Home » इंडिया » Atal Bihari Vajpayee health LIVE Updates: When PV narasimha rao chose Atal bihari vajpayee to represent India at geneva
 

जब अटल बिहारी वाजपेयी ने विपक्ष का नेता होने के बावजूद UN में भारत का झंडा किया था बुलंद

कैच ब्यूरो | Updated on: 16 August 2018, 16:08 IST
(File Photo )

पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी की हालत नाजुक बनीं हुई है. वो दिल्ली के एम्स अस्पताल में लाइफ सपोर्ट पर हैं. पिछले 36 घंटे में उनकी हालत में कोई सुधार नहीं देखा गया है. वाजपेयी एक ऐसे नेता रहे हैं, जिन्हें न सिर्फ अपनी पार्टी में बल्कि विपक्षी पार्टियों में भी मान-सम्मान मिला.

इसका सबसे बड़ा उदाहरण साल 1994 में देखने को मिला, जब विपक्ष में होने के बावजूद अटल बिहारी वाजपेयी को संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार आयोग भेजे गए प्रतिनिधिमंडल का हिस्सा बनाया गया. उस समय केंद्र में पीवी नरसिम्हा राव की सरकार थी.

भारत के सामने उस समय सबसे बड़ा संकट संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार आयोग में पाकिस्तान द्वारा रखा गया ऑर्गनाइजेशन ऑफ इस्लामिक कोऑपरेशन (OIC) प्रस्ताव रखा था. पाकिस्तान ने जम्मू कश्मीर में कथित मानवाधिकार उल्लंघन का भारत पर आरोप लगाते हुए यूएन में OIC प्रस्ताव रखा. अगर यह प्रस्ताव पास हो जाता तो भारत के लिए मुश्किल खड़ी हो सकती थी. भारत को कई प्रतिबंधों का सामना करना पड़ सकता था.

तत्कालीन प्रधानमंत्री पीवी नरसिम्हा राव ने इस मामले को खुद अपने हाथों में लेते हुए जिनेवा में भारत का प्रतिनिधितिव करने के लिए एक टीम का गठन किया. इस टीम में तत्कालीन विदेश मंत्री सलमान खुर्शीद, ई. अहमद, नैशनल कॉन्फ्रेंस प्रमुख फारूक अब्दुल्ला और हामिद अंसारी का नाम शामिल था.

लेकिन इनके साथ एक और नाम था. जो अटल बिहारी वाजपेयी का था. वाजपेयी का नाम देखकर हर कोई हैरान रह गया था, क्योंकि उस समय वाजपेयी विपक्ष के नेता हुआ करते थे. उनको इस प्रतिनिधिमंडल में शामिल करना कोई छोटी बात नहीं थी. ये वो समय था, जब देश के सभी नेता एक साथ खड़े हो गए थे.

इसके बाद पीवी नरसिम्हा राव ने मुस्लिमों देशों से संपर्क साधना शुरू कर दिया. वाजपेयी ने OIC के प्रभावशाली 6 सदस्य देशों और अन्य पश्चिमी देशों के राजदूतों को नई दिल्ली बुलाया. दूसरी तरफ वाजपेयी ने जिनेवा में भारतीय मूल के व्यापारी हिंदूजा बंधुओं को तेहरान से बातचीत के करने के लिए कहा. वाजपेयी अपनी रणनीति में सफल हो गए. प्रस्ताव पर मतदान के दौरान कई देशों ने अपने हाथ पीछे खींच लिए. इंडोनेशिया और लीबिया ने इस प्रस्ताव से खुद को अगल कर लिया. सीरिया और चीन ने भी भारत का साथ दिया. इसके बाद शाम पांच बजे पाकिस्तान ने प्रस्ताव वापस ले लिया. भारत की जीत हुई.

ये भी पढें-  अटल बिहारी वाजपेयी को इन 5 लोकसभा सीटों पर मिली थी हार, जानिए उनसे जुड़ी दिलचस्प बातें

First published: 16 August 2018, 16:08 IST
 
पिछली कहानी
अगली कहानी