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बाबरी मस्जिद विवाद: CBI ने सुप्रीम कोर्ट से की आडवाणी-जोशी पर आपराधिक साजिश का मामला चलाने की मांग

कैच ब्यूरो | Updated on: 6 April 2017, 14:36 IST
supreme court

राम मंदिर-बाबरी मस्जिद विवाद पर गुरुवार को सुप्रीम कोर्ट में अहम सुनवाई हुई. कोर्ट में सीबीआई की ओर से पेश वकील नीरज किशन कौल ने मांग की कि सीनियर बीजेपी नेताओं समेत 14 लोगों के खिलाफ आपराधिक साजिश का मामला चलाया जाना चाहिए. वहीं सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि- दो साल में सुनवाई पूरी होने के आदेश देंगे.

दरअसल, कोर्ट को तय करना है कि बीजेपी के सबसे सीनियर लीडर लालकृष्ण आडवाणी, मुरली मनोहर जोशी समेत अन्य आरोपियों के खिलाफ आपराधिक साजिश का मामला चलाया जाए कि नहीं.

कौल ने कोर्ट की डिविजन बेंच से बताया कि इस मामले में दो ट्रायल चल रहे हैं. एक रायबरेली में जबकि दूसरा लखनऊ में. सीबीआई वकील ने कोर्ट को बताया कि लखनऊ ट्रायल कोर्ट में 195 गवाहों के बयान दर्ज हो चुके हैं और करीब 500 और के होने बाकी हैं. वहीं, रायबरेली के अदालत में 57 गवाहों के बयान हो गए हैं, जबकि 100 से ज्यादा के लंबित हैं.

इससे पहले पिछली सुनवाई में सुप्रीम कोर्ट ने कहा था कि महज टेक्नीकल ग्राउंड पर इनको राहत नहीं दी जा सकती और उनके खिलाफ साजिश का ट्रायल चलना चाहिए. साथ ही पूछा था कि बाबरी मस्जिद ढहाए जाने के मामले दो अलग अलग अदालतों में चलने के बजाय मामले की सुनवाई एक जगह क्यों न हो? कोर्ट ने पूछा था कि रायबरेली में चल रहे मामले की सुनवाई को क्यों न लखनऊ ट्रांसफर कर दिया जाये. जहां कारसेवकों से जुड़े एक मामले की सुनवाई पहले से ही चल रही है.

वहीं लालकृष्ण आडवाणी की ओर से इसका विरोध किया गया. कहा गया कि इस मामले में 183 गवाहों को फिर से बुलाना पड़ेगा जो काफी मुश्किल है. कोर्ट को साजिश के मामले की दोबारा सुनवाई के आदेश नहीं देने चाहिए.

क्या है मामला: बीजेपी नेता एल के आडवाणी, मुरली मनोहर जोशी समेत एक दर्जन नेता जिसमें विनय कटियार और यूपी के पूर्व सीएम कल्याण सिंह का नाम शामिल है उनपर बाबरी मस्जिद विध्वंस मामले में लगे साजिश के आरोपों को रायबरेली की कोर्ट ने हटा दिया था। 2010 में इलाहाबाद हाई कोर्ट ने भी निचली अदालत का फैसला मान लिया था। उसके बाद सीबीआई ने कोर्ट के ऑर्डर के खिलाफ अपील की थी. 

First published: 6 April 2017, 14:36 IST
 
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