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सुखबीर बादल के दावे पर राजनीतिक भूचाल

राजीव खन्ना | Updated on: 7 February 2016, 16:47 IST
QUICK PILL
  • पंजाब में नशे के शिकार 0.7 फीसदी आबादी का आंकड़ा देकर उप-मुख्यमंत्री सुखबीर सिंह बादल ने अपनी ही सरकार के पुराने दावे का खंडन कर दिया है जो बताता है कि राज्य में 70 फीसदी युवा नशे की गिरफ्त में है.
  • बादल का कहना है कि पंजाब में नशे के शिकार लोगों की आबादी को बढ़ा-चढ़ाकर पेश किया जा रहा है ताकि राज्य को बदनाम किया जा सके.

पंजाब के उप-मुख्यमंत्री सुखबीर सिंह बादल काल्पनिक झंझावात में उलझे प्रतीत होते हैं. इंडियन एक्सप्रेस की तरफ से आयोजित किए गए एक कार्यक्रम में बातचीत के दौरान बादल ने कहा कि पंजाब की ड्रग्स समस्या को जरूरत से अधिक फैलाया गया है. बादल राज्य के गृह मंत्री भी हैं.

बादल के मुताबिक, 'पंजाब के महज 0.7 फीसदी युवा ही ड्रग्स की लत के शिकार हैं.' उन्होंने अपने दावे को पुष्ट करने के लिए ऑल इंडिया इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंस की स्टडी रिपोर्ट का हवाला दिया.

बादल का कहना है कि साजिश के तहत पंजाब में ड्रग्स की समस्या को आवश्यकता से अधिक उछाला जा रहा है

उन्होंने लोगों को राज्य के खर्चे पर सर्वेक्षण कर सच का पता लगाने के लिए भी आमंत्रित किया. हालांकि बादल का यह दावा उन्हीं की सरकार के आंकड़ों से मेल नहीं खाता है. राज्य सरकार के आंकड़ों के मुताबिक पंजाब में करीब 70 फीसदी नशे की लत के शिकार हैं. ऐसे में बादल के दावे को कल्पना कहना गलत नहीं होगा.

बादल और उनके पिता प्रकाश सिंह बादल 2007 से पंजाब की सत्ता में हैं. उनकी सरकार ने बार-बार जिस आंकड़ें को पेश किया है वह बादल के मौजूदा दावे से कहीं अधिक है. पंजाब सरकार की सामाजिक सुरक्षा विभाग की वेबसाइट के मुताबिक, 'पंजाब में ड्रग्स समस्या के फैलाव को राज्य के विभिन्न इलाकों में किए गए घरों के सर्वेक्षण से जांचा जा सकता है. दोआब क्षेत्र में यह समस्या बेहद गंभीर रूप ले चुकी है जहां करीब 68.6 फीसदी परिवार नशे के आदी हैं. माझा में ऐसी आबादी का प्रतिशत 64.69 है.'

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ड्रग्स के सेवन का पूरे राज्य में एक निश्चित पैटर्न नहीं है. मसलन माझा में जहां अफीम का नशा किया जाता है वहीं दोआब में सिंथेटिक ड्रग्स और दवाइयों का नशा किया जाता है. माझा में जहां सबसे ज्यादा अल्कोहल की खपत है वहीं मालवा में अल्कोहल की खपत 58.10 फीसदी है.

इसके अलावा दिल्ली पॉलिसी ग्रुप की द ड्रग प्रॉब्लम इन पंजाब जैसी रिपोर्ट भी पंजाब में बड़े पैमाने पर ड्रग्स के सेवन की पुष्टि करती है. रिपोर्ट में बादल सरकार के 2009 के हलफनामे के आधार पर कहा गया है कि 10 कॉलेजों में से 7 कॉलेजों के छात्रों को किसी तरह के नशे का आदी पाया गया. इसके अलावा 66 फीसदी स्कूली छात्र और छात्राओं में किसी तरह के नशे की लत पाई गई.

बेतुका दावा

पूर्व डीजीपी शशिकांत शर्मा ने राज्य में पहली बार नेता और ड्रग्स माफिया के गठजोड़ का भंडाफोड़ किया था और उन्होंने यह काम 2007 में किया था. शर्मा ने कैच को बताया, 'उनसे (बादल) से यह पूछा जाना चाहिए कि उन्होंने यह आंकड़ां कहां से और किस सर्वे के आधार पर जारी किया. इस सर्वे का संैंपल साइज क्या था. मैं उन्हें बधाई देना चाहूंगा कि कम से कम उन्होंने इस बात को माना कि राज्य में ड्रग्स सेवन एक समस्या है.'

शशिकांत ने 2007 में राज्य के शीर्ष ड्रग्स तस्करों  की सूची बनाई थी जिसमें कुछ नेताओं के नाम भी शामिल थे. वह उस वक्त खुफिया विभाग का नेतृत्व कर रहे थे. 

राहुल गांधी ने सबसे पहले राज्य में 70 फीसदी युवाओं के नशे का आदी होने का आंकड़ा सामने रखा था

सामाजिक कार्यकर्ता परविंदर सिंह किटना भी बादल के दावे का मजाक उड़ाते हुए कहते हैं, '0.7 फीसदी का आंकड़ा देते वक्त उन्होंने जीरों को दूसरी तरफ लगा दिया. उन्हें अपनी सरकार के हलफनामे पर नजर डालनी चाहिए. सबसे अधिक चौंकाने वाली बात यह है कि सरकार अल्कोहल की खपत को ड्रग्स तस्करी का हिस्सा नहीं मानती है.'

उन्होंने कहा कि यह आंकड़ा बताता है कि बादल सरकार को खुद अपनी एजेंसियों के आंकड़े पर भरोसा नहीं है.

राजनीतिक खेमेबाजी

कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने आम चुनाव के दौरान 70 फीसदी का आंकड़ा रखा था. तब से बादल और उनकी पार्टी लोगों को यह बताने की कोशिश कर रहे हैं कि कांग्रेस राज्य को बदनाम करने की साजिश रच रही है. उन्होंने यह बताने की कोशिश की ड्रग्स समस्या उतनी गंभीर नहीं है जितना बताने की कोशिश की जा रही है.

0.7 फीसदी का आंकड़ा पेश करते हुए बादल ने कहा कि अगर गांधी का बयान सही होता तो पंजाब के लोग देश में सबसे ज्यादा अनाज का उत्पादन नहीं कर रहे होते.

अकाली दल अपने नेता के बयान पर टिकी हुई है. पार्टी नेता दलजीत सिंह चीमा ने कहा, 'यह उन लोगों को जवाब है जो पंजाब को बदनाम करना चाहते हैं. 70 फीसदी युवाओं के नशे का आदी होने का आंकड़ा 600 ड्रग्स के शिकार लोगों के सैंपल पर आधारित है और इसमें 70 फीसदी युवा थे. यह बिना दिमाग लगाए सर्वे किया गया.'

हालांकि कांग्रेस के वरिष्ठ नेता सुनील जाखड़ ने कहा कि सरकार इन दावों के आधार पर महज अपना चेहरा बचाने की कोशिश कर रही है. जाखड़ लगातार विधानसभा में ड्रग्स की समस्या का मामला उठाते रहे हैं.

जाखड़ ने कहा, 'उन्हें बयान देने में सावधानी बरतनी चाहिए. ड्रग्स की बढ़ती लत एक बड़ी समस्या है. हालांकि वह यह नहीं बता सकते कि कैसे इतनी बड़ी संख्या में ड्रग्स सेंटर खुल गए. उनके भीतर इस समस्या से निपटने की इच्छाशक्ति नहीं है.' 

जाखड़ ने कहा कि आम चुनाव के पहले नरेंद्र मोदी के करीबी अमित शाह पंजाब में ड्रग्स सेवन के खिलाफ अमृतसर से एक यात्रा निकालने की योजना बना रहे थे लेकिन चूंकि अकाली और बीजेपी पुराने दोस्त रहे हैं इसलिए उन्होंने इस यात्रा को रद्द कर दिया.

जाखड़ ने कहा, 'खुद प्रधानमंत्री मोदी ने माना था कि एक महिला ने मन की बात में इस मुद्दे को लेकर उनसे संपर्क किया था.'

आम आदमी पार्टी के नेता आर आर भारद्वाज ने कहा कि बादल का यह बयान बताता है कि वह किस कदर ड्रग्स की समस्या से निपटने में लाचार हो चुके हैं. उन्होंने कहा, 'यह बयान लोगों के साथ किया गया मजाक है. वह ड्रग्स की सप्लाई, उसका वितरण और ड्रग्स पीड़ितों को राहत पहुंचाने समेत तीनों मोर्चे पर पूरी तरह से विफल रहे हैं. इस तरह का बयान उनकी हताशा को जाहिर करता है.'

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First published: 7 February 2016, 16:47 IST
 
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