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ड्राई स्टेट अच्छी पहल है पर नीतीश कुमार राजस्व के घाटे को कैसे पूरा करेंगे?

तनु कपूर | Updated on: 28 November 2015, 16:40 IST
QUICK PILL
  • बिहार के मुख्यमंत्री ने पद ग्रहण करने के बाद पहली बड़ी घोषणा करते हुए अगले साल एक अप्रैल से राज्य में शराब पर बैन लगाने की बात कही है.
  • भारत के कई राज्यों में है शराब पर बैन लेकिन ज़मीनी स्तर पर उसे लागू करना होता है मुश्किल. पढ़ें किन किन राज्यों में है शराब पर प्रतिबंध और वो कितना कारगर है.

पांचवीं बार बिहार के मुख्यमंत्री बनने के बाद नीतीश कुमार ने पहले बड़े फैसले के तौर पर अगले साल एक अप्रैल से राज्य में शराबबंदी की घोषणा की है. 

नीतीश ने कहा है कि वो चुनाव से पहले बिहार की महिलाओं से किया वादा निभा रहे हैं.

बिहार को ड्राई स्टेट की बनाने की घोषणा करते हुए नीतीश ने कहा कि राज्य में वर्ष 1977-78 में भी शराब पर बैन लगाया था लेकिन इसे प्रभावी तरीके से लागू नहीं किया जा सका.

शराब निषेध दिवस के मौके पर आयोजित कार्यक्रम में नीतीश कुमार ने कहा कि शराब से सबसे ज्यादा नुकसान महिलाएं और कम आय वाले लोगों को होता है. लोगों को नशे की लत लग जाती है.

शराब की ब्रिकी से बिहार सरकार को 4000 करोड़ रुपए का राजस्व मिलता है. इसकी भरपाई मुश्किल होगी

शराब की ब्रिकी से राज्य सरकार को 4000 करोड़ रुपए का राजस्व मिलता है. उन्होंने कहा कि राजस्व की कीमत पर आम लोगों की सेहत के साथ खिलवाड़ नहीं किया जा सकता है. इसलिए बिहार सरकार ने अगले वित्त वर्ष से शराब की बिक्री पर पूरी तरह से पाबंदी लगाने का फैसला किया है. चुनाव से पहले महिला मतदाताओं ने नीतीश से शराब पर प्रतिबंध लगाने की मांग की थी.

हालांकि, उन्होंने कहा कि राज्य सरकार नई आबकारी नीति के साथ सामने आएगी जिसमें पुराने कानून के मुकाबले कई सारे अहम बदलाव देखने को मिलेंगे.

शराब की बिक्री और खपत पर प्रतिबंध लगाना राज्य सरकार के अधिकार क्षेत्र में आता है. अभी तक शराब की बिक्री और खपत पर गुजरात, मणिपुर, नगालैंड में प्रतिबंध लगाया जा चुका है. केरल सरकार ने भी शराब पर चरणबद्ध तरीके से प्रतिबंध लगाने की योजना बनाई है.

भारत में एक तय उम्र के बाद ही शराब पीने की अनुमति है. प्रतिबंधों के बावजूद शराब की बिक्री 20 साल की अवधि में 55 प्रतिशत से अधिक बढ़ी है.

2014 में विश्व स्वास्थ्य संगठन या डब्ल्यूएचओ ने शराब और स्वास्थ्य पर एक रिपोर्ट जारी की थी. रिपोर्ट के मुताबिक दुनिया की आबादी का लगभग 38.3 प्रतिशत हिस्सा नियमित रूप से शराब पीता है. भारत में औसतन एक व्यक्ति एक साल में लगभग 6.2 लीटर शराब पीता है. इस अध्ययन में 15 साल से अधिक आयु के लोगों को शामिल किया गया था.

रिपोर्ट के अनुसार भारत की आबादी का लगभग 30 प्रतिशत हिस्सा नियमित रूप से शराब का सेवन करता है जो देश की आबादी का करीब एक तिहाई है. इनमें से लगभग 11 प्रतिशत लोग ज्यादा शराब पीने वाले हैं. रिपोर्ट के अनुसार एक भारतीय औसतन हर साल 4.2 लीटर शराब पीता है. वहीं ग्रामीण औसत इससे बहुत अधिक है. गांवों में प्रति व्यक्ति पर औसतन 11.4 लीटर शराब की खपत होती है.

मई 2015 में जारी आर्थिक सहयोग और विकास (ओईसीडी ) की रिपोर्ट के मुताबिक 1992 और 2012 के बीच में शराब पीने वालों की संख्या में 55 प्रतिशत की वृद्धि हुई.

दादर नगर हवेली, अरुणाचल प्रदेश, अंडमान निकोबार द्वीप समूह, आंध्र प्रदेश, दमन एवं दीव, सिक्किम, और पुडुचेरी देश में ऐसी जगह है जहां सबसे ज्यादा शराब पीने वाले हैं.

शराब प्रतिबंध और निषेध

शराब भारत के अधिकांश हिस्सों में आसानी से उपलब्ध है. देश के कुछ राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में शराब पर कई तरह के प्रतिबंध लगाए गए हैं. गुजरात, केरल, लक्षद्वीप, मणिपुर और नगालैंड में शराब की बिक्री पर पूरी तरह से बैन है.

आंध्र प्रदेश, हरियाणा, मिजोरम, और तमिलनाडु में पहले शराब पर रोक लगाई गयी थी लेकिन बाद में सरकार को अपना फैसला वापस लेना पड़ा.

गुजरात

भारत के पहले राज्यों में से एक राज्य जहां शराब के उत्पादन, बिक्री, और खपत पर रोक लगाई गई थी. हालांकि यहां पर विदेशियों के लिए एक महीने की वैध परमिट की सुविधा दी गई है. गुजरात की नीति ने महाराष्ट्र, राजस्थान, गोवा, और दीव क्षेत्रों में शराब व्यापार को बढ़ावा दिया है.

केरल

केरल की सरकार ने अगस्त 2014 में शराब निषेध की दिशा में आगे कदम बढ़ाने का फैसला किया. यह प्रतिबंध दो कारणों से बहुत आश्चर्यजनक था. देश में सबसे ज्यादा शराब की खपत केरल में होती है और राज्य सरकार की रेवेन्यू में 22 प्रतिशत (लगभग 8,000 करोड़ रुपये) हिस्सेदारी इससे आती है.

लक्षद्वीप

बंगरम को छोड़कर लक्षद्वीप के सभी द्वीपों में शराब पूरी तरह से बैन है.

मणिपुर

मणिपुर सरकार ने अप्रैल 1991 में राज्य में शराब की बिक्री पर प्रतिबंध लगा दिया था. लेकिन इससे शराब की खपत पर कोई असर नहीं हुआ. 2002 में राज्य के पांच पहाड़ी जिलों से बैन हटाया गया जिससे सरकार के ख़ज़ाने में 50 करोड़ रूपए आए. जुलाई 2015 के बाद सरकार प्रतिबंध को पूरी तरह से हटाने का विचार कर रही है.

नागालैंड

नागालैंड राज्य में 1989 में ही शराब की बिक्री और खपत पर प्रतिबंध लगा दिया गया था. लेकिन इसके बावजूद अवैध बिक्री में कमी नहीं आई. जिसके बाद 2014 में सरकार ने प्रतिबंध हटाने के बारे में विचार करना शुरू कर चुकी है.

निषेध पर हावी राजनीति

भूतपूर्व केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री ए रामदास ने राष्ट्रीय शराब नीति और देश को ड्राई स्टेट बनाने की मांग की थी. हरियाणा में निषेध लागू करने का एक असफल प्रयास पूर्व मुख्यमंत्री बंसी लाल ने 19 महीने की अवधि के लिए 1996 और 1998 के बीच बनाया था. उन्होंने चुनावी वादे के आधार पर ऐसा फैसला किया था. महिलाओं और बच्चों के लिए शराब की तस्करी करना आम था. उत्तर प्रदेश और पंजाब से सस्ती शराब का अवैध व्यापार शुरू हो गया था. राज्य में राजनीतिक संरक्षण में माफिया नेटवर्क पैदा हो गया था. न्यायमूर्ति जे सी वर्मा आयोग ने बंसीलाल और उनके मंत्री गणेशी लाल को इस हालात के लिए दोषी पाया. हरियाणा को बैन की वजह से 1200 करोड़ रुपये का नुकसान हुआ. बंसी लाल की हरियाणा विकास पार्टी जब लोकसभा चुनाव में हारी तब बैन को हटा लिया गया.

आंध्र प्रदेश

आंध्र प्रदेश में 1994 में एनटी रामाराव ने शराब बिक्री पर निषेध लगाया गया था. इसके बाद शराब विरोधी आंदोलन को बढ़ावा मिला. इसमें ग्रामीण और शहरी महिलाओं का योगदान था. 1997 में एनटीआर के उत्तराधिकारी एन चंद्रबाबू नायडू ने बैन हटा लिया. 1997 से राज्य में 7500 शराब की दुकानें खुल गई हैं.

नार्थ ईस्ट

मणिपुर, मिजोरम और नगालैंड पूरी तरह से ड्राई स्टेट्स हैं. इन तीनों राज्यों में शराब की बिक्री और खपत पर पूर्ण प्रतिबंध लगा हुआ है. नागालैंड में सबसे पहले बैन लागू किया गया. 1989 में इसे प्रभावशाली नागा मदर्स एसोसिएशन के दबाव में लगाया गया.

मिजोरम में 1995 में मिजोरम ड्राई स्टेट बन गया. चर्च ने भी निषेध को लागू करने में एक महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी. 2007 में राज्य सरकार ने राज्य में शराब उद्योग को बढ़ाने के लिए और रोजगार के अवसर पैदा करने के लिए शराब के उत्पादन को बढ़ावा दिया.

मणिपुर में महिलाओं के समूहों ने और कई भूमिगत सशस्त्र संगठनों ने निषेध की मांग की थी. जिसके बाद 1991 में बैन लगाया गया. हालांकि ओकराम इबोबी सिंह की सरकार के आदेश में मणिपुर के पांच पर्वतीय जिलों से निषेध हटाने के लिए कैबिनेट में निर्णय लिया था, ताकि सरकार को प्रति वर्ष 50 करोड़ रुपये का रेवेन्यू जुटाने की अनुमति मिल सके.

गुजरात

निषेध के बावजूद माफिया और भ्रष्ट अधिकारियों के गठजोड़ की वजह से शराब की सप्लाई जारी है. 1977 में अहमदाबाद में अवैध शराब से 101 लोगों की जान चली गई थी. जबकि 1989 में वडोदरा में 132 लोगों की मौत हो गई थी.

इसके बाद न्यायाधीश ए ए दवे की अध्यक्षता में एक जांच आयोग ने सरकार से निषेध नीति की समीक्षा करने के लिए कहा. हालांकि सरकार ने आयोग की इस सिफारिश को खारिज कर दिया. यहां तक ​​कि नेता और पुलिस भी अवैध व्यापार में शामिल थे.

भारत में किस दिन होता है ड्राई डे

अधिकांश भारतीय राज्यों और संघ शासित प्रदेशों में कुछ दिन ऐसे होते हैं जिन्हे ड्राई डे कहते हैं. इन दिनों शराब की बिक्री पर नहीं होती है. इस दिन सार्वजनिक रेस्तरां में शराब नहीं दी जाती है.

गणतंत्र दिवस (26 जनवरी), स्वतंत्रता दिवस (15 अगस्त), और गांधी जयंती (2 अक्टूबर) देश भर में ड्राई डे होता है. इसके अलावा राज्यों में उनके प्रमुख त्यौहारों पर ड्राई डे होता है. कुछ राज्यों में महीने का पहला दिन ड्राई डे होता है.

First published: 28 November 2015, 16:40 IST
 
तनु कपूर @tanukapoor9

संवाददाता, कैच हिन्दी. सिनेमा, साहित्य, मॉस मीडिया और फेमिनिस्ट मूवमेंट्स से जुड़े विषयों पर लिखती हैं.

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