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Ayodhya Verdict: रामजन्मभूमि न्यास को सुप्रीम कोर्ट ने क्यों दी जमीन

कैच ब्यूरो | Updated on: 9 November 2019, 15:53 IST

सुप्रीम कोर्ट ने विवादित बाबरी मस्जिद जमीन को राम जन्म भूमि न्यास को सौंप दिया जाये. जबकि मुस्लिम पक्ष को मस्जिद निर्माण के लिए 5 एकड़ जमीन दी जाये. फैसला सुनाते हुए सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि हिंदुओं ने राम चबूतरा और धार्मिक महत्व की अन्य वस्तुओं को स्पष्ट रूप से स्थापित किया है. अदालत ने कहा कि हिंदू गवाहों के अनुसार हिंदू मस्जिद के अंदर रखे कसौटी पत्थर के स्तंभों की पूजा करते थे.

अदालत ने कहा मुस्लिम गवाहों ने मस्जिद के अंदर और बाहर दोनों जगह हिंदू धार्मिक महत्व के प्रतीकों की उपस्थिति को स्वीकार किया है. सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि आर्कियोलॉजिकल सर्वे के अनुसार विवादित ढांचे के नीचे किसी इस्लामिक ईमारत के सबूत नहीं मिले हैं. साथ ही कहा कि बाबरी मस्जिद खाली जमीन पर नहीं बनी थी.

 

सुप्रीम कोर्ट ने यह भी माना कि तीन-गुंबददार संरचना में प्रवेश केवल हिंदू भक्तों के नियंत्रण में थी, जो बाहरी आंगन के पूर्वी और उत्तरी किनारों पर दो दरवाजों के माध्यम से पहुंच प्राप्त करने के लिए संभव थी. इन निष्कर्षों के आधार पर अदालत ने कहा कि संभावनाओं के संतुलन पर स्पष्ट सबूत है कि बाहरी आंगन में हिंदुओं द्वारा एक ग्रिल-ईंट की दीवार की स्थापना के बावजूद 1857 में पूजा जारी थी.

सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि इस बात के सबूत हैं कि अंग्रेजों के आने से पहले हिंदू राम चबूतरा, सीता रसोई की पूजा करते थे. अदालत ने कहा कि मुसलमानों ने यह साबित करने के लिए कोई सबूत नहीं दिया है कि वे सोलहवीं शताब्दी में निर्माण की तारीख से 1857 से पहले की आंतरिक संरचना उनके कब्जे में थी.

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First published: 9 November 2019, 15:46 IST
 
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