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मेहुल चोकसी की बदौलत बैंकों के NPA में 8 हजार करोड़ का इजाफा

कैच ब्यूरो | Updated on: 15 April 2018, 17:34 IST

बैंकिंग सेक्टर के एनपीए या बैड लोन में 8,000 करोड़ रूपए की जोरदार बढ़ोतरी हुई है. 31 मार्च को समाप्त तिमाही में गीतांजलि जेम्स समूह की बदौलत बैंकों के बैड लोन में ये बढ़ोतरी हुई है. बीते दिसम्बर तक बैंकों का एनपीए 8,40,958 करोड़ रुपये तक पहुंच चुका था. इस एनपीए में उद्योग जगत कृषि क्षेत्रों का कर्ज शामिल है. 

 

भारतीय रिज़र्व बैंक के नवीनतम आंकड़ों के मुताबिक सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों के फंसे हुए कर्जे में सबसे बड़ी हिस्सेदारी कॉर्पोरेट ऋण की है. आंकड़ों के मुताबिक यह हिस्सेदारी लगभग तीन चौथाई है. आंकड़ों के मुताबिक सरकारी बैंकों का कुल 6.41 लाख करोड़ रुपये का कर्ज फंसा हुआ है. इसमें उद्योग जगत की हिस्सेदारी चार लाख 70 हजार करोड़ के करीब है. यह बैंकों द्वारा दिए गए कुल कर्ज का करीब 37 फीसदी है.

आंकड़ों के मुताबिक कर्ज में 22.83 फीसदी हिस्सेदारी रखने वाले रीटेल सेक्टर में एनपीए का आंकड़ा केवल 3.71 फीसदी (23,795 करोड़ रु) है. इसके अलावा कृषि क्षेत्र में यह नौ फीसदी और सेवा क्षेत्र में 13.21 फीसदी है.

सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों का कुल 6.41 लाख करोड़ एनपीए में 4.70 लाख करोड़ रुपये 31 मार्च, 2017 तक उद्योग को दिए गए ऋण में से था. जबकि रिटेल लोन में एनपीए का यह हिस्सा 23,795 करोड़ रुपये था.

31 दिसंबर 2017 तक बड़े उद्योगों के एनपीए अनुपात के मामले में, इंडियन ओवरसीज बैंक 44.29 प्रतिशत के साथ सबसे ऊपर था. जबकि आईडीबीआई बैंक का अनुपात 42.69 प्रतिशत, स्टेट बैंक ऑफ इंडिया का 25.0 9 प्रतिशत, इलाहाबाद बैंक 36.94 प्रतिशत, बैंक ऑफ महाराष्ट्र 36.58 प्रतिशत, आईसीआईसीआई बैंक 20.83 प्रतिशत था.

First published: 15 April 2018, 15:23 IST
 
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