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ये ढाई करोड़ नए दलित चाहें तो BJP को अर्श से फर्श पर भी ला सकते हैं

सुनील रावत | Updated on: 14 April 2018, 11:59 IST

दलितों के प्रतीक भीम राव अंबेडकर की 127वीं जयंती मानाने की शुरूआत तमाम राजनीतिक दल कर चुके हैं. इसी बहाने राजनीतिक दल 2019 के आम चुनावों के लिए दलित समुदाय को लुभाने के लिए अपनी रणनीतियों में भी व्यस्त हैं. दलितों का हिस्सा भारत की आबादी का लगभग पांचवां हिस्सा है.
जानकारों की मानते हैं कि आगामी 2019 के लिए राजनीतिक दलों की नई रणनीति नए दलित मतदाताओं को लुभाना है, जिनकी संख्या 2 करोड़ 30 है. ये सभी नए मतदाता 2019 में 18 वर्ष के हो जायेंगे और मतदान करने योग्य होंगे.

दलित मतदाताओं की संख्या 19 फीसदी 

भारत में पहली बार संसदीय चुनावों में दलित वोटों का राष्ट्रीय स्तर 19 प्रतिशत है. बिहार, उत्तर प्रदेश, राजस्थान और मध्य प्रदेश (काव-बेल्ट राज्यों में) में दलितों के लगभग एक-चौथाई दलितों के वोट हैं. यही कारण है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी राष्ट्रीय राजधानी में अलिपुर रोड पर अम्बेडकर स्मारक के उद्घाटन करने के लिए तैयार हैं. उनकी पार्टी उम्मीद कर रही है किसी तरह नए दलित युवा मानसिकता को किसी तरह बीते दिनों की घटनाओं से इतर किसी तरह प्रभावित किया जा सके.

नए दलित मतदाताओं की मानसिकता 

गौर करें तो इन नए दलित मतदाताओं में से कम से कम 90 प्रतिशत साक्षर हैं, जो अपने माता-पिता की तुलना में भारतीय अर्थव्यवस्था की अपेक्षाओं से अधिक वाकिफ है. 132 मिलियन में से लगभग 18 प्रतिशत नए दलित 2019 में पहली बार अपना वोट देने के योग्य होंगे.

इस नए दलित मतदाताओं में उनकी पिछली पीढ़ियों से क्या भिन्नता है. क्या नौकरी के लिए आरक्षण पर उनकी निर्भरता कम होगी. आंकड़ों की माने तो सार्वजनिक क्षेत्र के उद्यमों की नौकरियों ने 2009 के बाद से 24 प्रतिशत की गिरावट आई है, जिसका मतलब है कि आरक्षित नौकरियों में भी गिरावट आई है.

यूपी में सबसे ज्यादा दलित मतदाता 

नए दलित वोटों का लगभग एक चौथाई भाग उत्तर प्रदेश में उपस्थित है. जहां देश में दलितों की संख्या सबसे अधिक है. हालांकि पंजाब की कुल आबादी में दलितों का अनुपात सबसे ज्यादा है. यहां लगभग 10 लाख दलित पहली बार वोट देने के योग्य हो जाएंगे. जबकि लगभग 40 लाख से ज्यादा दलित जो सभी नए दलितों के 18 प्रतिशत हैं, तमिलनाडु, केरल, आंध्र प्रदेश और कर्नाटक में मतदान करेंगे.

कर्नाटक में बीजेपी दलितों के आसरे  

कर्नाटक एकमात्र दक्षिणी राज्य है जहां बीजेपी ने ताकत लगा दी है. एक लाख से अधिक नए दलित 2019 के संसदीय चुनावों में यहां वोट देंगे. जबकि गुजरात और महाराष्ट्र में जहां भाजपा की सरकारें है, यहां दलित मतदाताओं की संख्या में गिरावट आयी है. यहां 18 लाख नए दलित पहली बार अपने मताधिकार का प्रयोग करेंगे. राजस्थान में जहां वसुंधरा राजे की अगुवाई वाली भाजपा सरकार के तहत जाति और सांप्रदायिक तनाव पैदा हुए हैं, यहां नए दलित मतदाता लगभग 18 लाख तक बढे हैं.

First published: 14 April 2018, 11:47 IST
 
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