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अयोध्या केस: 1990 से राम मंदिर के पत्थर तराश रहा था ये शख्स, फैसले से पहले हो गई मौत

कैच ब्यूरो | Updated on: 9 November 2019, 16:27 IST

अयोध्या मामले पर सुप्रीम कोर्ट ने आज एक ऐतिहासिक फैसला दिया है. सुप्रीम कोर्ट ने विवादित जमीन को रामजन्मभूमि न्यास को सौंपने का फैसला सुनाया है. इसके अलावा मुस्लिम पक्ष को अयोध्या में ही 5 एकड़ जमीन मस्जिद बनाने के लिए देने का फैसला किया गया है. इस फैसले पर करोड़ों देशवासियों की कई सालों से निगाहें थीं.

अयोध्या में राम मंदिर आंदोलन की शुरूआत के बाद एक शख्स इस आस में 1990 से हजारों टन पत्थरों को अपने हुनर से तराश रहा था. उस शख्स को उम्मीद थी कि एक दिन राम मंदिर का फैसला आएगा और जब मंदिर बनेगा तो ये पत्थर उसमें इस्तेमाल होंगे.

हालांकि जब आज अयोध्या का ऐतिहासिक फैसला आया तो वह शख्स इस दुनिया में ही नहीं है और दुनिया छोड़कर जा चुका है. अयोध्या के कारसेवकपुरम स्थित राम मंदिर निर्माण कार्यशाला में पिछले कई सालों से पत्थर तराश रहे इस शख्स की दो महीने पहले मौत हो चुकी है. इन मुख्य मूर्तिकार का नाम रजनीकांत है.

इसके बाद से पत्थर तराशने का काम पूरी तरह से थमा हुआ है. काम ठप होने पर विश्व हिंदू परिषद् के प्रवक्ता ने कहा, " सितंबर 1990 से ही कार्यशाला में लगातार पत्थर तराशने का काम चल रहा था. अब तक 65 फ़ीसदी काम भी पूरा हो चूका है. लेकिन दो महीने पहले मुख्य मूर्तिकार रजनीकांत की मौत हो गई. तभी से काम रुका हुआ है."

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First published: 9 November 2019, 16:10 IST
 
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