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अयोध्या विवाद: तीन महीने में लिखी जाएगी 68 सालों के तकरार की तकदीर

कैच ब्यूरो | Updated on: 12 August 2017, 13:46 IST

सुप्रीम कोर्ट में अयोध्या मामले पर सुनवाई के दौरान गरमागरम बहस देखने को मिली. अदालत ने शुक्रवार को कहा कि वह राम मंदिर-बाबरी मस्जिद मामले में अपीलों की सुनवाई पांच दिसंबर से शुरू करेगा और इसमें किसी तरह के स्थगन की इजाजत नहीं दी जाएगी.

न्यायमूर्ति दीपक मिश्रा, न्यायमूर्ति अशोक भूषण और न्यायमूर्ति अब्दुल नसीर की पीठ ने संबद्ध पक्षों से कहा कि वे 12 हफ्ते के अंदर आठ भाषाओं में मौजूद उन दस्तावेजों का अंग्रेजी में अनुवाद करें, जिन पर उनकी दलील का दारोमदार हो सकता है. अदालत ने यूपी सरकार से कहा कि वह इलाहाबाद उच्च न्यायालय में विवाद के निपटारे के लिए रिकॉर्ड किए गए साक्ष्यों का अनुवाद दस हफ्तों में करे.

सुप्रीम कोर्ट की विशेष पीठ को अपनी दलीलों से सहमत कराने के लिए वकीलों की आवाज़ तेज होने लगी. इस पर जस्टिस अशोक भूषण को अदालत का नजरिया समझाने के लिए सामने लगी माइक का सहारा लेना पड़ गया.

मामले में सुनवाई तो दोपहर दो बजे शुरू होनी थी. लेकिन, डेढ़ बजे ही कोर्ट रूम भर गया. यहां तक कि लंच टाइम में लोग वहां से हिले नहीं. उन्हें लग रहा था कि एक बार कोर्ट से बाहर जाने पर दोबारा घुसना मुमकिन नहीं हो पाएगा. ठीक दो बजे न्यायमूर्ति दीपक मिश्रा, अशोक भूषण और अब्दुल नजीर ने कोर्ट में प्रवेश किया.

यूपी सरकार की तरफ से पेश एएसजी तुषार मेहता ने कहा कि पहले हाई कोर्ट के फैसले के खिलाफ दाखिल अपीलों पर सुनवाई की जाए. लेकिन, सुन्नी सेंट्रल वक्फ बोर्ड के वकील अनूप जॉर्ज चौधरी, कपिल सिब्बल और राजीव धवन ने इसका विरोध करते हुए कहा कि अभी दस्तावेजों का अनुवाद नहीं हो पाया है. संस्कृत, हिंदी, उर्दू, पाली, फारसी, गुरुमुखी समेत आठ भाषाओं में मामले से जुड़े दस्तावेज हैं.

हाईकोर्ट के फैसले में कहा गया है कि पहले दस्तावेजों का अनुवाद कराया जाए. इन वकीलों की तेज़ आवाज़ के बीच रामलला के वकील सीएस वैद्यनाथन और एएसजी तुषार मेहता ने सुझाव दिया कि जो पक्षकार जिस दस्तावेज का हवाला देना चाहता है, वही उसका अनुवाद कराए. अदालत की बेंच को सुझाव सही लगा. लेकिन सुन्नी वक्फ बोर्ड के वकील का कहना था कि दूसरा पक्ष सवाल उठाएगा तो क्या होगा.

अनुवाद को लेकर जब तकरार बढ़ने लगी, तो एएसजी मेहता ने कहा कि मामले में मुकदमा 1949 में शुरू हुआ और अब 2017 है. अभी दस्तावेजों के अनुवाद पर हम बहस कर रहे हैं. जब अदालत ने पूछा कि अनुवाद में कितना वक्त लगेगा, तो रामलला की ओर से सिर्फ चार हफ्ते मांगे गए.

सुन्नी बोर्ड ने इसके लिए चार महीने का समय मांगा. वहीं निर्मोही अखाड़े के वकील सुशील जैन ने कहा कि वे अभी अंदाज से भी नहीं बता सकते कि कितना समय लगेगा. पीठ ने इस दलील पर एतराज जताया और पक्षकारों को अनुवाद के लिए 12 हफ्ते का समय दिया.

अदालत ने कहा कि आठ भाषाओं में मौजूद एक लाख पन्नों की सामग्री के अंग्रेजी में अनुवाद के लिए उसके द्वारा तय समय अंतिम है और अब कोई स्थगन नहीं दिया जाएगा. अयोध्या के इस भूमि विवाद मामले में इलाहाबाद हाई कोर्ट के फैसले के खिलाफ दायर याचिकाओं की सुनवाई के लिए पीठ बनाई है.

हाईकोर्ट की लखनऊ खंडपीठ ने अपने फैसले में कहा था कि विवादित भूमि को संबद्ध पक्षों सुन्नी वक्फ बोर्ड, निर्मोही अखाड़ा और राम लला के बीच बराबर-बराबर बांट दिया जाए.

उत्तर प्रदेश सरकार ने मामले की जल्द से जल्द सुनवाई के लिए आग्रह किया था जबकि सुन्नी वक्फ बोर्ड और निर्मोही अखाड़े ने मामले की तैयारी के लिए समय मांगा था क्योंकि दस्तावेज बेहद ज्यादा हैं.

मामले में मध्यवर्ती अर्जी लगाने वाले भाजपा नेता सुब्रहमण्यम स्वामी ने इसकी जल्द सुनवाई का आग्रह किया और पीठ से कहा कि उनके पूजा के अधिकार पर ध्यान दिया जाए. लेकिन, पीठ ने कहा कि वह पहले याचिकाओं को सुनेगी.

साभार: आईएएनएस

First published: 12 August 2017, 13:46 IST
 
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