Home » इंडिया » Ayodhya-linked verdict : Supreme Court to decide whether mosque is integral to Islam
 

मस्जिद में नमाज पर SC का फैसला, भूमि विवाद को संविधान पीठ के पास नहीं भेजा जायेगा

कैच ब्यूरो | Updated on: 27 September 2018, 14:34 IST

सुप्रीम कोर्ट ने राम जन्मभूमि-बाबरी मस्जिद मालिकाना हक विवाद पर उच्चतम न्यायालय के 1994 के फैसले पर बड़ी पीठ द्वारा पुनर्विचार करने की मांग वाली याचिकाओं पर सुनवाई करते हुए कहा कि सभी धर्मों और धार्मिक स्थानों को समान सम्मानित करने की आवश्यकता है. 3 जजों में से 2 जजों (चीफ जस्टिस दीपक मिश्रा और जस्टिस अशोक भूषण) ने कहा कि मस्जिद में नमाज का मामला 7 जजों वाली बेंच को नहीं भेजा जाएगा.

1994 में न्यायालय ने अपने फैसले में कहा था कि मस्जिद इस्लाम का अभिन्न हिस्सा नहीं है. इससे पहले बाबरी मस्जिद के मुद्दई इकबाल अंसारी ने कहा कि आज कोर्ट का जो भी फैसला आएगा हम उसे मानेंगे. 20 जुलाई को इस पर फैसले को सुरक्षित रखा गया था. प्रधान न्यायाधीश दीपक मिश्रा, न्यायमूर्ति अशोक भूषण और न्यायमूर्ति एस अब्दुल नजीर की पीठ इस पर सुनवाई कर रही थी.

सुप्रीम कोर्ट आज मुस्लिम संगठनों द्वारा बड़े बेंच द्वारा पुनर्विचार की मांग के अनुरोधों के एक बेंच पर अपने फैसले का उच्चारण करेगा. 1994 के फैसले में किए गए अवलोकनों में एक मस्जिद इस्लाम के अभिन्न अंग नहीं था. आज का फैसला राम जन्माभूमि-बाबरी मस्जिद खिताब विवाद से जुड़ा हुआ है.

मुस्लिम संगठनों ने विशेष खंडपीठ के समक्ष तर्क दिया था कि सर्वोच्च न्यायालय के "व्यापक" अवलोकन पांच न्यायाधीशीय खंडपीठ ने फैसला सुनाया कि बाबरी मस्जिद-राम मंदिर भूमि विवाद मामले पर "इसका असर होगा और होगा".

सिद्दीक के कानूनी प्रतिनिधि के सामने उपस्थित वरिष्ठ वकील राजीव धवन ने कहा था कि इस्लाम का अभ्यास करने के लिए मस्जिद आवश्यक नहीं है. सर्वोच्च न्यायालय द्वारा बिना किसी पूछताछ या धार्मिक ग्रंथों पर विचार किए गए थे.

उत्तर प्रदेश सरकार ने पहले शीर्ष अदालत को बताया था कि कुछ मुस्लिम समूह 1994 के फैसले में अवलोकन के पुनर्विचार की मांग करके लंबे समय से लंबित अयोध्या मंदिर-मस्जिद भूमि विवाद मामले में सुनवाई में देरी करने की कोशिश कर रहे थे.

First published: 27 September 2018, 14:25 IST
 
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