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राम मंदिर विवाद: केशव प्रसाद मौर्य ने सुप्रीम कोर्ट के फैसले को माना गलत संदेश

कैच ब्यूरो | Updated on: 29 October 2018, 12:42 IST

अयोध्या में राम मंदिर और बाबरी मस्जिद विवाद पर सुप्रीम कोर्ट ने जनवरी 2019 तक सुनवाई टाल दी है. इस पर उत्तर प्रदेश के डिप्टी सीएम केशव प्रसाद मौर्य ने कोर्ट के फैसले को गलत संदेश माना है. केशव प्रसाद मौर्य ने कहा है कि सुनवाई टाल देना गलत संदेश देता है. हालांकि केशव प्रसाद मौर्य ने यह भी कहा कि वह सुुप्रीम कोर्ट के फैसले पर कोई टिप्पणी नहीं करना चाहते.

बता दें कि सुप्रीम कोर्ट ने अयोध्या मामले की सुनवाई जनवरी 2019 तक टाल दी है. बता दें कि सुप्रीम कोर्ट के चीफ जस्टिस रंजन गोगोई के नेतृत्व में तीन जजों की नई बेंच इस मामले की सुनवाई कर रही थी. इससे पूर्व मामले की सुनवाई पूर्व चीफ जस्टिस दीपक मिश्रा, अशोक भूषण और अब्दुल नजीर की बेंच ने की थी.

मामले की सुनवाई करते हुए नई बेंच ने कहा कि जनवरी 2019 में अगली सुनवाई की जाएगी. सुप्रीम कोर्ट में हुई सुनवाई मात्र 3 मिनट में ही टल गई. चीफ जस्टिस रंजन गोगोई की अगुवाई वाली बेंच ने अब इस मामले के लिए जनवरी, 2019 की तारीख तय की है. इसका मतलब ये है कि अब ये मामला करीब 3 महीने बाद ही कोर्ट में उठेगा.

गौरतलब है कि अयोध्या भूमि विवाद मामले में हाई कोर्ट की तीन सदस्यीय पीठ ने 30 सितंबर, 2010 को 2:1 के बहुमत वाले फैसले में कहा था कि 2.77 एकड़ जमीन को तीनों पक्षों- सुन्नी वक्फ बोर्ड, निर्मोही अखाड़ा और राम लला में बराबर-बराबर बांट दिया जाए. इस फैसले को किसी भी पक्ष ने नहीं माना और उसे सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी गई. सुप्रीम कोर्ट ने 9 मई 2011 को इलाहाबाद हाईकोर्ट के इस फैसले पर रोक लगा दी थी.

बता दें कि ये केस पिछले 8 सालों से सुप्रीम कोर्ट में है. 2019 में होने वाले चुनावों के मद्देनजर एक बार फिर से इस मामले ने तूल पकड़ लिया है. ऐसे में आज से शुरू हो रही सुनवाई को इस मामले में फाइनल काउंटडाउन की तरह देखा जा रहा है.

First published: 29 October 2018, 12:42 IST
 
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