-2006 के मुतबिक स्कूल बैग (बस्ता) बच्चे के वजन से दस फीसदी से ज्यादा नहीं होना चाहिए. नर्सरी और काइंडरगर्टेन (केजी) के बच्चों के लिए स्कूल बैग नहीं होना चाहिए.

First published: 6 September 2016, 13:55 IST
 
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