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अयोध्या केस: एक जज ने हिंदू मत के पक्ष में फैसला देने पर तुलसीदास का दिया हवाला

कैच ब्यूरो | Updated on: 10 November 2019, 10:10 IST

भारतीय इतिहास का सबसे महत्वपूर्ण फैसला सुनाते हुए सुप्रीम कोर्ट ने अयोध्या में विवादित 2.77 एकड़ भूमि रामजन्मभूमि न्यास को दे दिया. इसके साथ ही भगवान राम के भव्य मंदिर के निर्माण का रास्ता साफ हो गया. इसके साथ ही मुस्लिमों को मस्जिद बनाने के लिए अयोध्या में ही पांच एकड़ जमीन देने का आदेश दिया.

अयोध्या मामले की सुनवाई सुप्रीम कोर्ट के सीजेआई समेत पांच जजों की पीठ ने किया. इस पीठ के एक जज ने भगवान राम के जन्म पर अलग ही दृष्टिकोण दिया है. फैसले में हालांकि उन जज का नाम नहीं दिया गया, लेकिन उनके विचार को परिशिष्ट के तौर पर जोड़ दिया गया.

इन जज ने अपना दृष्टिकोण देते हुए कहा कि सिख धर्म के संस्थापक गुरु नानक देवजी का सन् 1510-11 में भगवान राम के जन्मस्थान के दर्शन करने के लिए वहां जाना हिंदुओं के मत और विश्वास को बल देता है. इसलिए इन जज ने माना कि हिंदुओं का मत महत्वपूर्ण है.

 

सुप्रीम कोर्ट ने पाया कि राम जन्मभूमि की सही जगह की पहचान के लिए कुछ नहीं था, लेकिन गुरु नानक देवजी के अयोध्या यात्रा के सबूत हैं. इससे पता चलते है कि साल 1528 से पहले भी श्रद्धालु अयोध्या में भगवान राम की जन्मभूमि के दर्शन के लिए जाते थे. 'जन्म सखीज' को अयोध्या मुद्दे पर रिकॉर्ड के तौर पर लिया गया. बता दें कि जन्म सखीज को गुरु नानक देव जी की जीवनी होने का दावा किया जाता है.

इसके अलावा उन जज ने कहा कि हिंदुओं में भगवान राम की जन्मभूमि के स्थान की मान्यता धार्मिक कलाकृतियों और रामायण तथा स्कंद पुराण समेत पवित्र पुस्तकों से बनी. जज ने निष्कर्ष निकाला कि सन् 1528 से पहले के समय में पर्याप्त धार्मिक लेख थे. इस कारण हिंदू वर्तमान राम जन्मभूमि को भगवान राम का जन्मस्थान मानते हैं.

उन जज ने तुलसीदास का भी उल्लेख किया. तुलसीदास ने भगवान विष्णु के लिए चौपाइयां लिखीं. इसमें कहा गया कि ब्रह्मा जी ने जब भगवान विष्णु से देवताओं, संतों, गंधर्वो और धरती को रावण के अत्याचारों से मुक्ति दिलाने का आग्रह किया, तो भगवान विष्णु ने कहा "मैं मानव रूप में कौशलपुरी में राजा दशरथ और कौशल्या के घर जन्म लूंगा."

जज ने कहा, "चौपाइयों में ना सिर्फ विष्णु के अवधपुरी या अयोध्या में मानव रूप में जन्म लेने का वर्णन है, बल्कि इनमें इसका भी विशेष उल्लेख किया गया है कि वे दशरथ और कौशल्या के घर में मानव रूप में जन्म लेंगे."

सुप्रीम कोर्ट ने अपने आदेश में कहा, "उपरोक्त कारणों और निर्देशों के आधार पर आदेश लिखते समय पीठ के एक सदस्य ने अलग राय रखी कि विवादित स्थल हिंदुओं के मतों और विश्वास के आधार पर भगवान राम का जन्मस्थान है. संबद्ध जज के कारणों को अतिरिक्त परिशिष्ट के तौर पर जोड़ दिया गया."

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First published: 10 November 2019, 10:10 IST
 
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