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बाबरी मामला: आडवाणी-कल्याण समेत 13 नेताओं पर SC करेगा फ़ैसला

कैच ब्यूरो | Updated on: 19 April 2017, 10:08 IST
(फाइल फोटो)

बाबरी मस्जिद मामले में भाजपा के वरिष्ठ नेता लालकृष्ण आडवाणी और राजस्थान के राज्यपाल कल्याण सिंह समेत 13 नेताओं के लिए आज फ़ैसले की घड़ी है. सुप्रीम कोर्ट आज तय करने वाला है कि छह दिसंबर 1992 को अयोध्या में बाबरी मस्जिद गिराने के मामले में आडवाणी, मुरली मनोहर जोशी और कल्याण सिंह समेत 13 नेताओं पर आपराधिक साजिश के तहत केस चलाया जाए या नहीं.

सुप्रीम कोर्ट ने 7 अप्रैल को अपना फैसला सुरक्षित रख लिया था. इस मामले में जांच एजेंसी सीबीआई ने सुप्रीम कोर्ट में कहा था कि आडवाणी, जोशी, उमा भारती और कल्याण सिंह के खिलाफ आपराधिक साजिश 120 (बी) के तहत मुकदमा चलना चाहिए.

फाइल फोटो

20 मई 2010 को HC ने दी थी राहत

दरअसल इलाहाबाद हाईकोर्ट ने 20 मई 2010 को रायबरेली विशेष अदालत के फैसले की पुष्टि करते हुए आपराधिक साजिश के आरोपों को हटा दिया था. अब सीबीआई ने हाईकोर्ट  के इस आदेश को खारिज करने की गुजारिश की है. 

इस मामले में जिन 13 नेताओं पर सुप्रीम कोर्ट को फैसला देना है, उनमें से दो की मौत हो चुकी है. विश्व हिंदू परिषद के अशोक सिंघल और शिवसेना के बाल ठाकरे का निधन हो चुका है. ऐसे में तकनीकी तौर पर अदालत को 11 नेताओं पर ही फैसला सुनाना है. 

सुप्रीम कोर्ट का फैसला कल्याण सिंह के भविष्य को भी तय करने वाला है. छह दिसंबर 1992 को जब अयोध्या में उग्र कारसेवकों ने बाबरी मस्जिद गिराई थी, उस समय कल्याण यूपी के मुख्यमंत्री थे. अगर फैसला उनके ख़िलाफ जाता है तो उन्हें राज्यपाल की कुर्सी छोड़नी भी पड़ सकती है.

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क्या है पूरा मामला

अयोध्या में 6 दिसंबर 1992 को बाबरी मस्जिद को वीएचपी और बजरंग दल के नेताओं के उकसावे पर गिरा दिया गया था. इस मामले में अलग-अलग एफआईआर में दो अलग चार्जशीट दाखिल की गयी थी.

एक चार्जशीट में 120 बी यानी आपराधिक साजिश से संबंधित धारा नहीं लगायी गई थी. सभी आरोपी बीजेपी नेताओं ने इसी को आधार बनाते हुए इलाहाबाद हाईकोर्ट से राहत हासिल कर ली थी.

सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि लखनऊ और रायबरेली में चल रहे दोनों मामलों को एक साथ सुना जाना चाहिए. लालकृष्ण आडवाणी की तरफ से इसका विरोध करते हुए दलील दी गई कि इस मामले में 183 गवाहों को फिर से बुलाना पड़ेगा जो काफी मुश्किल है.

आडवाणी की तरफ से कहा गया कि कोर्ट को आपराधिक साजिश के मामले की दोबारा सुनवाई के आदेश नहीं देने चाहिए. सीबीआई ने कहा कि वह दोनों मामलों के एक साथ ट्रायल के लिए तैयार है.

बाबरी विध्वंस मामले में आडवाणी के अलावा, यूपी के पूर्व मुख्यमंत्री कल्याण सिंह, मुरली मनोहर जोशी, उमा भारती और भाजपा, विहिप कई नेताओं के खिलाफ आपराधिक साजिश रचने के आरोप हटाए जाने के मामले में सुप्रीम कोर्ट सुनवाई कर रहा है.

सुप्रीम कोर्ट में आडवाणी समेत 13 आरोपियों से साजिश रचने के आरोप हटाए जाने के खिलाफ अपील दायर की गई थी. जिसमें इलाहाबाद हाईकोर्ट के 20 मई 2010 के आदेश को खारिज करने की मांग की गई है. सुप्रीम कोर्ट ने बाबरी केस की सुनवाई में देरी पर भी चिंता जताई थी. मार्च में सुनवाई के दौरान कोर्ट ने कहा कि रायबरेली और लखनऊ में मामलों की अलग-अलग सुनवाई के बजाए एक साथ लखनऊ की विशेष अदालत में ट्रायल चल सकता है. 

First published: 19 April 2017, 9:54 IST
 
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