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बालोद का बाल संकट: नाई समाज ने छह महीने लंबा बहिष्कार खत्म किया

सतीश रजक | Updated on: 6 September 2016, 8:12 IST

जिला मुख्यालय से दो किलोमीटर दूर ग्राम हीरापुर में ग्रामीणों व नाई समाज के बीच मार्च से चल रहा विवाद प्रशासनिक पहल के बाद सुलझ गया. इस दौरान अधिकारियों के हस्तक्षेप के बाद समाज के लोगों ने प्रशासन से सहमति जताते हुए ग्रामीणों से माफी मांगी और सहमति पत्र में दोनों पक्षों के प्रमुखों ने हस्ताक्षर किए.

दरअसल यह विवाद छह माह पहले मार्च में शुरू हुआ था. नाई समाज ने गांव में लोगों की हजामत बनाने के बदले ज्यादा पैसे की मांग करनी शुरू कर दी थी. इससे ग्रामीण असमंजस में पड़ गए. ग्रामीणों ने जब हजामत की राशि कम करने की मांग रखी, तो नाई समाज एक हो गया. लोगों को कह दिया गया कि हजामत बनवानी है तो नई कीमतें देनी पड़ेंगी.

इससे विवाद और बढ़ गया. अंत में ग्रामीणों ने बैठक कर फैसला किया कि क्यों न नाइयों को गांव से बहिष्कृत कर दिया जाए. नाइयों का बहिष्कार हुआ तो नाई समाज ने भी जिला स्तर पर बैठक कर फरमान जारी कर दिया कि ग्राम हीरापुर के निवासियों की हजामत कोई नहीं बनाएगा, जो ऐसा करते पाया गया तो उसे आर्थिक रूप से दंडित किया जाएगा.

इससे एक टकराव की स्थिति पैदा हो गई. इधर नाई समाज के फरमान से बढ़ती परेशानी को देखते हुए ग्रामीणों ने थाने में मामले की सूचना दी. वहीं ग्राम प्रमुखों ने पुलिस अधीक्षक और कलक्टर के पास भी बात रखी. इस बीच ग्रामीणों ने नाई समाज के खिलाफ कार्रवाई करने के लिए धरना-प्रदर्शन भी किए.

तब कलक्टर राजेश सिंह राणा ने विवाद को सुलझाने के लिए दोनों समाजों के प्रमुखों व ग्रामीणों से चर्चा की. उसके बाद उनके निर्देश पर एसडीएम हरेश मंडावी, तहसीलदार एआर राणा सहित अन्य अधिकारी गांव पहुंचे और दोनों पक्षों के प्रमुखों को बुलाकर सुलह कराई गई. इस दौरान काफी हंगामे व गहमागहमी के माहौल के बीच देर रात तक सुलह समझौता हुआ.

नाई समाज ने अपने माफीनामे में कहा, 'हमने बहिष्कार कर अच्छा नहीं किया, उन्होंने जिला सेन समाज की ओर से कहा कि हीरापुर के ग्रामीणों को सहयोग नहीं करने का जो फरमान जारी किया गया है उसे वापस लेकर सब सहयोग करेंगे. ग्रामीण स्वेच्छा से जहां पाए वहां हजामत बना सकेंगे. बाहर के नाई भी अगर गांव में आकर काम करते हैं तो हमें और सेन समाज को कोई आपत्ति नहीं होगी.'वहीं ग्रामीणों की ओर से प्रमुख आरआर साहू, उमेन्द्र साहू, शत्रुघ्न साहू ने भी आपसी सहमती दी कि वे नाइयों के साथ मिलकर रहेंगे, किसी का बहिष्कार नहीं करेंगे. सभी के साथ तालमेल बनाकर व्यवहार करेंगे.

अंतिम क्रिया में नाइयों ने नहीं दिया सहयोग तो युवकों ने खुद किया मुंडन

नाई समाज व ग्रामीणों के बीच बहिष्कार को लेकर विवाद करीब तीन महीने से चल रहा था. शनिवार को ग्राम हीरापुर में गांव की एक महिला मूर्ति बाई के निधन का शुद्धि कार्यक्रम था, लेकिन बहिष्कार के कारण कोई भी नाई यहां साहू समाज के मुंडन संस्कार के लिए सामने नहीं आया. गांव के नाइयों के साथ जिला सेन समाज के विरोध को देखते हुए ग्रामीणों ने बाहर से भी नाई नहीं बुलाया था.ऐसे में साहू समाज के युवकों ने ही लोगों की हजामत बनाई. उनका मुंडन किया. मुंडन करने वाले पूर्व सरपंच हेमंत कुमार साहू के बेटे दिलेश्वर साहू ने बताया कि नाई समाज सहयोग नहीं कर रहा था तो क्या हुआ हम खुद हजामत कर सकते हैं. हालांकि युवकों को पहली बार मुंडन करने में थोड़ी परेशानी भी हुई.

बाद में मामले की जानकारी किसी ने एसडीएम को दी, तो उन्होंने मामले को गंभीरता से लेते हुए प्रशासनिक अमला गांव भेजा. जहां दोनों पक्षों को बुलाकर उनकी बात सुनी और देर रात तक समझौता कराया गया.

कलक्टर के सामने बात रखने को ग्रामीणों ने निकाली थी रैली

नाई समाज द्वारा हजामत बनाने से पीछे हटने व बहिष्कार किए जाने पर हीरापुर के ग्रामीणों ने बड़ी संख्या में जनदर्शन में पहुंचकर बालोद शहर में रैली निकाल कर विरोध जताया था. ग्रामीणों ने कलक्टर व थाने में भी ज्ञापन सौंपकर अपनी समस्या बताई थी कि किस तरह गांव के नाइयो के साथ जिले भर के नाई उनका बहिष्कार कर रहे हैं.

हीरापुर के बाहर गांव में हर नाई दुकान में हीरापुर के ग्रामीणों का हजामत नहीं करने का नोटिस लगा दिया गया था. हीरापुर के लोग बाहर के सैलून में जाते थे. वहां भी भी पहले उनसे गांव का नाम पूछा जाता था, अगर कोई नाई उनकी हजामत बना देता था तो उसे सेन समाज ढाई हजार रुपए के अर्थदंड से दण्डित करता था.

फरमान से नाई समाज भी हो रहा था प्रभावित

ग्रामीणों ने बताया कि सेन समाज ऐसा करके ग्रामीणों के साथ अपने ही समाज के लोगों को भी प्रताड़ित कर रहा था. ग्रामीण चाहते थे अगर गांव का नाई हजामत बनाने के लिए नहीं तैयार है तो हम बाहर का नाई नियुक्त करने दे, लेकिन सेन समाज के पदाधिकारी अड़ियल रवैया अपना रहे थे, जिससे गांव में तनाव की स्थिति बनी हुई थी.

अब मामला निपटने से गांव के लोगों ने राहत की सांस ली है.

First published: 6 September 2016, 8:12 IST
 
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