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बस्तर में एम्बुलेंस की जगह चल रही उल्टी चारपाई

शिरीष खरे | Updated on: 8 June 2016, 23:15 IST
QUICK PILL
  • इंद्रावती नदी के उस पार सैकड़ों गांव स्वास्थ्य की बुनियादी सुविधाओं से बेदखल. माओवाद प्रभावित पूरे बस्तर संभाग में महज 135 एमबीबीएस डॉक्टर और 70 ग्रामीण चिकित्सा अधिकारी.
  • गंभीर मरीज 25 से 30 किमी चारपाई पर तय करते हैं अस्पताल का सफर. बस्तर संभाग का करीब 60 प्रतिशत इलाका आज भी संपर्क मार्गों से विहीन है.

छत्तीसगढ़ प्रदेश को वजूद में आए डेढ़ दशक से अधिक समय बीत चुका है. मगर माओवाद प्रभावित बस्तर संभाग की स्वास्थ्य सुविधा आज भी खाट और कंधों के भरोसे चल रही है. हालत यह है कि महज जगदलपुर जिले में इंद्रावती नदी के उस पार सौ से ज्यादा गांवों में सरकारी अस्पतालों का नामोनिशान नहीं है.

स्वास्थ्य सुविधाओं के नाम पर राजधानी रायपुर से लेकर बस्तर तक सिर्फ खानापूर्ति हो रही है. सबसे बुरी स्थिति बीजापुर, दंतेवाड़ा, सुकमा और नारायणपुर जिलों की है जहां ग्रामीणों को मलेरिया से बचने की गोलियां तक नहीं मिलतीं और यह इलाका मलेरिया से मौतों के मामले में देश भर में सबसे ऊपर है.

चारपाई से मरीज को कई किमी दूर जगदलपुर जिला अस्पताल तक ले जाने का ऐसा ही एक दृश्य झीरम घाटी में भी दिखाई देता है. अहम यह है कि ऐसे दृश्य यहां के लिए आम हैं. स्वास्थ्य सुविधा के मामले में यह पूरा इलाका जैसे 18वीं सदी में जी रहा है.

बड़ी बीमारी के बाद ही लोग यहां से बाहर निकलते हैं. कुल मिलाकर, ओझा और गुनिया ही यहां के लिए एमबीबीएस डॉक्टर हैं. 

सड़क और पुल के अभाव में इन्हें नाव के सहारे नदी को पार करना पड़ता है

गंभीर मरीज या प्रसव के दौरान महिलाओं को 25 से 30 किमी दूर अस्पताल ले जाने की जहमत उठाई जाती है. मगर इनके लिए रास्ता भी मौजूद नहीं है. सड़क और पुल के अभाव में इन्हें नाव के सहारे नदी को पार करना पड़ता है.

नदी पार करने के बाद अस्पताल का सफर पूरा करने के लिए जिला स्तर तक में एम्बुलेंस की सुविधा नहीं होती, लिहाजा फिर साथ लाई चारपाई से ही मरीज या महिलाओं को डॉक्टरों के पास तक पहुंचाया जाता है. आज के हाईटेक दौर में भी देश के इस हिस्से के लोग बुनियादी हकों से वंचित हैं.

हर साल औसतन चार हजार मरीजों की मौत

जी हां, सरकारी आंकड़ों के मुताबिक बस्तर संभाग में हर साल चार हजार से ज्यादा मरीजों की मौत दर्ज हो रही है. यह संख्या ज्यादा इसलिए हो सकती है कि बड़ी आबादी तो अस्पताल पहुंचने से पहले ही दम तोड़ देती है. 

बीते साल अकेले बस्तर में 200 से ज्यादा महिलाओं ने प्रसव के दौरान दम तोड़ दिया था. वहीं, 45 से ज्यादा बच्चों ने जन्म के साथ दम तोड़ दिया.

चिंताजनक बात है कि उल्टी, दस्त जैसी बीमारियों के कारण भी बड़ी संख्या में मौतें हो रही हैं. इनमें मरने वाले ज्यादातर उन इलाकों में है जिनकी पहुंच डॉक्टरों तक नहीं है. 

मरीज की तबीयत ज्यादा बिगड़ जाए तो कई बार उसे चारपाई से उठाकर दर-दर भटकते हैं.

क्योंकि साढ़े चार सौ पद खाली हैं

कहने को बस्तर में स्वास्थ्यकर्मियों के 722 पद स्वीकृत है, लेकिन करीब साढ़े चार सौ पद खाली पड़े हैं. सबसे ज्यादा कमी विशेषज्ञ डॉक्टरों की है. पूरे बस्तर संभाग में महज 19 विशेषज्ञ डॉक्टर हैं, जबकि 244 पद खाली पड़े हैं. 

वहीं, एमबीबीएस डॉक्टरों के लिए 310 पद मंजूर हुए हैं, लेकिन 135 एमबीबीएस डॉक्टर ही यहां कार्यरत हैं.

इसी तरह 149 ग्रामीण चिकित्सा अधिकारियों में 70 ही यहां तैनात किए जा सके हैं. बस्तर और सुकमा जिले में तो एक भी विशेषज्ञ चिकित्सक नहीं है. वहीं, एमबीबीएस डॉक्टरों की बात की जाए तो बीजापुर में 36 के मुकाबले महज 4 और सुकमा में 33 के मुकाबले महज 9 एमबीबीएस डॉक्टर हैं.

इतना बड़ा इलाका संपर्क-विहीन

बस्तर का करीब 60 प्रतिशत हिस्सा पहुंच विहीन है यानी सड़कों से नहीं जुड़ा है. सड़कें नहीं होने के कारण ग्रामीण पैदल ही पगडंडियों के सहारे जिला मुख्यालय पहुंचते हैं. इसलिए यहां उल्टी चारपाई ही एम्बुलेंस कहलाती है.

ऐसे में ज्यादातर मरीज ओझा और गुनिया के फेर में पड़कर जिंदगी दांव पर लगाते हैं. दूसरी दिक्कत यह है कि संक्रमण, बीमारी फैलने की खबर चिकित्सा विभाग तक पहुंचने में कई दिन लग जाते हैं. 

लिहाजा कई बार असाध्य बीमारियां पैर पसार लेती हैं और स्थितियां काबू से बाहर हो जाती हैं.

आधे अस्पताल भवन-विहीन

बस्तर संभाग में 12 सौ प्राथमिक अस्पताल हैं जिनमें करीब छह सौ यानी आधे अस्पताल भवन-विहीन हैं. आबादी के लिहाज से कई गांवों में भले ही अस्पताल बनाने की घोषणा हो गई हो, लेकिन इनके भवन नहीं होने से मरीजों को अस्पतालों का फायदा नहीं मिल पा रहा है. इसके चलते ग्रामीणों को जिला अस्पताल ही पहुंचना पड़ता है जहां मरीजों की तादाद अपेक्षाकृत अधिक हो जाती है.

First published: 8 June 2016, 23:15 IST
 
शिरीष खरे @catch_hindi

विशेष संवाददाता, राजस्थान पत्रिका

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