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10 जून को अयोध्या में आयोजन चुनाव को राम मंदिर की पिच पर ले जाने का आयोजन है

अनूप कुमार | Updated on: 2 June 2016, 23:27 IST
QUICK PILL
  • देश के प्रमुख संतों में शुमार श्री राम जन्मभूमि न्यास के अध्यक्ष और मणि रामदास जी छावनी के महंत नृत्य गोपाल दास के 78वें जन्मदिवस महोत्सव में शामिल होने के लिए न सिर्फ केंद्र सरकार के दर्जन भर मंत्रियों को आमंत्रण पत्र भेजा गया है बल्कि तीन राज्यों के राज्यपाल और देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को भी इस बड़े आयोजन में शामिल होने के लिए निमंत्रित किया गया है.
  • संतो के इस आयोजन में विश्व हिंदू परिषद भी बढ़ चढ़कर हिस्सा ले रही है और जानकार बताते हैं कि इस पूरे आयोजन की सूत्रधार ही विहिप है. लेकिन वह परदे के पीछे है. विश्व हिन्दू परिषद की भूमिका आयोजन समिति के रूप में है. हालांकि आधिकारिक तौर पर विहिप के नेता इस दावे से इनकार कर रहे हैं.

मंदिर-मस्जिद के विवाद ने अयोध्या को पूरी दुनिया में चर्चा दिलाई है. उत्तर प्रदेश में अगले साल होने वाले विधानसभा चुनाव से पहले एक बार इसी विवाद को हवा देकर सियासी फलक पर चमकने की कोशिश यहां देखने को मिल रही है.

अयोध्या स्थित श्री राम जन्मभूमि न्यास के अध्यक्ष महंत नृत्य गोपाल दास का जन्मदिवस 10 जून को हैै. इसे मनाने की तैयारियां बेहद व्यापक हैं. आठ दिनों तक जन्मोत्सव के कार्यक्रम अयोध्या में आयोजित होंगे. गौरतलब है कि श्री राम जन्मभूमि न्यास ही विवादित स्थल पर राम मंदिर के निर्माण का आंदोलन चला रही है.

इतने व्यापक कार्यक्रम के आयोजन के पीछे विहिप, बजरंग दल और संघ की पूरी हिस्सेदारी है. आठ दिवसीय समारोह में शामिल होने के लिए केंद्र सरकार के दर्जन भर मंत्रियों और सांसदों के साथ मप्र के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान, राजस्थान के राज्यपाल कल्याण सिंह और उत्तर प्रदेश के राज्यपाल राम नाइक भी इस कार्यक्रम में शिरकत करेंगे.

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विहाप का कहना है कि इस बड़े आयोजन में देश के सभी बड़े संतो को भी आमंत्रित किया गया है

जाहिर है इतने बड़े पैमाने पर संघ और भाजपा से ताल्लुक रखने वाली हस्तियों के हिस्सा लेने के राजनीतिक निहितार्थ भी होंगे. विशेषकर चुनावी साल को देखते हुए ये अटकलें लगाई जा रही हैं कि इस व्यापक आयोजन के पीछे संघ और विहिप की योजना एक बार फिर से मंदिर के मुद्दे पर हिंदुओं को ध्रवीकृत करने की है.

विहाप का कहना है कि इस बड़े आयोजन में देश के सभी बड़े संतो को भी आमंत्रित किया गया है. यह पूरा आयोजन महंत नृत्य गोपाल दास के आश्रम में आयोजित होगा. 

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जिस व्यापक पैमाने पर इस आयोजन को भव्यता देने के प्रयास किये जा रहे है उससे कहीं न कहीं ये जाहिर हो रहा है कि संघ के संगठन और विहिप इसके जरिये आगामी विधानसभा चुनाव में साधू-संतो को भाजपा के पक्ष में उतारने की रणनीति पर काम कर रहे हैं.

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भी हैं आमंत्रित

देश के प्रमुख संतों में शुमार श्री राम जन्मभूमि न्यास के अध्यक्ष और मणि रामदास जी छावनी के महंत नृत्य गोपाल दास के 78वें जन्मदिवस महोत्सव में शामिल होने के लिए न सिर्फ केंद्र सरकार के दर्जन भर मंत्रियों को आमंत्रण पत्र भेजा गया है बल्कि तीन राज्यों के राज्यपाल और देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को भी इस बड़े आयोजन में शामिल होने के लिए निमंत्रित किया गया है.

इससे पहले महंत नृत्य गोपालदास के 75वें जन्मदिवस के मौके पर भी इसी तरह का पट्टाभिषेक महोत्सव का आयोजन किया गया था. दिलचस्प बात यह है कि तब भी यानी 2014 में देश में लोकसभा चुनाव होने वाले थे.

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78वें साल में होने वाले इस भव्य आयोजन को लेकर विहिप और संघ की छिपी मंशा इसलिए भी प्रतीत होती है क्योंकि 78 साल का कोई धार्मिक या ज्योतिषीय महत्व भारतीय संस्कृति में नहीं है.

75वें वर्ष के आयोजन के समय भी तमाम वरिष्ठ संतों और राजनेताओं ने हिस्सा लिया था. तीन वर्ष बाद एक बार फिर आठ दिन के इस वृहद आयोजन के जरिये साधू-संत, भाजपा और विहिप जैसे हिंदूवादी संगठनों के नेता आने वाले चुनाव का एजेंडा तय करेंगे ताकि मिशन यूपी को कामयाब किया जा सके.

हिस्सा लेने वाले केंद्रीय मंत्री

आयोजन समिति ने इस आयोजन में शामिल होने वाले बड़े नेताओं के नामों की जो सूची जारी की है. इसमें राजस्थान के राज्यपाल कल्याण सिंह, पश्चिम बंगाल के राज्यपाल केसरी नाथ त्रिपाठी, उत्तर प्रदेश के राज्यपाल राम नाईक, मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान, भारतीय जनता पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह, केंद्रीय गृहमंत्री राजनाथ सिंह, नितिन गडकरी, सुषमा स्वराज, स्मृति ईरानी, उमा भारती, रविशंकर प्रसाद, महेश शर्मा, साध्वी निरंजन ज्योति, धर्मेंद्र प्रधान, कलराज मिश्र के अलावा उत्तर प्रदेश भाजपा अध्यक्ष केशव प्रसाद मौर्य सहित भारतीय जनता पार्टी के उत्तर प्रदेश इकाई के लगभग सभी प्रमुख नेता आमंत्रित किए गए हैं.

संतो की सूची

महंत गोपालदास के 78 में जन्म दिवस आयोजन में शामिल होने वाले देश के प्रमुख संतों में शंकराचार्य स्वामी वासुदेवानंद, जगद्गुरु रामानंदाचार्य रामभद्राचार्य, जगद्गुरु रामानंदाचार्य स्वामी, स्वामी चिन्मयानंद महाराज, आदित्यनाथ, अकाड़ा परिषद के अध्यक्ष नरेंद्र गिरिजी सहित करीब दर्जनभर अन्य वरिष्ठ संतों को आमंत्रित किया गया है.

विहिप और संघ की सूची

संतो के इस आयोजन में विश्व हिंदू परिषद भी बढ़ चढ़कर हिस्सा ले रही है और जानकार बताते हैं कि इस पूरे आयोजन की सूत्रधार ही विहिप है. लेकिन वह परदे के पीछे है. विश्व हिन्दू परिषद की भूमिका आयोजन समिति के रूप में है. हालांकि आधिकारिक तौर पर विहिप के नेता इस दावे से इनकार कर रहे हैं.

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इस आयोजन में विश्व हिंदू परिषद के कार्याध्यक्ष डॉ प्रवीण तोगड़िया, विहिप के अंतरराष्ट्रीय महामंत्री चंपत राय, विहिप के क्षेत्रीय संगठन मंत्री अंबरीश सिंह सहित बड़ी संख्या में संघ के अन्य नेताओं को इस आयोजन में शामिल होने का निमंत्रण गया है.

जन्मोत्सव की आड़ में तैयार होगा 2017 का मास्टर प्लान

आपको बता दें की धार्मिक नगरी अयोध्या के मणिराम दास छावनी में 10 जून से शुरू होने वाले इस पूरे आयोजन का मकसद महंत नृत्य गोपालदास का जन्मोत्सव मनाना है लेकिन जिस तरह से इस पूरे आयोजन में भारतीय जनता पार्टी के बड़े नेताओं और केंद्र सरकार के दर्जनभर मंत्रियों और विहिप के नेताओं को न्योता भेजा गया है उससे कहीं न कहीं यह जाहिर हो रहा है कि आने वाले 2017 के विधानसभा चुनाव से पहले भारतीय जनता पार्टी इस आयोजन के जरिए अपनी चुनावी रणनीति को धार देने जा रही है.

आज जहां भाजपा है वहां पहुंचने में सबसे बड़ी भूमिका ही आयोध्या के मंदिर-मस्जिद विवाद की है

अयोध्या में होने वाली संतो की इस बड़ी बैठक में अयोध्या में विवादित स्थल पर राम मंदिर के निर्माण को लेकर भी चर्चा की संभावना है. इसकी बड़ी वजह यही है की इस आयोजन में वो सभी बड़े संत शामिल हो रहे है जिनका नाम राम मंदिर आन्दोलन से लगातार जुड़ा रहा है.

संतों की इस बड़ी बैठक में अयोध्या में मंदिर निर्माण के मुद्दे पर चर्चा की संभावना को देखते हुए राज्य सरकार भी सतर्क हो गई है. स्थानीय पुलिस के मुताबिक पूरे आयोजन पर स्थानीय खुफिया इकाई के जरिए सरकार कड़ी निगरानी रख रही है.

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2017 के लिहाज से देखें तो प्रदेश में कानून व्यवस्था, किसानों के मुद्दे के अलावा अयोध्या में राम मंदिर निर्माण का निर्माण एक ऐसा मुद्दा रहा है जिससे भाजपा का करीबी नाता रहा है. या कहें की आज जहां भाजपा है वहां पहुंचने में सबसे बड़ी भूमिका ही आयोध्या के मंदिर-मस्जिद विवाद की है.

हालांकि भाजपा के नेता अयोध्या में मंदिर निर्माण मुद्दे को सियासी मुद्दा नहीं मानते लेकिन हर चुनावी जनसभा में अगर बात अयोध्या में मंदिर निर्माण की आती है तो इस मुद्दे पर अपनी दिल की बात कहने से नहीं चूकते. इससे स्पष्ट है कि भाजपा यूपी में खुद को राम के नाम से अलग नहीं कर पा रही है.

आयोजन को लेकर विपक्ष के सियासी दलों ने कसा किनारा

संतों के आयोजन के नाम पर हो रहे इस राजनीतिक जमावड़े पर भी तक दूसरे राजनीतिकदलों ने चुप्पी साध रखी है. इसकी सबसे बड़ी वजह यही है कि जनसंख्या के आधार पर अयोध्या विधानसभा में साधू संतो की आबादी बहुत बड़ी है और कोई भी इन पर टिप्पणी कर उनकी नाराजगी मोल नहीं लेना चाहता.

इस समय अयोध्या से विधायक तेजनारायण पांडेय समाजवादी पार्टी के हैं. पार्टी कोई भी हो अयोध्या में हर चुनाव में हर नेता इन संतो के चरणों में सिर झुकाकर आगे बढ़ते हैं.

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भले ही साधू संतो को धर्म के नाम पर भाजपा और विहिप का समर्थक माना जाता हो लेकिन स्थानीय मुद्दों को लेकर अक्सर अयोध्या के संत अक्सर बंट जाते हैं. अभी भाजपा और विहिप के खुलकर सामने न आने के कारण कोई भी स्थानीय नेता इस आयोजन के बारे में खुलकर कुछ नही बोल रहा है

First published: 2 June 2016, 23:27 IST
 
अनूप कुमार @catchhindi

संवाददाता, पत्रिका, उत्तर प्रदेश

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