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सुन्नी बक्फ बोर्ड को अयोध्या में दी जाये 5 एकड़ जमीन- सुप्रीम कोर्ट

कैच ब्यूरो | Updated on: 9 November 2019, 11:36 IST

अयोध्या विवाद पर आज सुप्रीम कोर्ट अपना फैसला सुना रही है. अपना फैसला सुनाते हुए सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि जहां मस्जिद बनी थी वह संरचना थी जो प्रकृति में इस्लामी नहीं थी. खंडपीठ ने कहा है कि बरामद की गई गैर-इस्लामिक प्रकृति की एक अलग प्रकृति है. सुप्रीम कोर्ट ने एएसआई के आधार पर कहा कि मस्जिद खाली जमीन पर नहीं बनी थी. सुप्रीम कोर्ट का कहना है कि मुस्लिम पक्ष विवादित संपत्ति पर अपना अधिकार साबित करने में असमर्थ रहा है.

सुप्रीम कोर्ट का कहना है कि मुस्लिम पक्ष विवादित संपत्ति पर अपना अधिकार साबित करने में असमर्थ रहा है. सीजेआई रंजन गोगोई ने कहा भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (ASI) संदेह से परे है और इसके अध्ययन को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता. फैसला पढ़ते हुए सीजेआई ने कहा कि बाबरी मस्जिद को मीर तकी ने बनाया था. कोर्ट धर्मशास्त्र में पड़े यह उचित नहीं. प्लेसेज ऑफ वर्शिप ऐक्ट सभी धार्मिक समूहों के हितों की रक्षा के लिए भारत की प्रतिबद्धता को बताता है.

 

सुप्रीम कोर्ट की संविधान पीठ ने कहा है कि मुसलमानों को मस्जिद का नुकसान करने के लिए भूमि का एक वैकल्पिक टुकड़ा दिया जाना चाहिए. सुप्रीम कोर्ट का आदेश है कि 3-4 महीने के भीतर सेंट्रल गवर्नमेंट ट्रस्ट की स्थापना के लिए योजना तैयार करे और विवादित स्थल को मंदिर के निर्माण के लिए सौंप दे और अयोध्या में 5 एकड़ जमीन का एक उपयुक्त वैकल्पिक भूखंड सुन्नी को दिया जाएगा. 

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सुप्रीम कोर्ट ने विवादित अयोध्या भूमि को रामजन्मभूमि ट्रस्ट को दे दिया है और आदेश दिया है कि भूमि का एक वैकल्पिक हिस्सा जो अयोध्या में उपयुक्त और प्रमुख स्थान पर हो, मुसलमानों को मस्जिद बनाने के लिए दिया जाए. पांच न्यायाधीशों वाली बेंच द्वारा सर्वसम्मति से दिए गए फैसले को आज सुबह भारत के मुख्य न्यायाधीश रंजन गोगोई ने पढ़ा.

First published: 9 November 2019, 11:08 IST
 
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