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आदिवासी या माओवादी? एक और ग्रामीण की मौत पर गहराया शक

राजकुमार सोनी | Updated on: 26 July 2016, 17:04 IST
(राजकुमार सोनी)

बस्तर में माओवादियों और सरकार के बीच जारी संघर्ष में अक्सर ही निर्दोष ग्रामीण निशाना बनते रहते हैं. अब एक और ऐसी ही खबर आ रही है जिसमें मृतक के माओवादी होने पर संशय पैदा हो रहा है. ग्रामीणों का कहना है कि आदिवासियों को मिलते-जुलते नामों का खामियाजा भुगतना पड़ रहा है.

पिछले दिनों सुकमा जिले के गोमपाड़ इलाके में मड़कम हिड़मे नाम की एक युवती को सुरक्षाबलों ने मौत के घाट उतार दिया था. तब यह बात सामने आई थी कि कोई अन्य मड़कम हिड़मे सामाजिक कार्यकर्ता हिमांशु कुमार की ओर से सुप्रीम कोर्ट में दाखिल की गई एक याचिका में गवाह बनाई गई थी.

गोमपाड़ जैसी ही एक और घटना बीजापुर के गंगालूर इलाके के पालनार में भी देखने को मिली है. यहां सीतू हेमला नाम के एक ग्रामीण किसान को सुरक्षाबलों ने मुठभेड़ में मार गिराने का दावा किया है. लेकिन हेमला के गांव वालों से बातचीत में जो बात सामने आ रही है वह काफी चौंकाने वाली और डराने वाली है. कहा जा रहा है कि हेमला को इस गफलत में सुरक्षाबलों ने मार गिराया क्योंकि इलाके में एक अन्य माओवादी कमांडर सीतू हेमला की तूती बोलती है.

हाथ बांधकर ले गए जंगल

सीतू हेमला की पत्नी लक्ष्मी का कहना है कि यदि उनके पति माओवादी होते तो क्या और लोगों की तरह घर में रहकर खेतीबाड़ी और मजूरी करते? लक्ष्मी के मुताबिक पांच जुलाई की सुबह वह अपने पति और सास सोमाली के साथ खेत में काम करने गई थी. उसी दौरान गश्त पर निकले सुरक्षाबल वहां आ धमके. उनके साथ कुछ ऐसे लोग भी थे जिन्होंने मुंह पर कपड़ा बांध रखा था. वे लगातार कह रहे थे- 'यहीं है सीतू हेमला...'

इससे पहले कि वे लोग समझ पाते पुलिस ने उनके पति का हाथ रस्सियों से बांध दिया और जंगल की ओर ले जाने लगे. लक्ष्मी और उनकी सास सीतू को बचाने दौड़ी तो उन्हें बंदूक की बट से मारा गया. बदहवास लक्ष्मी और सोमाली ने गांव पहुंचकर लोगों को एकत्रित किया और पास के चेरपाल पोस्ट और गंगालूर थाने पहुंचकर मदद की गुहार लगाई, लेकिन दोनों ही जगह पर मौजूद वर्दीधारियों ने कहा कि माओवादी होगा तो मरना तय है.

राजकुमार सोनी

पेड़ पर टंगी थी लाश

हालांकि घटना के बाद बीजापुर में पुलिस के अधिकारियों ने प्रचारित किया था कि सीतू हेमला की मौत मुठभेड़ के दौरान हुई है, लेकिन लक्ष्मी और सोमाली का कहना है कि जब वे सीतू को खोजते हुए जंगल में पहुंची तो उसकी लाश एक पेड़ पर टंगी हुई थी और हाथ-पांव में मोटी-मोटी कीलें लगी थी. सीतू के शरीर पर यातना के कई निशान मौजूद थे. ऐसा लग रहा था जैसे गोली मारने के पहले सीतू को कील ठोंककर पेड़ पर लटका गया था.इस घटना के बारे में बीजापुर के पुलिस अधीक्षक केएल ध्रुव का कहना है, 'पुलिस की ओर से कोई गलती नहीं हुई है. सीतू हेमला खुंखार माओवादी था. उसे सुरक्षाबलों ने मुठभेड़ में मारा है.'

सुरक्षाबलों ने लड़की से कहा- रेप कर देंगे

घटना के बाद अभी हाल के दिनों में लोक स्वातंत्र्य संगठन की छत्तीसगढ़ इकाई और वुमेन अगेंस्ट सेक्सुअल वाइलेंस रिप्रेशन की सदस्य रिनचिन, शालिनी गेरा और शिवानी तनेजा ने गांव का दौरा किया. इन लोगों ने भी पाया कि सुरक्षाबलों की ज्यादती बढ़ गई है.

ग्रामीणों से एकत्रित की गई जानकारी के आधार पर सदस्यों ने बताया कि इसी महीने 18 जुलाई को गश्त पर निकले सुरक्षाबलों ने गांव की बुधरी बाई को भी डंडे से मारा-पीटा था.बुधरी बाई को सबके सामने कान पकड़कर उठक-बैठक करवाई गई और फिर एक जवान ने धमकी दी कि तुम्हारी लड़की का रेप कर देंगे. बुधरी अपनी लड़की को साथ भाग खड़ी हुई तब जाकर घटना टली. सदस्यों का आरोप है कि माओवाद के खात्मे की आड़ में सुरक्षाबल यौन हिंसा और यातना का सहारा ले रहे हैं.

First published: 26 July 2016, 17:04 IST
 
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