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अयोध्या के संतों की अपील- दान की भूमि पर बाबर के नाम की मस्जिद न बनाएं मुस्लिम समाज के लोग

कैच ब्यूरो | Updated on: 30 July 2020, 9:03 IST

Ayodhya: अयोध्या में राम मंदिर शिलान्यास की तैयारियां जोरो-शोरों से चल रही है. दूसरी तरफ सुप्रीम कोर्ट के फैसले के अनुसार, अयोध्या के धन्नीपुर गांव, रौनाही में मिली जमीन को लेकर सुन्नी सेंट्रल वक्फ बोर्ड ने ट्रस्ट का ऐलान कर दिया है. ट्रस्ट के तहत ही इस जमीन पर मस्जिद का निर्माण किया जाएगा.

सुन्नी सेंट्रल वक्फ बोर्ड के चेयरमैन जुफर अहमद फारुकी ने जानकारी दी कि  इस ट्रस्ट का नाम 'इंडो इस्लामिक कल्चरल फाउंडेशन' रखा गया है. अयोध्या में राम मंदिर और बाबरी मस्जिद विवाद बरसों से कोर्ट में रहा. इसका जब फैसला आया तो कोर्ट ने मुख्य जगह रामलला को दी, जबकि 5 एकड़ जमीन मुस्लिम समाज को दी गई. 

5 अगस्त को देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी राम मंदिर का शिलान्यास करेंगे. दूसरी तरफ सुन्नी सेंट्रल वक्फ बोर्ड मिली जमीन पर मस्जिद निर्माण की प्रक्रिया भी शुरू करने जा रहा है. वहीं साधु-संतों का कहना है कि मुस्लिम समाज के लोग बाबर के नाम पर मस्जिद का निर्माण न करें. तपस्वी छावनी के महंत परमहंस दास ने कहा कि दान की भूमि पर बाबर के नाम की मस्जिद नहीं बन सकती.

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उन्होंने कहा कि बाबर के नाम पर बनी मस्जिद में की गई इबादत कबूल नहीं होगी. उन्होंने राय दी कि मुस्लिम समाज को वह जमीन मिली है, उन्हें अपने मर्जी के हिसाब से वहां निर्माण कार्य कराने का अधिकार है. चाहे वह मस्जिद बनाएं या कुछ और लेकिन यदि वह वहां पर अस्पताल और विद्यालय खोलते हैं तो सबसे पहले सवा लाख रुपए का डोनेशन देंगे.

इसके आगे उन्होंने कहा कि मुस्लिम साथी यदि स्कूल-कॉलेज बनाते हैं तो उस पर अयोध्या का संत समाज भी सहयोग करेगा. अयोध्या के संत मुस्लिम समाज के द्वारा मस्जिद निर्माण के निर्णय को भी गलत नहीं मानते हैं. उन्होंने कहा कि जो जमीन उनको दी गई है उस पर वह चाहे जो बनवाएं. राम जन्म भूमि के मुख्य पुजारी आचार्य सत्येंद्र दास ने भी कहा कि उनका जो मन करे वह बनवाएं, लेकिन बाबर के नाम पर मस्जिद का निर्माण नहीं हो सकता.

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First published: 30 July 2020, 9:00 IST
 
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