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नकली नोट, बांग्लादेश सीमा और डी कंपनी का त्रिकोण

शौर्ज्य भौमिक | Updated on: 25 May 2016, 8:02 IST
(पीटीआई)

रविवार को गुजरात और छ्त्तीसगढ़ से दो-दो लोगों को नकली नोट से जुड़े मामले में गिरफ्तार किया गया. उनके पास से 1.6 लाख रुपये के नकली नोट भी बरामद किए गए.

भारत में साल 2011 से 2014 के बीच कुल 146 करोड़ रुपये नकली नोट बरामद किए गए. इस दौरान नकली नोट से जुड़े मामलों में 6,233 प्राथमिक सूचना (एफआईआर) दर्ज की गईं. जिनमें 5,023 लोगों पर नकली नोट के धंधे में शामिल होने का आरोप लगा.

भारतीय सांख्यिकी संस्थान (आईएसआई) के पिछले साल के अनुमान के मुताबिक देश में लगभग हर समय 400 करोड़ रुपये मूल्य के नकली नोट प्रचलन में रहते हैं. आईएसआई ने ये शोध राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआईए) के कहने पर किया था.

नकली नोटों का गढ़

केंद्र सरकार के अनुसार पश्चिम बंगाल का मालदा जिला देश में नकली नोटों की आमद का सबसे बड़ा जरिया है. पश्चिम बंगाल में 173 किलोमीटर लंबी सीमा बांग्लादेश से जुड़ी हुई है. 

कैच ने मालदा जाकर नकली नोटों के कारोबार को समझने की कोशिश की. सीमा सुरक्षा बल के जवानों और एनआईए के सूत्रों की मानें तो भयानक गरीबी, मानवाधिकार हनन और कुछ संदिग्ध गिरोहों के मकड़जाल से नकली नोटों के धंधे को खाद-पानी मिलता है और इन सबके पीछे मुंबई के भगोड़े माफिया डॉन दाऊद इब्राहिम की भी बड़ी भूमिका है.

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पाकिस्तान के कराची में तीन प्रमुख बांग्लादेशी कॉलोनियां हैं. यहां रहने वाले जब भी बांग्लादेश जाना चाहते हैं तो पाकिस्तान सरकार उन्हें वैध दस्तावेज नहीं उपलब्ध कराती. 

लेकिन उच्चायोग से जुड़े कुछ दलाल इन लोगों को 'आउट पास' दिला देते हैं जो एक साल तक वैध होता है.

पाकिस्तान में रहने वाले बांग्लादेशियों का इस्तेमाल नकली नोटों की तस्करी के लिए होता है

एनआईए और बांग्लादेश पुलिस के अनुसार ये दलाल माफिया सरगना दाऊद इब्राहिम के लिए काम करते हैं.

जो लोग अपने साथ नकली नोट ले जाने को तैयार हो जाते हैं उन्हें दुबई के रास्ते ढाका भेजा जाता है. कई बार इसके लिए दुबई बंदरगाह से चटगांव बंदरगाह का रास्ता चुना जाता है.

नकली नोट के चटगांव/ढाका पहुंचने के बाद इसे स्थानीय एजेंट चापाई नवाबगंज और मोनाकाशा ले जाते हैं. ये दोनों इलाके बांग्लादेश के राजशाही डिविजन में आते हैं.

एनआईए के एक अधिकारी ने बताया, "नकली नोट के रैकेट में सबसे अहम नाम हबील शेख और कालू शेख का है. बाहर से नकली नोट को लेना और फिर उसे भारत भेजना इन्हीं के जिम्मे होता है. हमने बांग्लादेश पुलिस से दोनों को सौंपने की मांग की है लेकिन अभी तक उन्होंने इस स्वीकार नहीं किया है."

मालदा के रास्ते पूरे भारत में

नकली नोट पूरे भारत में चलाए जाते हैं लेकिन वो देश में आते मालदा के रास्ते से ही हैं. 

मसलन, पिछले साल ही एनआईए ने सुनेश शर्मा औ राजन चोपड़ा नामक दो लोगों को नकली नोट के मामले में मालदा के कालिचक से गिरफ्तार किया था. जबकि दोनों क्रमशः हरियाणा और पंजाब के रहने वाले हैं. राजन चोपड़ा पंजाब में कई मैरिज हॉल का मालिक है. दोनों इतनी दूर चलकर मालदा नकली नोट लेने आए थे.

नकली नोट के कूरियरों को राजनीतिक संरक्षण भी प्राप्त है. एनआईए के अधिकारी कहते हैं, "ज्यादातर स्थानीय कूरियर किसी न किसी राजनीतिक पार्टी से जुड़े हैं. जब हम उनसे पूछताछ करते हैं तो वो दूसरी पार्टी से जुड़े कूरियर का नाम बताकर उसे फंसाने की कोशिश करते हैं. हम अपने सूत्रों का भी भरोसा नहीं करते. कई बार हमें लगता है कि हमारे कुछ सूत्र भी नकली नोट के रैकेट में शामिल हैं."

नकली नोटों की गुणवत्ता

मालदा से आने वाले नकली नोट मुश्किल से पकड़ में आते हैं. कोई नोट असली है या नकली इसे पहचानने के 10 संकेत हैं. मालदा से आने वाले नकली नोट में इनमें से आठ संकेतों के माध्यम से पकड़ में नहीं आते.

एनआईए के अधिकारी बताते हैं, "हबील और कालू 18 रुपये में 1000 रुपये के नकली नोट लेते हैं. स्थानीय आपूर्तिकर्ता के पास ये 280 में 1000 रुपये की दर से पहुंचता है. उसके बाद राजन चोपड़ा जैसे लोग इसे 320 में 1000 रुपये की दर से खरीदते हैं."

भारत-बांग्लादेश अंतरराष्ट्रीय सीमा पर स्थित महदीपुर चेक पोस्ट पर तैनात बीएसएफ के एक जवान से हमने नकली नोटों की तस्करी के बारे में जानना चाहा.

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बीएसएफ के जवान ने कैच को बताया, "नकली नोटों के तस्कर अक्सर सीमा पर लगी बाड़ काट देते हैं. जब हम उन्हें पकड़ लेते हैं तो सैकड़ों गांववालों इकट्ठे हो जाते हैं. अभी दो दिन पहले ही गांववालों ने हमपर हमला कर दिया और एक जवान का हाथ कट गया, एक दूसरे जवान का सिर फट गया. स्थानीय पुलिस भ्रष्ट है. वो हमारी मदद नहीं करती. हमारे पास ज्यादा अधिकार नहीं हैं, हम असहाय हैं."

नकली नोट पूरे भारत में चलाए जाते हैं लेकिन वो देश में आते मालदा के रास्ते से ही हैं

चेक पोस्ट से कुछ किलोमीटर दूर स्थित एक गांव में जाकर हमने स्थिति समझनी चाही. गांव के कुछ लोगों का कहना था कि एनआईए-पुलिस-बीएसएफ उनपर जुल्म ढाते हैं और झूठे मुकदमों में फंसा कर उन्हें मनमाने तरीके से उठा लेते हैं.

अत-उर-रहमान नामक एक ग्रामीण ने कैच से कहा, "मेरा भतीजा अब्दुल सलाम और उसका दोस्त लिटन सर्कस देखकर आ रहे थे. उन्हें इंग्लिशबाजार पुलिस ने ट्रैफिक तोड़ने के लिए पकड़ लिया. बाद में हमें पता चला कि उन दोनों पर नकली नोट के कारोबार का आरोप लगा दिया गया है. उनके पास से पचास हजार रुपये के नकली नोट बरामद दिखाए गए. 25 दिनों बाद भी दोनों को जमानत नहीं मिली है. हम जब भी पुलिस के पास जाते हैं वो कहते हैं चुनाव खत्म होने के बाद आना."

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स्थानीय पुलिस और एनआईए के खिलाफ ऐसे आरोप लगाने वाले गांववालों की अच्छी खासी संख्या है. गांववालों के अनुसार कई बार आपसी रंजिश के चलते भी कुछ गांववाले बदले की भावना से किसी को फंसाने के लिए बीएसएफ को गलत जानकारी दे देते हैं.

सुरक्षा बलों की मुश्किल

जब कैच ने इंग्लिशबाजार के थाना इंचार्ज से इस केस के बारे में पूछा तो उन्होंने कहा कि हमारे पास नकली नोट से जुड़ा ऐसा कोई मामला दर्ज नहीं है. थाना इंचार्ज ने कहा, "चुनाव के समय अपराध में कमी आ जाती है."

थाना इंचार्ज ने कहा कि ये नाम इलाके में बहुत आमफहम हैं. उन्होंने इससे ज्यादा जानकारी देने से मना कर दिया.

हमारे स्थानीय सूत्र ने बताया कि नकली नोट के मामले में गांववालों की खासकर मोहब्बतपुर, गोलपगंज और शाशानी गांव के लोगों पर भरोसा करना मुश्किल है.

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स्थानीय सूत्र ने कैच को बताया, "यहां के ज्यादातर लोग नकली नोट के काम में शामिल हैं. यहां नकली नोट चावल, चीनी या आटे की तरह है. यहां काफी गरीबी है. 

नौकरी नहीं है. 300-400 रुपये में सीमापार के आए नकली नोटों के पैकेट/झोले की तस्करी करवा लेना मुश्किल नहीं. तस्करी में लैंप पोस्ट के नंबरों को लैंडमार्क की तरह इस्तेमाल किया जाता है."

जवान और गांववाले  आमने-सामने

मुहब्बतपुर में कैच ने बीएसएफ के दो जवानों से बातचीत की. एक जवान हरियाणा का था और दूसरा झारखंड का. दोनों जवानों का कहना था कि वो यहां पर अपनी तैनाती से परेशान हो चुके हैं.

एक जवान ने कहा, "इससे अच्छा तो हम पाकिस्तान सीमा पर रहते. वहां करो या मरो वाली स्थिति होती. यहां हमें सैकड़ों लोग घेर लेते हैं और हमारे पास भीड़ को हटाने के लिए केवल आंसू गैस के गोले होते हैं. जबकि तक बाहरी मदद नहीं आती स्थिति ये हो जाती है कि दो जवान और तलवार एवं लाठी-डंडे से लैश सैकड़ों गांववाले आमने-सामने होते हैं."

एनआईए को भी ऐसी दिक्कतों का सामना करना पड़ता है. एनआईए के अधिकार ने बताया कि जब वो एक गांव में नकली नोटों से जुड़े मामले में छापामारी कर रहे थे तो उनपर बम फेंकने की कोशिश की गई.

सुरक्षा बलों पर आरोप

दूसरी तरफ बीएसएफ पर भी क्रूरता दिखाने के आरोप लगते रहते हैं.

2010 में ह्यूमन राइट वाच की एक रिपोर्ट में बांग्लादेश सीमा पर मनमाने बल प्रयोग, गैर-कानूनी तौर पर हिरासत में रखने और अंधाधुंध गोलीबारी जैसी घटनाओं की बात कही गई. ये रिपोर्ट करीब 100 लोगों से बातचीत के बाद तैयार की गई थी. रिपोर्ट के अनुसार भारतीय सुरक्षा बलों द्वारा पीड़ित लोगों को पर्याप्त कानूनी मदद भी नहीं मिलती.

नकली नोटों का मुद्दा स्फिति, बचत खाते की कम ब्याज दर, वित्तीय घाटे और महंगाई बढ़ने से सीधा संबंध है. इस तरह नकली नोट किसी भी अर्थव्यवस्था को अंदर ही अंदर खोखला करते रहते हैं. नकली नोटों का आतंकवाद, ड्रग्स, सीमापार घुसपैठ और तस्करी से भी सीधा संबंध है.

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भारत का वित्त मंत्रालय, रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया, गृह मंत्रालय, सीबीआई और एनआईए जैसी संस्थाएं इस बुराई से छुटकारा पाने के लिए मिलकर काम करती हैं. अनलॉफुल एक्टिविटीज (प्रिवेंशन) एक्ट के तहत नकली नोटों से जुड़े अपराध को 'आतंकी' हरकत माना गया है.

लेकिन आईएसआई के अध्ययन के अनुसार भारत में पाए जाने वाले 1000 के हर 10 लाख नोटों में से औसतन 357 नोट नकली होते हैं. अमेरिका और कनाडा में ये दर 200 नोट से कम है.

First published: 25 May 2016, 8:02 IST
 
शौर्ज्य भौमिक @sourjyabhowmick

संवाददाता, कैच न्यूज़, डेटा माइनिंग से प्यार. हिन्दुस्तान टाइम्स और इंडियास्पेंड में काम कर चुके हैं.

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