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अटल बिहारी वाजपेयी का 93 साल की उम्र में निधन, पूर्व PM राजनीति के थे 'अजातशत्रु'

कैच ब्यूरो | Updated on: 16 August 2018, 17:52 IST

पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी एम्स में जिंदगी और मौत की जंग हार गए हैं. पिछले लगभग 40 घंटे से लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर रखे गए अटल जी अब इस दुनिया को अलविदा कह गए हैं. उनकी तबीयत को लेकर पिछले काफी समय से बेचैनी थी. पिछले 40 घंटों से उनकी सेहत में लगातार गिरावट जारी था. आज शाम 5 बजकर पांच मिनट पर अटल जी ने एम्स में अंतिम सांस ली है.

बता दें कि करीब 2 महीनों पहले अटल बिहारी को AIIMS में भर्ती कराया गया था. अटल को किडनी की नली में संक्रमण, छाती में जकड़न, मूत्रनली में संक्रमण आदि के बाद 11 जून को एम्स में भर्ती कराया गया था. अटल बिहारी वाजपेयी डिमेंशिया नामक बीमारी से पीड़ित थे और वह साल 2009 से ही व्हीलचेयर पर थे.

गौरतलब है कि राजनीति के अजातशत्रु अटल बिहारी वाजपेयी 3 बार देश के प्रधानमंत्री रहे. वह पहली बार साल 1996 में प्रधानमंत्री बने हालांकि उनकी सरकार सिर्फ 13 दिनों तक ही रह पाई. दोबारा 1998 में वह फिर प्रधानमंत्री बने, तब उनकी सरकार 13 महीनों तक चली थी. इसके बाद साल 1999 में अटल बिहारी वाजपेयी तीसरी बार प्रधानमंत्री बने और 5 सालों का कार्यकाल पूरा किया.

 

राजनीतिक जीवन

अटल बिहारी वाजपेयी का जन्‍म 25 दिसंबर 1924 को ग्वालियर में हुआ. वाजयेपी साल 1942 में उस समय राजनीति में आए, जब भारत छोड़ो आंदोलन के दौरान उनके भाई 23 दिनों के लिए जेल गए थे. इसके बाद साल 1951 में अटल ने आरएसएस के सहयोग से भारतीय जनसंघ पार्टी की स्थापना की. इस पार्टी में श्‍यामा प्रसाद मुखर्जी जैसे नेता शामिल हुए थे. फिर साल 1957 में वाजपेयी ने पहली बार लोकसभा का चुनाव जीता.

अटल बिहारी वाजपेयी यूपी के बलरामपुर संसदीय सीट से चुनाव जीतकर राज्‍यसभा के सदस्‍य बने. तब तत्कालीन पीएम जवाहरलाल नेहरू ने उनका एक भाषण सुनकर कहा था कि आने वाले दिनों में यह व्यक्ति जरूर प्रधानमंत्री बनेगा. साल 1968 में वाजपेयी राष्‍ट्रीय जनसंघ के राष्‍ट्रीय अध्‍यक्ष बने. उस समय पार्टी में नानाजी देशमुख, बलराज मधोक तथा लालकृष्‍ण आडवाणी जैसे नेता थे.

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फिर आया साल 1975-77 में आपातकाल का दौर. जब वाजपेयी अन्‍य नेताओं के साथ गिरफ्तार कर लिए गए. वे आपातकाल के लिए इंदिरा गांधी की आलोचना कर रहे थे. जेल से छूटने के बाद वाजयेपी ने जनसंघ का जनता पार्टी में विलय कर लिया. आपातकाल के बाद साल 1977 में हुए लोकसभा चुनाव में जनता पार्टी की जीत हुई थी और वो मोरारजी देसाई के नेतृत्‍व वाली सरकार में विदेश बने. विदेश मंत्री बनने के बाद वाजपेयी ऐसे पहले नेता थे जिन्‍होंने संयुक्‍त राष्‍ट्र महासंघ को हिन्‍दी भाषा में संबोधित किया.

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इसके बाद जनता पार्टी बिखर गई और 1980 में वाजपेयी जनता पार्टी छोड़ भारतीय जनता पार्टी से जुड़ गए. वाजपेयी भाजपा के पहले राष्‍ट्रीय अध्‍यक्ष बने. 1994 में कर्नाटक, 1995 में गुजरात और महाराष्‍ट्र में पार्टी जब चुनाव जीत गई उसके बाद पार्टी के तत्कालीन अध्‍यक्ष लालकृष्‍ण आडवाणी ने वाजपेयी को प्रधानमंत्री पद का उम्‍मीदवार घोषित कर दिया. वाजपेयी 1996 से लेकर 2004 तक 3 बार देश के प्रधानमंत्री बने.

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साल 1996 के लोकसभा चुनाव में बीजेपी देश की सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी और वाजपेयी पहली बार प्रधानमंत्री बने. हालांकि उनकी सरकार 13 दिनों में गिर गई. फिर साल 1998 में उन्होंने अन्‍य पार्टियों के सहयोग से एनडीए का गठन किया और फिर प्रधानमंत्री बने. यह सरकार 13 महीनों तक चली, लेकिन बीच में ही जयललिता की पार्टी ने सरकार का साथ छोड़ दिया जिसके चलते एक बार फिर उनकी सरकार गिर गई.

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एक बार फिर साल 1999 में हुए लोकसभा चुनाव में बीजेपी सत्‍ता में आई और इस बार अटल बिहारी वाजपेयी ने अपना कार्यकाल पूरा किया. वाजपेयी 1991, 1996, 1998, 1999 और 2004 में लखनऊ से लोकसभा सदस्य चुने गए. बतौर प्रधानमंत्री अपना कार्यकाल पूर्ण करने वाले वो पहले और अभी तक एकमात्र गैर-कांग्रेसी नेता हैं.

First published: 16 August 2018, 14:53 IST
 
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