Home » इंडिया » Ayodhya Dispute: Know what is the full story, Allahabad High Court gave this decision in 2010
 

जानिए क्या है अयोध्या विवाद की पूरी कहानी, इलाहाबाद हाईकोर्ट ने 2010 में सुनाया था ये फैसला

कैच ब्यूरो | Updated on: 9 November 2019, 9:29 IST

Ram Mandir Babri Masjid Verdict: राम मंदिर-बाबरी मस्जिद के बहुप्रतीक्षित मामले में सुप्रीम कोर्ट 40 दिन की सुनवाई के बाद आज अपना फैसला करने जा रहा है. इसके साथ ही पूरे देश की निगाहें इस फैसले पर टिक गई हैं. लोग सुप्रीम कोर्ट की ओर टकटकी लगाकर देख रहे हैं कि सुप्रीम कोर्ट का फैसला क्या होगा?

इससे पहले हम आपको बताते हैं कि कहां से शुरु हुआ अयोध्या विवाद? अयोध्या विवाद में अब तक क्या हुआ उस पर एक नजर-

1528: मुगल बादशाह बाबर के सेनापति मीर बकी ने यहां मस्जिद बनवाई, जिसे बाबरी मस्जिद का नाम दिया गया.

1853: हिंदुओं ने आरोप लगाया कि भगवान राम के मंदिर को तोड़कर मस्जिद का निर्माण हुआ. पहली बार हिंदू और मुस्लिम समाज के बीच सांप्रदायिक हिंसा भड़की.

1859: बीच का रास्ता निकालते हुए ब्रिटिश सरकार ने एक बाड़ खड़ी करके विवादित परिसर के अंदरूनी और बाहरी हिस्से में मुस्लिमों और हिंदुओं को अलग-अलग इबादत की इजाजत दे दी.

1885: पहली बार कोर्ट-कचेहरी में विवाद पहुंचा. अयोध्या के महंत रघुबर दास ने फैजाबाद कोर्ट में मंदिर के निर्माण की इजाजत के लिए अर्जी दाखिल की.

आजादी के बाद

23 दिसंबर 1949: तकरीबन 50 हिंदुओं ने मस्जिद के अंदर कथित रूप से भगवान राम की मूर्ति रख दी. इसके बाद हिंदू वहां नियमित पूजा-पाठ करने लगे. मुसलमानों ने नमाज पढ़ना बंद कर दिया.

16 जनवरी 1950: गोपाल सिंह विशारद ने फैजाबाद कोर्ट में याचिका दाखिल करते हुए रामलला की पूजा-अर्चना की विशेष अनुमति मांगी.

5 दिसंबर 1950: निर्मोही अखाड़ा के महंत परमहंस रामचंद्र दास ने पूजा जारी रखने और बाबरी मस्जिद में राम की मूर्ति को रखने के लिए मुकदमा दायर किया. मस्जिद को विवादित ढांचा नाम दिया गया.

17 दिसंबर 1959: निर्मोही अखाड़ा ने विवादित स्थल को हिंदू पक्ष को सौंपने के लिए केस दायर किया.

18 दिसंबर 1961: यूपी सुन्नी वक्फ बोर्ड ने बाबरी मस्जिद के मालिकाना हक के लिए मुकदमा दायर किया.

1984: विश्व हिंदू परिषद ने बाबरी मस्जिद के ताले खोलने और अयोध्म्या में राम मंदिर के निर्माण के लिए अभियान शुरू किया. एक समिति भी बनाई गई.

1 फरवरी 1986: फैजाबाद जिला जज ने विवादित स्थल पर हिदुओं को पूजा की इजाजत दी. ताले दोबारा खोले गए. नाराज मुस्लिमों ने विरोध में बाबरी मस्जिद एक्शन कमेटी का गठन किया. इसे राजीव सरकार के शाह बानो प्रकरण को बैलेंस करने के कदम के रूप में देखा गया.

जून 1989: भारतीय जनता पार्टी ने वीएचपी को औपचारिक समर्थन देते हुए राम मंदिर आंदोलन को तेज कर दिया.

1 जुलाई 1989: भगवान रामलला विराजमान के नाम से पांचवां मुकदमा दाखिल हुआ.

9 नवंबर 1989: तत्कालीन प्रधानमंत्री राजीव गांधी ने बाबरी मस्जिद के पास वीएचपी को शिलान्यास की इजाजत दी.

25 सितंबर 1990: बीजेपी अध्यक्ष लाल कृष्ण आडवाणी ने गुजरात के सोमनाथ से अयोध्या तक रथ यात्रा शुरू की. इसके बाद देश भर में सांप्रदायिक हिंसा की घटनाओं में इजाफा हुआ.

नवंबर 1990: बिहार में तत्कालीन सीएम लालू यादव ने आडवाणी की रथयात्रा को रोक दिया. समस्तीपुर में उन्हें गिरफ्तार कर लिया गया. जिसके बाद बीजेपी ने तत्कालीन वीपी सिंह सरकार से समर्थन वापस ले लिया.

2 नवंबर 1990: कारसेवकों ने अयोध्‍या में विवादित ढांचे को गिराने की कोशिश की. तत्कालीन सीएम मुलायम सिंह यादव के आदेश पर बाबरी मस्जिद को बचाने के लिए कार सेवकों पर पुलिस ने फायरिंग की थी. सरकारी आंकड़ों के मुताबिक फायरिंग में 16 लोग मारे गए थे.

अक्टूबर 1991: उत्तर प्रदेश में तत्कालीन कल्याण सिंह सरकार ने बाबरी मस्जिद के आस-पास की 2.77 एकड़ भूमि अधिग्रहीत कर लिया.

कारसेवकों ने ढहा दी बाबरी मस्जिद

6 दिसंबर 1992: हजारों उग्र कारसेवकों ने अयोध्या में बाबरी मस्जिद को ढहा दिया. इसके बाद देश में बड़े पैमाने पर सांप्रदायिक दंगे हुए.

16 दिसंबर 1992: बाबरी विध्वंस के लिए जिम्मेदार हालात की जांच के लिए लिब्रहान आयोग बनाया गया.

जनवरी 2002: तत्कालीन प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी ने अयोध्या विभाग शुरू किया, जिसका काम विवाद को सुलझाने के लिए हिंदुओं और मुसलमानों से बातचीत करना था.

अप्रैल 2002: विवादित स्थल पर मालिकाना हक को लेकर इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ बेंच के तीन जजों की पीठ ने सुनवाई शुरू की.

मार्च-अगस्त 2003: हाईकोर्ट के निर्देश पर भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (एएसआई) ने अयोध्या में खुदाई शुरू की. एएसआई के दावे के मुताबिक मस्जिद के नीचे मंदिर के अवशेष होने के प्रमाण मिले.

जुलाई 2009: लिब्रहान आयोग ने 17 साल बाद तत्कालीन प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह को अपनी रिपोर्ट सौंपी.

28 सितंबर 2010: सुप्रीम कोर्ट ने विवादित मामले में फैसला देने से हाईकोर्ट को रोकने वाली याचिका खारिज की.

30 सितंबर 2010: इलाहाबाद हाई कोर्ट की लखनऊ बेंच ने फैसला सुनाया. अपने आदेश में अदालत ने विवादित जमीन को तीन हिस्सों में बांटा, जिसमें एक हिस्सा राम मंदिर, दूसरा सुन्नी वक्फ बोर्ड और तीसरा निर्मोही अखाड़े को देने को कहा.

9 मई 2011: सुप्रीम कोर्ट में हाईकोर्ट के फैसले को चुनौती दी गई, जिसके बाद फैसले पर स्टे लग गया.

20 जुलाई 2016: बाबरी मामले के सबसे उम्रदराज वादी हाशिम अंसारी का निधन. साल 1949 से वे इस मामले की पैरवी कर रहे थे.

21 मार्च 2017: सुप्रीम कोर्ट ने निर्देश दिया कि हिंदू और मुस्लिम पक्ष बातचीत के जरिए मामले को सुलझाएं. अगर रास्ता नहीं निकलता है तो फिर अदालत मध्यस्थता के लिए तैयार है.

अयोध्या केस: पूरे देश में कड़ी हुई सुरक्षा व्यवस्था, हेलीकॉप्टर से रखी जा रही नजर

अयोध्या केस : ये पांच जज सुनाएंगे फैसला, जानिए कब तक आएगा फैसला

First published: 9 November 2019, 9:22 IST
 
पिछली कहानी
अगली कहानी