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बर्खास्तगी पर इमोशनल बलराम- सपा मेरी जिंदगी, मुलायम मेरे पिता जैसे

कैच ब्यूरो | Updated on: 22 June 2016, 14:52 IST
(एएनआई)

उत्तर प्रदेश में अखिलेश यादव कैबिनेट से बर्खास्तगी के बाद बलराम यादव का दर्द उभर आया. माध्यमिक शिक्षा मंत्री बलराम यादव की मंगलवार को मंत्रिमंडल से छुट्टी हो गई थी.

कौमी एकता दल और समाजवादी पार्टी के बीच हुए विलय के पीछे मीडिएटर बनने की उनकी भूमिका को इसके लिए जिम्मेदार माना जा रहा है. वहीं कार्रवाई के बाद बलराम यादव जब आज मीडिया से रूबरू हुए तो काफी भावुक नजर आए. मीडिया के सामने ही बलराम यादव रो पड़े.

बलराम यादव ने कहा, "समाजवादी पार्टी मेरी जिंदगी है. नेताजी (मुलायम सिंह यादव) मेरे अध्यक्ष ही नहीं, बल्कि मेरे पिता हैं. संरक्षक हैं."

'नेताजी से रिश्ते अपरिवर्तनीय'

मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने बलराम यादव को माध्यमिक शिक्षा मंत्री के पद से बर्खास्त किया है. वह अखिलेश सरकार के 12वें ऐसे मंत्री हैं, जिन्हें बर्खास्त किया गया है. बर्खास्तगी के पीछे कारण कई गिनाए जा रहे हैं, लेकिन प्रमुख वजह कौमी एकता दल का सपा में विलय माना जा रहा है.

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विलय के महज चंद घंटों में अखिलेश ने सख्त कदम उठाते हुए बलराम यादव की कैबिनेट से छुट्टी कर दी. लखनऊ में पत्रकारों से बातचीत के दौरान भावुक नजर आ रहे बलराम ने कहा, "समाजवादी पार्टी, नेताजी (मुलायम सिंह यादव) और मेरे रिश्ते अपरिवर्तनीय हैं."

मुलायम के करीबी हैं बलराम यादव

सबसे दिलचस्प बात यह है कि समाजवादी पार्टी के सुप्रीमो मुलायम सिंह यादव के लखनऊ में होने के बावजूद उन्हें बलराम यादव को बर्खास्त करने से पहले कोई जानकारी नहीं दी गई.

सूत्रों के मुताबिक मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने बिना वजह बताए कैबिनेट मंत्री की छुट्टी कर दी. बलराम सिंह यादव मुलायम सिंह के खास बताए जाते हैं, लिहाजा इस कार्रवाई से सपा प्रमुख और अखि‍लेश के पिता नाराज हो गए हैं.

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अखिलेश के इस फैसले को यादव परिवार में आपसी दूरियों की सुगबुगाहट के तौर पर भी देखा जा रहा है. दूसरी ओर, सूत्रों से मिली जानकारी के मुताबिक कौमी एकता दल का समाजवादी पार्टी में विलय रद्द हो सकता है.

इस बीच 27 जून को अखिलेश यादव कैबिनेट का विस्तार होने की खबर है.

27 जून को कैबिनेट विस्तार

जौनपुर से वापस लौटते ही मुख्यमंत्री ने कौमी एकता दल का सपा में विलय कराने में अहम किरदार निभाने वालों में शुमार मंत्री बलराम यादव को मंत्रिमंडल से बर्खास्त कर दिया. ऐसे में माना जा रहा है कि इस कार्रवाई के पीछे यह भी एक कारण हो सकता है.

हालांकि पार्टी के अंदर पहले से ही इस बात की चर्चा चल रही थी कि मंत्रिमंडल के विस्तार में बलराम यादव को हटाकर उनके बेटे संग्राम यादव को राज्यमंत्री बनाया जाएगा. लेकिन कार्रवाई के तरीके से उसे विलय से जोड़कर देखा जा रहा है.

पहले भी कई मंत्री हुए बर्खास्त

सीएम अखिलेश यादव इससे पहले भी अपने कई मंत्रियों को बर्खास्त कर चुके हैं. अप्रैल 2013 में तत्कालीन खादी एवं ग्रामोद्योग मंत्री (स्वर्गीय) राजाराम पांडेय की बर्खास्तगी हुई थी. उन पर महिला आईएएस पर आपत्तिजनक टिप्पणी का आरोप लगा था.

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मार्च 2014 में मनोज पारस और आनंद सिंह मंत्री पद से बर्खास्त किए गए. तत्कालीन कृषि मंत्री आनंद सिंह के बर्खास्तगी की वजह उनके पुत्र कीर्तिवर्धन सिंह का लोकसभा चुनाव से ठीक पहले बीजेपी में शामिल होना था.

वहीं लोकसभा चुनाव के बाद राज्यमंत्री और अयोध्या से विधायक पवन पांडेय को बर्खास्त किया गया था. बाद में उनकी मंत्रिमंडल में वापसी हो गई थी.

इसके बाद अक्टूबर 2015 में मुख्यमंत्री ने एक साथ आठ मंत्रियों को बर्खास्त किया. जिसमें राजा महेंद्र अरिदमन सिंह, अंबिका चौधरी, शिव कुमार बेरिया, नारद राय, शिवाकांत ओझा, आलोक कुमार शाक्य, योगेश प्रताप सिंह और भगवत शरण गंगवार शामिल थे.

First published: 22 June 2016, 14:52 IST
 
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