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अटल बिहारी वाजपेयी को इन 5 लोकसभा सीटों पर मिली थी हार, जानिए उनसे जुड़ी दिलचस्प बातें

कैच ब्यूरो | Updated on: 16 August 2018, 15:18 IST
(file photo )

पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी की हालत नाजुक बनीं हुई है. वो दिल्ली के एम्स अस्पताल में लाइफ सपोर्ट पर हैं. पिछले 36 घंटे में उनकी हालत में कोई सुधार नहीं देखा गया है. देशभर में वाजपेयी जी की दीर्घायु की कामना की जा रही है. अटल बिहारी वाजपेयी एक ऐसे नेता रहे हैं, जिन्होंने अपने राजनीतिक जीवन कई कीर्तिमान रचे हैं.

वाजपेयी देश के एकमात्र ऐसे राजनेता हैं, जो चार राज्यों के छह लोकसभा क्षेत्रों की नुमाइंदगी कर चुके हैं. उत्तर प्रदेश के लखनऊ और बलरामपुर, गुजरात के गांधीनगर, मध्यप्रदेश के ग्वालियर और विदिशा और दिल्ली की नई दिल्ली संसदीय सीट से चुनाव जीतने वाले वाजपेयी एकलौते नेता हैं.

अटल बिहारी वाजपेयी को पहली बार सफलता 1957 में पहली बार बलरामपुर संसदीय सीट से चुनाव जीतकर लोकसभा पहुंचे थे, लेकिन उनके नाम हार का भी कीर्तिमान दर्ज है. ऐसी पांच लोकसभा सीटें रही हैं, जहां वाजपेयी को हार का सामना करना पड़ा है.

 ये हैं वो पांच लोकसभा सीट जहां मिली थी वाजपेयी को हार

1. वाजपेयी ने पहली बार साल1952 में लोकसभा का चुनाव लड़ा था. उन्होंने लखनऊ लोकसभा सीट से पहली बार चुनाव लड़ा लेकिन वह जीत नहीं पाए. ये उत्तर प्रदेश की एक लोकसभा सीट पर हुए उप चुनाव में उतरे थे जहां उन्हें हार का सामना करना पड़ा था.

2. वाजपेयी ने 1962 में लखनऊ लोकसभा सीट पर फिर से चुनाव लड़ा. लेकिन इस बार भी उनको जीत नहीं मिली. इसके बाद उनको राज्यसभा सदस्य चुना गया.

3. साल 1967 में फिर से वाजपेयी ने लखनऊ लोकसभा सीट से अपना भाग्य अजमाया. लेकिन इस बार भी उनको जीत नसीब नहीं हुई.

4. 1984 में अटल बिहारी ने मध्य प्रदेश के ग्वालियर से लोकसभा चुनाव का पर्चा दाखिल कर दिया और उनके खिलाफ अचानक कांग्रेस ने माधवराव सिंधिया को खड़ा कर दिया. जबकि माधवराव गुना संसदीय क्षेत्र से चुनकर आते थे. सिंधिया से वाजपेयी पौने दो लाख वोटों से हार गए.

5.1957 में जनसंघ ने उन्हें तीन लोकसभा सीटों लखनऊ, मथुरा और बलरामपुर से चुनाव लड़ाया. लखनऊ में वो चुनाव हार गए, मथुरा में उनकी ज़मानत जब्त हो गई लेकिन बलरामपुर संसदीय सीट से चुनाव जीतकर लोकसभा पहुंचे.

आपको बता दें कि अटल बिहारी वाजपेयी का जन्म 25 दिसंबर 1924 को ग्वालियर में हुआ था. 1942 में उन्होंने पहली बार राजनीति में प्रवेश किया. भारत छोड़ो आंदोलन के दौरान उनके भाई को 23 दिनों के लिए जेल जाना पड़ा. इसके बाद वाजपेयी ने राजनीति में कदम रखा. अटल बिहारी वाजपेयी को पहली बार सफलता 1957 में बलरामपुर संसदीय सीट से चुनाव जीतकर लोकसभा पहुंचे. शुरुआत में भले ही लखनऊ से उनको हार का सामना करना पड़ा था, लेकिन बाद में वाजपेयी ने लखनऊ को ही अपनी कर्मभूमि बना लिया था.  साल 1991 के आम चुनाव में  वाजपेयी ने लखनऊ और मध्य प्रदेश की विदिशा सीट से चुनाव लड़ा और दोनों ही जगह से जीते. बाद में उन्होंने विदिशा सीट छोड़ दी. इसके बाद 1996 में वाजपेयी ने लखनऊ सीट के साथ-साथ गांधीनगर से चुनाव लड़ा और दोनों ही जगहों से जीत हासिल की. साल  1998 और 1999 का लोकसभा चुनाव लखनऊ सीट से जीतकर सांसद बने.

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First published: 16 August 2018, 15:10 IST
 
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