Home » इंडिया » Ayodhya Matter: If negotiations break down then SC will intervene & appoint a mediator for resolution
 

सुप्रीम कोर्ट: अयोध्या पर हिंदू-मुस्लिम मिलकर निकालें रास्ता, बातचीत फेल तो हम हैं

कैच ब्यूरो | Updated on: 21 March 2017, 12:26 IST
(फाइल फोटो)

सुप्रीम कोर्ट ने अयोध्या मुद्दे पर सुनवाई के दौरान एक अहम टिप्पणी की है. देश की सबसे बड़ी अदालत ने मंगलवार को कहा कि इस मसले का हल हिंदू और मुस्लिम समुदाय को मिल-बैठकर करना चाहिए. अगर दोनों पक्षकारों के बीच बातचीत फेल होती है, तो उसके बाद हम हैं. 

सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में पैरवीकार और बीजेपी नेता सुब्रमण्यम स्वामी को सलाह दी है कि बातचीत के जरिए इस मसले को सुलझाने की कोशिश करें, जिसमें इस मामले को सभी पक्षकारों की राय लेकर हल निकाला जाए. अदालत ने साथ ही कहा कि अगर बातचीत फेल हो जाती है तो सुप्रीम कोर्ट मामले में दखल देने के लिए है. ऐसे में अदालत विवाद का निपटारा करने के लिए एक मध्यस्थ की नियुक्ति करेगा. 

स्वामी: हम समझौते को तैयार

दरअसल इस मामले में हिंदू पक्ष के पैरवीकार सुब्रमण्यम स्वामी ने 31 मार्च या उससे पहले सुनवाई की अपील की थी. स्वामी ने इस मामले को संवेदनशील बताते हुए तत्काल सुनवाई की मांग की थी.

सुप्रीम कोर्ट की टिप्पणी पर स्वामी ने कहा, "हम समझौता करने के लिए तैयार हैं. राम जहां पैदा हुए उसको बदल नहीं सकते. मस्जिद को कहीं भी बना सकते हैं. अदालत के रचनात्मक सुझाव को मुस्लिम समुदाय माने तोे अच्छा होगा. जरूरत हुई तो सुप्रीम कोर्ट के जज मध्यस्थता को तैयार हैं." 

स्वामी ने कहा कि सरयू नदी के उस पार मस्जिद बना दी जाए, तो उनको कोई आपत्ति नहीं है. लेकिन हिंदुओं की मान्यता के मुताबिक राम मंदिर अयोध्या में जन्मभूमि स्थल पर ही बनना चाहिए.

अयोध्या विवाद अब तक

दरअसल अयोध्या में 6 दिसंबर 1992 को 16वीं सदी (1528 ईसवी) से स्थापित बाबरी मस्जिद को तोड़ दिया गया था. 1885 में पहली बार यह मामला अदालत में पहुंचा. महंत रघुबर दास ने उस वक्त फैजाबाद कोर्ट में राम मंदिर के निर्माण की इजाजत के लिए अपील दायर की. इस मामले में हिंदू और मुस्लिम पक्ष के बीच तभी से मुकदमा चल रहा है.

इस मामले में इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ बेंच ने विवादित स्थल के दो तिहाई हिस्से को हिंदू समुदाय के पक्ष में देने का फैसला सुनाया था. 30 सितंबर 2010 को अपने फैसले में हाई कोर्ट ने विवादित जमीन को तीन हिस्सों में बांटा जिसमें एक हिस्सा राम मंदिर, दूसरा सुन्नी वक्फ बोर्ड और तीसरा हिस्सा निर्मोही अखाड़े को देने का आदेश दिया.

हालांकि 9 मई 2011 को सुप्रीम कोर्ट ने इलाहाबाद हाई कोर्ट के फैसले पर रोक लगा दी. बाबरी मामले के सबसे उम्रदराज वादी हाशिम अंसारी का पिछले साल 20 जुलाई को निधन हो गया था. वे 1949 से मुकदमे की पैरवी कर रहे थे. 

इस बीच सुब्रमण्यम स्वामी ने ट्वीट करते हुए कहा कि यूपी के सीएम योगी आदित्यनाथ से उनकी संसद में मुलाकात हुई. इस दौरान उन्हें सुप्रीम कोर्ट के आज के निर्देश के बारे में बताया गया. हम लखनऊ में फिर मिलेंगे.

First published: 21 March 2017, 11:28 IST
 
पिछली कहानी
अगली कहानी