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देश के पहले मान्यता प्राप्त वैदिक बोर्ड की कमान आखिर कैसे आयी पतंजलि के हाथ ?

कैच ब्यूरो | Updated on: 25 February 2019, 16:24 IST

योग गुरु रामदेव वैदिक शिक्षा के लिए भारत के पहले सरकारी मान्यता प्राप्त बोर्ड का नेतृत्व करने के लिए तैयार हैं. शनिवार को एक चयन समिति ने प्रस्तावित भारतीय शिक्षा बोर्ड (BSB) के लिए पतंजलि की बोली कोसर्वश्रेष्ठ घोषित किया. इस सप्ताह के अंत में मानव संसाधन विकास मंत्री प्रकाश जावड़ेकर की अध्यक्षता में महर्षि सांदीपनि राष्ट्रीय वेदविद्या प्रतिष्ठान (MSRVP) की गवर्निंग काउंसिल द्वारा पांच-सदस्यीय पैनल की सिफारिश पर विचार किया जाएगा.

MSRVP, "वेद विद्या" के प्रचार पर काम कर रहे मानव संसाधन विकास मंत्रालय के तहत एक पूरी तरह से वित्त पोषित स्वायत्त निकाय है. इसके अन्य दावेदारों में शामिल हैं द रितानंद बाल्वेड एजुकेशन फाउंडेशन शामिल है जो एमिटी समूह द्वारा चलाया जाता है.इसके अलावा पुणे स्थित महाराष्ट्र प्रौद्योगिकी संस्थान इसके अन्य अन्य दावेदारों में शामिल था.

आचार्य बालकृष्ण ने दिया 21 करोड़ का ऑफर  

बिजनेस स्टैंडर्ड की रिपोर्ट के अनुसार तीनों दावेदारों ने पहले पांच सदस्यीय चयन समिति के सामने एक प्रस्तुति दी थी. इंडियन एक्सप्रेस के अनुसार पतंजलि योगपीठ का प्रतिनिधित्व करने वाले आचार्य बालकृष्ण ने बोर्ड के विकास के लिए 21 करोड़ रुपये का निवेश करने की पेशकश की. उन्होंने कहा कि पतंजलि हरिद्वार में बीएसबी का मुख्यालय बनाना चाहती थी और बोर्ड के लिए ट्रस्ट के पास आवश्यक ढांचा था. बालकृष्ण ने पैनल को यह भी बताया कि ट्रस्ट चाहेगा कि रामदेव को चेयरपर्सन नियुक्त किया जाए.

दिलचस्प बात यह है कि तीन साल पहले, स्मृति ईरानी के अधीन मानव संसाधन विकास मंत्रालय ने वैदिक शिक्षा बोर्ड की स्थापना के लिए रामदेव के प्रस्ताव को अस्वीकार कर दिया था. ईरानी ने एक निजी स्कूल बोर्ड को मान्यता देने वाली सरकार के बारे में आरक्षण व्यक्त किया था. मोदी सरकार ने भारतीय शिक्षा बोर्ड को "भारतीय पारंपरिक ज्ञान" के मानकीकरण को सुनिश्चित करने का प्रस्ताव दिया, जैसे कि वैदिक शिक्षा, संस्कृत शिक्षा, शास्त्र और दर्शन इत्यादि.

बीएसबी का उद्देश्य

बोर्ड पाठ्यक्रम, आचरण परीक्षा, प्रमाणपत्र जारी करेगा और वैदिक और आधुनिक शिक्षा के मिश्रण की पेशकश करने वाले गुरुकुलों, पथशालाओं और स्कूलों को मान्यता देगा. बोर्ड सीबीएसई की तरह ही स्कूलों से संबद्धता शुल्क और परीक्षा शुल्क लेगा. इससे जिन स्कूलों को फायदा होने की संभावना है उनमे- हरिद्वार में रामदेव का आवासीय विद्यालय आचार्यकुलम. विद्या भारती जो स्कूल आरएसएस द्वारा चलाए जाते है, लाभ होने की संभावना है. इससे पहले, सरकार ने केंद्रीय स्तर पर स्थापित होने के लिए एक वैदिक विश्वविद्यालय को सैद्धांतिक मंजूरी दी थी, जिसे पतंजलि द्वारा चलाया जाएगा. एक समाचार एजेंसी के अनुसार, रामदेव ने विश्वविद्यालय के अध्यक्ष बनने का इरादा जताया था और खर्च वहन करने की पेशकश भी की थी.

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First published: 25 February 2019, 16:12 IST
 
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